क्या कल्याणकारी योजनाओं से गरीबों का कल्याण हो जाएगा यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है इस महामारी के दौर में

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : पूरे देश में कोरोना का कहर जारी है. अभी तक के आंकड़े के अनुसार कोरोना पॉजिटिव लोगों की संख्या 900 के करीब पहुंचने वाली है. इसके कहर से बचने के लिए सरकार ने 21 दिनों के लिए लॉकडाउन कर दिया है. पर इस बीच हर रोज कमाकर अपने परिवार का पेट भरने वाले लोगों को कोरोना से ज्यादा अब भूख की चिंता सताने लगी है. उनके लिए ये लॉकडाउन उनके दो वक्त की रोटी पर भारी पड़ रहा है.

शहर में लॉकडाउन का जायजा लेने आज फर्स्ट बिहार की टीम सड़कों पर निकली तो लोगों के दर्द को देखकर कोरोना का डर कम लगने लगा. एक दिहाड़ी मजदूर जो हर रोज पटना की सड़कों पर रिक्शा चलाकर 7 लोगों का पेट पालता था उसके सामने आज कोरोना से ज्यादा समस्या भूख की खड़ी हो गई है. बात करने पर उसकी आंखें भर गई और कहने लगा- हमलोग रोज कमा कर खाते थे मालिक…पर का करी सरकार लॉकडाउन कर दिया है और तीन दिन से हर दिन सड़क पर तो निकल रहे हैं , लेकिन कोई सवारी नहीं मिल रहा है. 3 दिन में सिर्फ 30 रुपया कमाए हैं. हमरा परिवार में 2 गो बुढ़े मां-बाप बच्चे समेत 7 लोग हैं. इ 30 रुपया में का होगा…..

ये सिर्फ एक की कहानी नहीं है. बल्कि कई ऐसे हैं जिनका न कोई सुनने वाला है और न ही मदद करने वाला. उनकों तो ये भी पता नहीं की ये लॉकडाउन कब तक रहेगा और उन्हें कब तक भूखा रहना पड़ेगा. उनका कहना है कि यही हाल रहा तो कोरोना से पहले हमलोग भूख से मर जाएंगे.

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