सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार :तोशियास संस्था के 5 साल के प्रयास के बाद सरकारी सेवा में वृत्ति (Retirement) के बाद पेंशन शुरू कराने के लिए कितनी दिक्कत उठानी पड़ती है, इससे हर सरकारी कर्मचारी वाकिफ है. सिस्टम के इस बड़े गोलमाल पर फिल्में और सीरियल भी बन चुके हैं. रिटायर्ड कर्मचारियों की दिक्कत को समझते हुए मोदी सरकार ने पेंशन नियमों में बदलाव कर दिया है जिससे लोगों को बड़ी राहत होगी
दिव्यांग आश्रितों को बड़ी राहत
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के मुताबिक सरकारी कर्मचारी की मौत के बाद अगर घर का कोई सदस्य दिव्यांग है और उसके पास आजीविका चलाने के लिए कोई साधन नहीं है तो उसे जीवन भर पेंशन दी जाएगी. मोदी सरकार के इस फैसले से उन हजारों लोगों को राहत मिलेगी जो माता-पिता के निधन के बाद बेहद दिक्कतों में जी रहे थे. मोदी सरकार ने इस बदलाव से पहले कई बार मंथन किया और पाया कि मौजूदा व्यवस्था से हजारों लोगों के सामने रोटी का संकट खड़ा हो जाता है जो बिल्कुल सही नहीं. तमाम विचार-विमर्श के बाद मोदी सरकार ने मौजूदा व्यवस्था को बदल दिया है.
क्या कहता है नया नियम
केंद्रीय सिविल सेवा पेंशन नियम 1972 (54/6) के मुताबिक अगर सरकारी कर्मचारी के आश्रित परिवार की कुल आय कर्मचारी के अंतिम वेतन से 30 फीसदी से कम है तो मृतक आश्रितों को जीवन भर पेंशन पाने का अधिकार होगा. इसके अलावा दिव्यांग आश्रितों को बहुत जल्द ही नए नियमों के मुताबिक पेंशन मिलना शुरू हो जाएगी और ये पेंशन उन्हें जीवन भर (Lifetime) मिलेगी. आवश्यक बदलाव के बाद जल्द ही नए नियमों को लागू कर दिया जाएगा जिससे हजारों लोगों को बड़ी राहत मिल जाएगी.
पहले क्या थे नियम
बदलाव से पहले नियमों के मुताबिक सरकारी कर्मचारी की मौत के बाद उसकी पत्नी को पेंशन का प्रावधान है. पत्नी की मौत के बाद परिवार के किसी भी दूसरे सदस्य को पेंशन नहीं दी जाती है. अगर पीड़ित के घर में बच्चे हैं और उनमें से कोई मानसिक या शारीरिक रूप से सक्षम नहीं है तो उसे किसी तरह से पेंशन का प्रावधान नहीं है, जिससे दिव्यांग आश्रितों के लिए पेट भरना भी मुश्किल पड़ रहा है.
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