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दान और स्वास्थ्य के वास्तविक अर्थ पर एक विशेष दृष्टिकोण समाज और अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण संदेश।

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : यदि आपके कुछ मीठे और प्यार भरे बोल किसी उदास या परेशान व्यक्ति का हौसला बढ़ाते हैं (जिससे उसका खून बढ़ता है), तो यह भी एक तरह का रक्तदान ही है यदि आप किसी थके हुए व्यक्ति की पीठ थपथपाकर उसका हौसला बढ़ाते हैं और उसकी थकान दूर करते हैं, तो आपका यह प्रयास भी श्रमदान की श्रेणी में आता है भोजन करते समय अपनी थाली में केवल उतना ही भोजन लें जितना आप खा सकें, ताकि अन्न का एक भी दाना व्यर्थ न जाए। भोजन को बर्बाद होने से बचाना भी अन्नदान के बराबर है यदि आप किसी रोते हुए या दुखी व्यक्ति को हंसा देते हैं और उसके आंसू पोंछने में मदद करते हैं, तो किसी के मन और जीवन से इस दुख को साफ करना भी स्वच्छ भारत अभियान का ही एक सुंदर हिस्सा है सरकारी सेवाओं की प्रतियोगिताओं में सम्मिलित होने वाले अभ्यर्थियों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संबंधी विषय रेखांकित किया गया है। वक्ता का कथन है कि हमारे देश में एक बड़ी संख्या में लोग वर्णांधता (रंगों को न पहचान पाने का दृष्टि दोष) से ग्रसित हैं, परंतु जागरूकता के अभाव में अधिकांश लोगों को स्वयं इस समस्या का ज्ञान नहीं हो पाता। सामान्यतः विद्यार्थी अपनी पूरी ऊर्जा, समय और संसाधन लगाकर परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, शैक्षणिक योग्यता प्राप्त करते हैं और शारीरिक दक्षता परीक्षा भी उत्तीर्ण कर लेते हैं; किंतु अंततः जब वे अंतिम चिकित्सा परीक्षण के चरण में पहुँचते हैं, तब उन्हें इस दृष्टि दोष का पता चलता है। ऐसी स्थिति में सरकारी सेवा के लिए अयोग्य घोषित होने के कारण उनका पूरा भविष्य और परिश्रम दांव पर लग जाता है। अतः यह नितांत आवश्यक है कि शासकीय सेवा का स्वप्न देखने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी को समय रहते अपनी आँखों का वर्णांधता परीक्षण अवश्य करा लेना चाहिए, ताकि भविष्य में होने वाली इस गंभीर समस्या और मानसिक आघात से बचा जा सके।

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