सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : दिव्यांगों के लिए बिल्कुल निःशुल्क काम करने वाले तोशियास सचिव ने बताया कि भारत को ‘जुगाड़ का देश’ बताते हुए यह समझाने की कोशिश की है कि अगर लोग किसी नियम या कानून को तोड़ना चाहें, तो वे बहुत ही चतुराई से उसके बीच का कोई न कोई रास्ता निकाल ही लेते हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि यदि उच्चतम न्यायालय किसी राज्यपाल को पद से हटाने से मना कर देता है, तो सरकार उसे हटाने के बजाय उसका स्थानांतरण (Transfer) कर देती है, क्योंकि संविधान में स्थानांतरण पर कोई स्पष्ट रोक नहीं है। इसके माध्यम से वे यह संदेश देना चाहते हैं कि केवल संविधान के शब्दों को पढ़ना या नियमों का पालन करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि संवैधानिक नैतिकता और उसके पीछे की भावनाओं को समझना और उनका सम्मान करना अधिक महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, नियमों के पीछे का असली उद्देश्य तभी सफल होता है जब हम उन्हें केवल शब्दों के रूप में नहीं, बल्कि एक नैतिक जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करें भारत में आरक्षण (Reservation) की जटिलताओं और इसकी राजनीतिक प्रकृति पर प्रकाश डालता है आरक्षण की वर्तमान स्थिति और उससे जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की गई है। वक्ता का कहना है कि सरकारें जातिगत जनगणना के आँकड़े जारी करने से बच रही हैं क्योंकि आरक्षण व्यवस्था में लंबे समय से कोई बदलाव या समीक्षा नहीं की गई है। आरक्षण, जिसे पिछड़ेपन को दूर करने का माध्यम माना गया था, अब केवल सरकारी नौकरी पाने का एक ज़रिया बनकर रह गया है। अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के संपन्न लोग ‘क्रीमी लेयर’ अपनाने को तैयार नहीं हैं, जिससे यह मुद्दा पूरी तरह से राजनीतिक हो गया है। अंत में यह स्पष्ट किया गया है कि सामाजिक न्याय के बजाय अब यह ‘वोट बैंक’ की राजनीति बन चुका है, और न्यायपालिका हर राजनीतिक समस्या का समाधान नहीं कर सकती “क्या नियम तोड़ना ही हमारी चतुराई है? तोशियास सचिव सौरभ कुमार का विश्लेषण ‘जुगाड़ का देश’ और संवैधानिक जिम्मेदारी क्या बिहार में हो जाएगा फिर से स्थिति हो जाएगा ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) के बारे में विस्तार से समझाया गया है, जिसे ‘साइलेंट डिजीज’ भी कहा जाता है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें हड्डियाँ धीरे-धीरे पतली, कमजोर और भंगुर हो जाती हैं, जिससे मामूली चोट लगने पर भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है हमारे शरीर में हड्डियाँ बनने और टूटने की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है, जहाँ ‘ऑस्टियोक्लास्ट’ पुरानी हड्डियों को तोड़ते हैं और ‘ऑस्टियोब्लास्ट’ नई हड्डियों का निर्माण करते हैं। जब हड्डियाँ टूटने की दर बनने की दर से अधिक हो जाती है, तो हड्डियों का घनत्व (Density) कम हो जाता है, जिसे ऑस्टियोपोरोसिस कहते हैं। इसके मुख्य कारणों में बढ़ती उम्र, महिलाओं में मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन की कमी, कैल्शियम और विटामिन-D की कमी के साथ-साथ धूम्रपान, शराब का सेवन और शारीरिक निष्क्रियता शामिल हैं। पीठ दर्द, कद कम होना और झुकी हुई कमर इसके प्रमुख लक्षण हैं। डेक्सा स्कैन (DEXA Scan) के माध्यम से इसका पता लगाया जा सकता है। उपचार के लिए नियमित व्यायाम, धूप का सेवन और कैल्शियम युक्त आहार जरूरी है। हाल ही में वैज्ञानिकों ने Piezo1 नामक प्रोटीन की खोज की है, जो व्यायाम के दौरान हड्डियों को मजबूती प्रदान करने में सहायक है, जिससे भविष्य में बेहतर दवाओं की उम्मीद बढ़ी है ”भारत को ‘जुगाड़ का देश’ कहना केवल एक मुहावरा नहीं, बल्कि हमारी उस प्रवृत्ति पर कड़ा प्रहार है जहाँ लोग नियमों की आत्मा को कुचलकर अपनी चतुराई से चोर-रास्ते निकालने में माहिर हैं। गहरा क्षोभ व्यक्त किया गया है कि किस प्रकार संवैधानिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर कानूनी छिद्रों (Loopholes) का इस्तेमाल किया जाता है; उदाहरण स्वरूप, यदि उच्चतम न्यायालय किसी राज्यपाल को पद से हटाने पर अंकुश लगाता है, तो सरकार ‘स्थानांतरण’ के दांव-पेच का सहारा लेकर संविधान की मूल भावना का उपहास उड़ाती है। यह इस कटु सत्य को उजागर करता है कि केवल संविधान के काले अक्षरों को पढ़ लेना पर्याप्त नहीं है। असली चुनौती संवैधानिक नैतिकता (Constitutional Morality) और उसके पीछे निहित मूल्यों को आत्मसात करने की है। जब तक हम नियमों को केवल कागजी शब्द मानकर उनके साथ खिलवाड़ करेंगे और उन्हें एक नैतिक जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार नहीं करेंगे, तब तक लोकतंत्र का वास्तविक उद्देश्य केवल ‘राजनीतिक जुगाड़’ की भेंट चढ़ता रहेगा।”
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