Breaking News

दिव्यांग अधिकार अधिनियम 2016 क्या है ? संपूर्ण सच्चाई।What is the Disability Rights Act of 2016? The Complete Truth

सर्वप्रथम न्यूज सौरभ कुमार : दिव्यांगों के लिए बिल्कुल निःशुल्क काम करने वाले तोशियास सचिव ने बताया कि जब दिव्यांग कानून बनता है , संसद बैठती है, आगे अभी law बनेगा देख लेना। तीन बार देखेंगे, एक बार नहीं, तीन बार। तीन बार देखेंगे। एक बार लोकसभा देखेगी, फिर राज्यसभा देखेगी। जब दो देख लेंगे, उसके बाद संसदीय समिति देखेगी। जब तीनों देख लेंगे तो न्यायपालिका देखेगी। उसके बाद ये सब देख लेंगे जनता के कि हमें नहीं दिखाया। छह महीने, साल भर में एक law बन पाता है। यह तरीका है Article 17 की जो विशेषता वह है, वह है कि वह निजी व्यक्तियों पर भी लागू है। है ना, किसी ने अस्पृश्यता का प्रचार किया तो उससे social disability उत्पन्न होती है। सामाजिक निरोग्यता, सामाजिक निरोग्यता का मतलब होता है कि नागरिक अधिकारों का अगर उल्लंघन हो रहा है तो उसको social disability कहते हैं। तो नागरिक अधिकारों का उल्लंघन अस्पृश्यता का परिणाम है। तो हमें समझना यह है कि नागरिक अधिकार किसको कहते हैं और उसको उसकी विशेषता इस भाषा की क्या है कि संविधान स्वयं इसको अपराध घोषित कर रहा है राज्य में राज्यपाल के साथ वही होगा। जो राष्ट्रपति ने किया वही राज्यपाल भी करेगा। अंतर कहाँ आ रहा है? कई बार कि अंतर नहीं भी कहें तो अगर ऐसे कहें कि कई बार ऐसा हो रहा है या होता है कि एक ही विषय पर एक से अधिक बार अध्यादेश जारी कर दिया गया। है ना? सत्र मान लिया समाप्त हो गया और हमने अध्यादेश जारी किया, ठीक है। अब संसद सत्र में आई वापस तो पांच दिन सत्र चला। फिर सत्र को समाप्त कर दें हम। फिर से नया अध्यादेश ला दें उसी विषय पर तो फिर छह माह चलेगा। ठीक है ना? फिर अगर संसद का सत्र जानबूझकर समाप्त कर दिया तो फिर छह माह चल सकता है तो हम उस शक्ति का दुरुपयोग कर सकते हैं। right? उस मामले में court ने कहा कि अगर एक ही विषय पर अध्यादेश जारी करने के लिए बार बार स्वैच्छिक तरीके से सत्र को समाप्त किया जा रहा है तो यह संविधान के साथ धोखाधड़ी है अब जब union हो गया तो federation नहीं रहा तो राज्यों की जो विधायी शक्ति है वह संसद के पास। राज्य सूची पर कानून बना सकती है संसद 353 में। कार्यपालिका शक्ति सब संसद के पास। सारी शक्तियां संसद के पास है। एक स्थिति यह है। दूसरी most of the rights are suspended। अधिकार उन्नीस तो निलंबित हो ही जाएगा। बीस, इक्कीस को छोड़ दें तो बाकी सब अधिकारों का प्रवर्तन निलंबित है। प्रवर्तन के निलंबन का मतलब है कि हम अपने अधिकार का प्रयोग कर सकते हैं लेकिन दावा नहीं कर सकते। तो प्रवर्तन का निलंबन हो गया 359 में 358, 359। ठीक है। यह राष्ट्रीय आपात है।

Check Also

बैंक का इतिहास क्या है ? What is the history of the bank?

🔊 Listen to this सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : दिव्यांगों के लिए बिल्कुल निःशुल्क काम …