सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : अब रंग दृष्टिहीनता यानी कलर ब्लाइंडनेस की समस्या ड्राइविंग लाइसेंस लेने के लिए आपके आड़े नहीं आएगी। एम्स अस्पताल के नेत्र चिकित्सकों की एक रिपोर्ट के आधार पर परिवहन मंत्रालय कलर ब्लाइंडनेस के शिकार लोगों को भी ड्राइविंग लाइसेंस देने पर विचार कर रहा है। यही नहीं ऐसे लोगों को कॉमर्शियल वाहनों को चलाने की भी अनुमति होगी। एक रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टरों के पैनल की सिफारिशों के बाद परिवहन मंत्रालय इस संबंध में ड्राफ्ट तैयार करने में जुटा है।कलर ब्लाइंडनेस से प्रभावित लोगों को भी ड्राइविंग लाइसेंस दिए जाने की कई बार मांगें उठने के बाद परिवहन मंत्रालय ने चिकित्सकों की राय ली थी। बता दें कि ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करने के लिए यह जरूरी है कि संबंधित व्यक्ति दृष्टि दोष की समस्या से मुक्त हो। परिवहन मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि सरकार का मानना है कि यदि कलर ब्लाइंडनेस से प्रभावित लोगों को लाइसेंस न देने से देश की 3 फीसदी जनता प्रभावित होती है।कलर ब्लाइंडनेस या कलर विजन में कमी ऐसी समस्या है, जिससे पीड़ित व्यक्ति सामान्य लाइट में भी रंगों में कम अंतर कर पाता है। आमतौर पर यह समस्या पुरुषों में अधिक पाई जाती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक करीब 0.4 फीसदी महिलाएं ही कलर ब्लॉइंनेस की समस्या से पीड़ित हैं, जबकि पुरुषों का आंकड़ा 8 फीसदी का है, जो महिलाओं की तुलना में बहुत अधिक है।
यूरोप और अमेरिका में मिलता है लाइसेंस: इस पूरे मामले पर स्टडी के दौरान एम्स के पैनल ने यूरोप और अमेरिका का भी उदाहरण लिया। यूरोपियन यूनियन ने लाइसेंस के लिए कलर ब्लाइंडनेस को कोई पैमाना ही नहीं माना है, जबकि अमेरिका की बात की जाए तो ऐसे लोगों को प्राइवेट वाहन चलाने की इजाजत है, लेकिन वे कॉमर्शियल गाड़ियां नहीं चला सकते।
रेड लाइट के सिग्नल देख सकते हैं कलर ब्लाइंडनेस के पीड़ित: एम्स के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों के पैनल ने कहा है कि कलर ब्लाइंडनेस से प्रभावित लोग भी ट्रैफिक लाइट और अन्य सिग्नलों के बारे में जान सकते हैं। ऐसे में उन्हें कलर ब्लाइंडनेस की समस्या के चलते लाइसेंस से नहीं रोका जाना चाहिए। तोशियास सचिव ने भारत सरकार से की मांग भारत सरकार नेे कहा मांग जायज दिव्यांगों की मुस्कान हैै हमारी पहचान
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