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मेहनत करें सोच स्वयं बदलेगी

सर्वप्रथम न्यूज़ रत्नेश कुमार के कलम से : विश्व में साक्षरता दिवस शिक्षा स्वतंत्रता के स्वर्ण द्वार खोलने के कुंजी है मेहनत करें सोच स्वयं बदलेगी:- प्रत्येक वर्ष पूरे विश्व में साक्षरता दिवस 8 सितम्बर को मनाया जाता है, आज विश्व साक्षरता दिवस पर मेरी समझ से सोच ऐसी होनी चाहिए विश्व के जितने भी देश हैं उनमें यदि हम भारत की बात करते हैं तो हमें शिक्षा में और महत्वपूर्ण आयाम बनाने की जरूरत करनी होगी| मानव चेतना को बढ़ाना होगा, समाज के साथ-साथ साक्षरता दर, इसके लिए प्रचार प्रसार, शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ानी होगी | शिक्षित राष्ट्र समर्थ राष्ट्र, सपना हम सब ने देखा था, इसे पूर्ण करने के लिए हर हर दम हर संभव प्रयास करते रहते हैं | समाज के हर तबके चाहे वह परिवार हो, समुदाय हो, विद्यालय, विश्वविद्यालय हो हर किसी को यg प्रयास करना चाहिए | यह जरूरी नहीं कि हर समय पढ़ना ही चाहिए, लेकिन ऐसे भी कार्य करनी चाहिए जिससे ज्ञान बांट सकें | बच्चे सीख सकें ,बड़े सीख सकें | विश्व साक्षरता दिवस के सभी देश 8 सितंबर को हर वर्ष अनेको कार्यक्रम करते हैं कहीं पर इसके विनती की जाती है कहीं पर हस्ताक्षर की जाती है कहीं पर लेख लिखे जाते हैं कहीं पर नाटक किए जाते हैं वहीं पर अन्य प्रोग्राम किए जाते हैं सब के माध्यम से हमें एक ही ज्ञान फैलाना है कि देश चाहे कोई भी देश भारत ही नहीं बल्कि समस्त विश्व के सभी देश ज्ञानवान बने बुद्धिमान बने और सभी मिलजुल कर रहे| तभी कहा भी गया है नॉलेज इज द पावर शिक्षा का मकसद खाली दिमाग को खुले दिमाग में परिवर्तित करना है |”मेरा मानना है कि – ज्ञान व्यक्ति को अँधेरे से बाहर निकालकर एक उज्जवल भविष्य की राह दिखाने का कार्य करता हैं | आज जो भी देश विकास व् तकनीक के विषय में सर्वोच्च हैं जिनका आधार मूलत शिक्षा ही हैं| असाक्षर व्यक्ति को पशु के समान समझने वाली संभ्यता में आज भी बेटियों की शिक्षा के द्वार पूर्ण रूप से नही खुले हैं. साक्षरता दिवस जैसे अवसर हमारे इस तरह के नासूरो पर फिर से गौर कर नये विचारों के साथ समाज को आगे ले जाने का पथ प्रशस्त करते हैं | एक तरफ बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के लिए भी कयास लगाए जा रहे हैं | काम करके सीखना, करते हुए सीखना, सीखते हुए करना :- जब बच्चा पहली बार पेंसिल, चौक, कलम पकड़ता है तब वह यह नहीं सोचता है कि लिखना क्या है? बस उंगलियों को आकृतियों में बदलता 1000बार ऊपर -नीचे आगे -पीछे सभी प्रकार कृतियां बनाता है | कह सकते हैं लकीरे की खींचता है लेकिन एक बार वह शुद्ध शुद्ध लिखना सीख जाता है | महान दार्शनिकों ने कहा कि है असफलता में ही सफलता की कुंजी है, प्रयास हमें करना हर कठिन प्रश्न के उत्तर के लिए हमें कई बार कई कई बार लिखना चाहिए समझ बनानी चाहिए जिससे उत्तर मन रूप से स्वयं लिखता चला जाए,

साक्षरता का अर्थ यह भी होता है कुशल वाचन, कुशल संचयन, कुशल समायोजन वह कुशल वितरण होता है| हम ऐसे भी समझ सकते हैं कि सुनना बोलना पढ़ना लिखना शिक्षण संस्थान मे एलएसआरडब्ल्यू स्किल के नाम से भी जाना जाता है| हम सभी का प्रयास होना चाहिए हर समय हर संभव समझदारी युक्त वाचन करें | देश के प्रति, राष्ट्र के प्रति, समाज के प्रति,परिवार के प्रति,समुदाय के प्रति और सभी जन शक्तियों के प्रति सौहार्द्य रूप से समझ बनाते हुए आज 8 सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस को सफल बनाएंI यह दिन हमारे समाज में जागरूकता फैलाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है| यह पर्व अंतरास्ट्रीय स्तर पर पूरे विश्व में मनाया जाता है| इस दिन को मनाने का उद्देश्य समाज में लोगो के प्रति शिक्षा को प्राथमिकता देने को बढ़ावा देना है| इस दिन को मनाने की शुरुवात यूएन की संयुक्त राष्ट्र संग की यूनेस्को द्वारा 17 नवम्बर 1965 में हुई थी| इस दिन बहुत सी सामाजिक संस्था लोगो से वार्तालाप करके या रैलिया निकालकर समाज में लोगो को शिक्षा को बढ़ावा देने के लिया जागरूकता फैलाती है| समाज की साक्षरता दर को बढ़ावा देने के लिये असाधारण मूल्य के लिखित शब्द और जरुरत के बारे सार्वजनिक चेतना को बढ़ावा देने के लिये इस दिन को मनाने का खास महत्व है | मानव विकास और समाज के लिये उनके अधिकारों को जानने और साक्षरता की ओर मानव चेतना को बढ़ावा देने के लिये अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है। सफलता और जीने के लिये खाने की तरह ही साक्षरता भी महत्वपूर्णं है। गरीबी को मिटाना, बाल मृत्यु दर को कम करना, जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना, लैंगिक समानता को प्राप्त करना आदि को जड़ से उखाड़ना बहुत जरुरी है। साक्षरता में वो क्षमता है जो परिवार और देश की प्रतिष्ठा को बढ़ा सकता है। ये उत्सव लगातार शिक्षा को प्राप्त करने की ओर लोगों को बढ़ावा देने के लिये और परिवार, समाज तथा देश के लिये अपनी जिम्मेदारी को समझने के लिये मनाया जाता है ।

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