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पुस्तकों के बोझ से मुक्त हुआ हमारा कंधा खूब पढ़ेंगे देश दुनिया में अपना नाम रोशन करेंगे

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार:- देश में नई शिक्षा नीति के तहत स्कूली बच्चों के बैग में भारीपन अब महसूस नहीं किया जाएगा| पुस्तकों के वजन से बच्चों के शरीर पर उनकी हड्डियों पर बहुत गहरा और व्यापक असर पड़ता है जिससे उनके तारीख ग्रोथ में भी रुकावटें आती हैं साथ ही साथ शारीरिक एवं मानसिक दबाव होता है जिससे उनके पठन प्रक्रिया में रुकावटें आने लगती| इस प्रक्रिया की पहल दिल्ली सरकार के द्वारा स्कूल बैग नीति के रूप में की गई है||बता दें कि शिक्षा मंत्रालय ने पिछले महीने नई स्कूल बैग नीति को जारी किया था, जो नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुसार है। इसमें कहा गया है कि प्री-प्राइमरी कक्षाओं के लिए कोई भी टेक्स बुक नहीं होगी। कक्षा एक और 2 के लिए सिंगल नोटबुक होगी। इसके अलावा स्कूलों को चेक करना होगा कि कहीं उनका बस्ता ज्यादा भारी न हो। इके साथ ही स्टूडेंट्स को बैग की दोनों बेल्ट को टांगने के लिए प्रोत्साहित करना होगा।इस संबंध में शिक्षा निदेशालय (डीओई) ने स्कूल प्रिंसिपलों को लिखे पत्र में कहा कि, इसके अलावा, जिन स्कूलों में दो या बहुमंजिला इमारतों में कक्षाएं संचालित होती हैं, उन बच्चों के लिए तो और बड़ी मुसीबत है। ऐसी कक्षाओं तक पहुंचने के लिए बच्चों को भारी बैग के साथ इतनी सीढ़ियां चढ़ना पड़ती है, जो समस्या को और बढ़ा देता है। ऐसे में जरूरी है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के मुताबिक नई स्कूली बैग नीति को लागू किया जाए। वहीं नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के मुताबिक कक्षा 1 और कक्षा 10 के छात्रों के लिए स्कूल बैग का वजन उनके शरीर के वजन का 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।

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