Breaking News

बिहार में मिलेगा दिव्यांगों एवं सामान व्यक्तियों को ग्रामीण स्तर पर स्वरोजगार का अफसर कोरोना महामारी में

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : बिहार में मिलेगा दिव्यांगों एवं सामान व्यक्तियों को ग्रामीण स्तर पर स्वरोजगार का अफसर कोरोना महामारी में ग्रामीण स्तर पर स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने तथा किसानों को उनके फसल उत्पादों के लिए बेहतर मूल्य दिलाने के उद्देश्य से कृषि उत्पाद आधारित लघु उद्योगों की स्थापना हेतु बिहार में बिहार राज्य उद्यानिक उत्पाद विकास कार्यक्रम पिछले वित्तीय वर्ष 2019-20 से कार्यान्वित किया जा रहा है। इस योजना की अवधि 5 वर्ष की होगी तथा इन 5 वर्षों में
इस योजना के अतर्गत 1264.04876 लाख रूपये व्यय किये जायेंगे। इस योजना के तहत प्रथम वर्ष में समूह
के गठन के उपरान्त सभी ढाँचागत सुविधा एवं मशीन आदि की संस्थापना हेतु राशि उपलब्ध कराया जाना
है। द्वितीय एवं तृतीय वर्ष में उत्तम कृषि क्रियाएँ, पैकेजिग मेटेरियल एवं उत्तम स्वस्थ क्रियाएँ हेतु ही मात्र
राशि उपलब्ध करायी जायेगी। समूह के प्रस्ताव के आलोक में चतुर्थ एव पचम वर्ष में यथावश्यक मरम्मति एवं आकस्मिकता हेतु राशि उपलब्ध करायी जायेगी।
माननीय मंत्री ने कहा कि एक इकाई की स्थापना हेतु 10 लाख रूपये लागत मूल्य निर्धारित किया
गया है, जिसमें लाभार्थी को 90 प्रतिशत अनुदान अर्थात 9 लाख रूपये की सहायता उपलब्ध करायी जायेगी।
माननीय मंत्री ने कहा कि बिहार राज्य उद्यानिक उत्पाद विकास कार्यक्रम के अंतर्गत भागलपुर,
दरभंगा, पटना एवं सहरसा में आम, रोहतास में टमाटर, अररिया, समस्तीपुर में हरी मिर्च, पूर्वी चम्पारण में
लहसून, पश्चिमी चम्पारण में हल्दी, भोजपुर में मटर, किशनगंज में अनानास, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी
तथा शिवहर में लीची, कटिहार, खगड़िया में केला, शेखपुरा, बक्सर में प्याज, नालन्दा में आलू, कैमूर में
अमरूद, वैशाली में मधु और गया जिला में पपीता के फसल के उत्पादन को प्रोत्साहित किया जायेगा।
उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत संबंधित जिलों के लिए चिह्नित फसलों के पूर्व से आच्छादित
एवं उपलब्ध क्षेत्रों को कलस्टर के रूप में चिह्नित किया जायेगा। एक कलस्टर में 50 हेक्टेयर रकवा को
सम्मिलित किया जायेगा। चिह्नित कलस्टर में सम्मिलित सभी कृषकों को एक समूह तैयार कर समूह का
पंजीकरण कराया जायेगा एवं समूह के प्रत्येक सदस्यों को कार्यक्रम के तहत अपनाये जाने वाले विभिन्न
एक्टिविटी के लिए प्रशिक्षित कराया जायेगा। चिलित कलस्टर को उत्तम कृषि क्रियाओं से लाभान्वित एव
आच्छादित कर उद्यानिक फसलों के गुणवत्ता में वृद्धि करायी जायेगी।
डॉ० प्रेम कुमार ने कहा कि समूह के लिए चयनित कृषकों से अंशदान के रूप में न्यूनतम 5,000 रूपये
प्रति कृषक समूह के खाते में जमा कराया जायेगा। सरकार के तरफ से समूह के खाते में 5 लाख रूपये
मैचिग ग्राट दिया जायेगा। समूह के खाता में अशदान यदि 5 लाख रूपये से कम होता है तो मैचिग ग्राट
उसी के अनुसार दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि राज्य में इस योजना के कार्यान्वयन से जिला विशेष में
उपजने वाले फसलों को प्रोत्साहन मिलेगा, बाजार की मांग के अनुरूप विभिन्न उत्पाद यथा पल्प, जुस, जैम,
जेली, स्क्वैश एवं फ्लेक्स, पाउडर आदि तैयार कराया जायेगा एवं उद्यमियों को सीधे कलस्टर से मार्केटिग हेतु
लिक कराया जायेगा, जिससे उद्यानिक उत्पाद का शत-प्रतिशत सदुपयोग होगा, कृषकों को उत्पाद का
अधिक मूल्य मिलेगा तथा ग्रामीण बेरोजगार पुरूष एवं महिलाओं को स्वरोजगार मिलेगा। इससे वहाँ के
किसानों की आय में काफी वृद्धि होगी। कोरोना सक्रमण के कारण पलायन से वापस लौटे बेरोजगारों को
स्वरोजगार के लिए यह योजना काफी लाभदायक सिद्ध होगा।

Check Also

दिव्यांग अधिकार अधिनियम 2016 क्या है ? संपूर्ण सच्चाई।What is the Disability Rights Act of 2016? The Complete Truth

🔊 Listen to this सर्वप्रथम न्यूज सौरभ कुमार : दिव्यांगों के लिए बिल्कुल निःशुल्क काम …