Breaking News

बड़ी खबर ​”लोकतंत्र में दिव्यांगों का ‘वनवास’ खत्म करे सरकार जनसंख्या के अनुपात में मिले राजनीतिक आरक्षण”

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : दिव्यांगों के लिए बिल्कुल निःशुल्क काम करने वाले तोशियास सचिव ने बताया कि भारत में 2026 में जनगणना हो रहा है और संख्या बल के आधार पर जिस प्रकार से संविधान में संशोधन करके अन्य जाति के लोगों को शामिल किया गया था उसी प्रकार से जनप्रतिनिधि बना कर भारत के दिव्यांगों को भी शामिल किया जाए सरकार की क्या मजबूरी है क्या सरकार भी दिव्यांग हो चुका है जब कोई सकलांग व्यक्ति भारतीय संविधान में बैठकर विकलांग व्यक्ति को अधिकार नहीं दिला सकता है तो क्या कहा जाए 29 में संविधान संशोधन अधिनियम जो वर्ष उन्नीस सौ तिहत्तर में पारित किया गया था, भारतीय संसद के ढांचे में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन लेकर आया था। इस संशोधन के जरिए लोकसभा के निर्वाचित सदस्यों की संख्या पांच सौ पच्चीस से बढ़ाकर पांच सौ पैंतालीस कर दी गई। सवाल यह है कि आखिर यह संशोधन क्यों किया गया था और केवल लोकसभा में ही क्यों किया गया? दरअसल उन्नीस सौ इकहत्तर की जनगणना में तीव्र जनसंख्या वृद्धि देखा गया था। लिहाजा इस वृद्धि को देखते हुए जनसंख्या और प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन बनाना था। यही कारण है कि इस संशोधन द्वारा राज्यों से चुने जाने वाले सदस्यों की संख्या बढ़ाई गई। जबकि केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधित्व को पच्चीस सीटों से घटाकर बीस कर दिया गया। इसका कारण यह भी था कि अधिकांश जनसंख्या वृद्धि राज्यों में दर्ज की गई थी, केंद्र शासित प्रदेशों में नहीं। इस प्रकार इकत्तीसवें संविधान संशोधन ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक प्रतिनिधिक बनाने में योगदान दिया और यह भी सुनिश्चित किया कि लोकसभा में जनसंख्या के अनुपात में उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।

Check Also

​”सरस सलिल अवॉर्ड्स 2026 भोजपुरी सिनेमा के दिग्गजों से सजेगा मंच, दर्शकों के लिए प्रवेश निशुल्क।”

🔊 Listen to this सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : भाई कहाँ जा रहे हैं हम …