Breaking News

ई-मित्र पर फर्जीवाड़े को लेकर भारत सरकार कोई सुविधा देने जा रहे हैं जानिए क्या है सुविधा ?

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : ई-मित्र पर आप कोई सुविधा लेने जा रहे हैं तो आपको कही फर्जी रसीद तो नहीं थमा दी. इसकी जांच अब आप खुद ही अपने मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन करके कर सकेंगे. लंबे समय से फर्जीवाड़े की शिकायतों के बाद सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने इस पर लगाम कसने का प्रयास किया है. अब ई-मित्र से मिलने वाली हर रसीद पर क्यूआर कोड होगा, जिसमें आपको पेमेंट, काम और रिसिप्ट नंबर की जानकारी के साथ ई-मित्र सर्वर से जनरेट हुई या नहीं इसकी जानकारी मिल सकेगी.ई-मित्र से फर्जी रसीदें काटकर लाखों रूपए वसूलते हुए ठगी के मामले सुने होंगे. बिजली का बिल का पैसा देकर आप बेफ्रिक हो जाते हैं कि आपका बिल जमा हो गया और रसीद मिल गई, लेकिन जब नए बिल में पुराने बिल का पैसा जुड़कर आ जाता तो पता चलता है की आपके साथ ठगे जा चुके हो, लेकिन अब ठगी के मामलों पर लगाम कसने के लिए सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने बड़ा कदम उठाया है. अब आपको ई-मित्र से मिलने वाली रसीद पर क्यूआर कोड मिलेगा, जिसको आप अपने मोबाइल से स्कैन करके जांच कर सकेंगे की आपको जो रसीद दी है जो पैसा लिया है वो सही है या नहीं और ई-मित्र सर्वर से रसीद जारी हुई है या नहीं इसका भी पता चल सकेगा. सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के आयुक्त संदेश नायक का कहना हैं की करीब 75 हजार से ज्यादा ई-मित्र कियोस्कों पर बिजली, पानी, मूल निवास, जाति, ईडब्यूएस, श्रमिक कार्ड सहित राज्य सरकार की करीब 400 से ज्यादा मिल रही सुविधाओं के बदले मिलती रसीद पर अब क्यूआर कोड मिलेगा. इससे आवेदक की पूरी पहचान के साथ उसका पूरा ब्यौरा उस क्यूआर कोड में फीड रहेगा. इस क्यूआर कोड का फायदा आवेदक को यह होगा कि ये उसे किसी धोखाधड़ी से बचाएगा. लोगों को धोखाधड़ी से बचाने के उद्देश्य से क्यूआर कोड का रसीद पर निशान दिया गया है. इसे स्कैन करते ही सारी जानकारी मिल जाएगी.सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के एसीपी उमेश जोशी का कहना हैं कि क्यूआर कोड से आमजन धोखाधड़ी से बचेगा. इस पर लंबे समय से काम किया जा रहा था. ई-मित्र कियोस्क धारक रसीदों में कांट-छांट कर देता था. कुछ जगह पर ठगी-धोखाधडी के मामले सामने आए. इससे विभाग की छवि खराब हो रही थी. लोगों का ई-मित्र से विश्वास उठने लगा था इसलिए इसका निस्तारण करने के लिए क्यूआर कोड लगाया गया है. हर व्यक्ति के पास मोबाइल है वो अपने मोबाइल में स्कैन करके जानकारी ले सकता है. एलएसपी के माध्यम से ही ई-मित्र कियोस्कों का आवंटन होता है ऐसे में यदि इस तरह की जालसाली-धोखाधडी होती है तो इसकी वसूली एलएसपी से ही की जाती है, लेकिन अब इससे बचा जा सकेगा.बहरहाल, प्रदेश में ई-मित्र कियोस्कों का जाल लगातार बढता जा रहा है. गांव से लेकर शहरों तक ई-मित्र कियोस्क खुले हैं लेकिन कुछ ई-मित्र संचालकों ने इसको धोखाधडी का कारोबार बना लिया है. सुविधा देने के बदले फर्जी रसीदें थमाकर लोगों से धोखाधड़ी की जा रही है।

Check Also

दिव्यांग अधिकार अधिनियम 2016 क्या है ? संपूर्ण सच्चाई।What is the Disability Rights Act of 2016? The Complete Truth

🔊 Listen to this सर्वप्रथम न्यूज सौरभ कुमार : दिव्यांगों के लिए बिल्कुल निःशुल्क काम …