सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार पटना: बिहार में 44 लाख दिव्यांग मौजूद है सभी जाति वर्गों को बिहार सरकार के सौजन्य से छात्रवृत्ति की राशि प्रदान की जाती है जिसमें अल्पसंख्यक अति पिछड़ा महिला वर्ग सभी सम्मिलित है वहीं दिव्यांगों को जो छात्रवृत्ति की राशि बिहार सरकार के द्वारा प्रदान की जाती थी वह बंद कर दी गई है और यह कहा गया है की अब नेशनल स्कीम के तहत उन्हें यह राशि और छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी लेकिन आप जब वास्तविक स्थिति देखेंगे तो नेशनल स्कॉलरशिप स्कीम जोकि यह कहता है कि हम एक राज्य में कुछ ही छात्र को यह छात्रवृत्ति प्रदान करवा सकते हैं तो ऐसी स्थिति में हमारा जो दिव्यांग समाज है वह पढ़ाई के कारण ही इतना पीछे है क्योंकि शारीरिक दिव्यांग के कारण और आर्थिक तंगी के कारण अपना पढ़ाई नहीं कर पाता ऐसी स्थिति में हाल के दिनों में जो आरक्षण को लेकर देश में एक हाहाकार मचा हुआ है वैसी स्थिति में दिव्यांग समाज अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं आरक्षण की सबसे अधिक किसी को आवश्यकता है तो वह दिव्यांग समाज को है और भारतीय संविधान में जब उन्हें रहना है उसे समझना है और उसका पालन करना है तो उसके लिए भी पढ़ाई अत्यंत आवश्यक है वैसे स्थिति में आप अगर महिलाओं को छात्रवृत्ति दे सकते हैं अल्पसंख्यकों को छात्रवृत्ति दे सकते हैं अति पिछड़ों को छात्रवृत्ति दे सकते हैं तो दिव्यांगों को इस छात्रवृत्ति से वंचित क्यों रखा गया है और पहले तो दिव्यांगों को यह छात्रवृत्ति मिलती भी थी तो इसे क्यों बंद कर दिया गया क्या भारत सरकार का आंकड़ा कहता है कि महज 2% दिव्यांग ही उच्च शिक्षा को प्राप्त करते हैं जबकि भारत में दिव्यांगों की संख्या 13 करोड़ से अधिक है ऐसी स्थिति में हमारे समाज को आगे बढ़ाने के लिए बिहार सरकार को और बिहार में हर उस दल को हमारे समाज के बारे में जरूर सोचना चाहिए और यह भी सोचना चाहिए कि हमारा समाज विकास कैसे करें क्योंकि आरक्षण की सबसे अधिक किसी समाज को आवश्यकता है तो वह है दिव्यांग समाज है फिर भी ना जाने क्यों शिक्षा जैसी मूलभूत अधिकार जो आदमी को एक जानवर से इंसान बनाता है दो इन्हें यह अधिकार मिलना चाहिए दूसरे शब्दों में यह समझ ले इन दिव्यांगों का पेंशन महज ₹400 आता है उसमें यह अपने पढ़ाई का खर्च नहीं दे सकते हैं ऐसी स्थिति में बिहार सरकार के द्वारा जो छात्रवृत्ति प्रदान की जाती थी वह पुनः प्रदान किया जाए ताकि हमारा समाज आत्मनिर्भर बन सके हम देश के नेतृत्व कर्ता से यह निवेदन करना चाहते हैं कि हमारे समाज के सर्वांगीण विकास के लिए यह अत्यंत आवश्यक है 21वी सदी का नारा है नॉलेज इज द पावर तो हमारे दिव्यांग समाज को भी पावरफुल बनाएं बनाए ताकि वह भी आत्मनिर्भर बन सके क्योंकि बिहार का दिव्यांग समाज भी आपके लिए बहुमूल्य बोट देता है जिससे आपकी जीत और हार तय होती है और आप चुने जाते हैं तो उन्हें आगे बढ़ाने की भी जिम्मेवारी आपकी है बिहार के नेतृत्व करने वाले व्यक्ति चाहे वह किसी भी पार्टी से हो दिव्यांग समाज के चेहरे पर आत्मविश्वास की मुस्कान आ सके
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