दिव्यांगों का संकल्प: 2016 कानून की हर नकारात्मकता को सकारात्मकता में बदलने की हुंकार।

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : भारत के दिव्यांग इस मनोबल के साथ अपना जीवन यापन करें शरीर बीमार है तो बीमार रहने दो, क्या फर्क पड़ता है? (हंसते हुए) यही तो मजा है। मनुष्य जीवन का यही मजा है कि मृत्यु का दुख भोगते हुए भी ताल ठोक कर निकल जाए। हर कष्ट सहते हुए मुस्कुरा कर निकल जाए। यही तो मस्ती है। और किसी मस्ती से… सही हम जितेंद्रीता भगवान का चिंतन, यही मजा है। मजा यह है कि अपने आप में अपने आप से संतुष्ट रहो दुख के अवसर पर हमें हमारे विचार बचाते हैं हमको, अभी हम अपने विचार में अपने को बीमार मान ले तो हम कल से आने लायक नहीं रहेंगे, ध्यान रखना।हम आज अब भी नहीं मानते कि हम बीमार हैं अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा – कमियों पर रोना नहीं, बल्कि खुद समाधान बन कर सशक्तिकरण की मिसाल कायम करने का आह्वान बीमारी को ताल ठोक कर निकल जाओ!’ – दिव्यांगों के लिए नया मंत्र शरीर बीमार है तो क्या, असली ताकत तो सकारात्मक विचारों में है।

 

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