सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार :सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के डीईपीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा एक 24X7 टोल-फ्री मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन किरण (1800-599-0019) का 13 भाषाओं में शुभारंभ किया गया।660 क्लीनिकल / 668 मनोरोग चिकित्सकों का भी सहयोग मिलेगा। हेल्पलाइन में शामिल 13 भाषाएं हैं : हिन्दी, असमी, तमिल, मराठी, उड़िया, तेलुगु, मलयालम, गुजराती, पंजाबी, कन्नड़, बांगला, ऊर्दू एवं अंग्रेजी। आईए जानते हैं की इस सरकारी योजना का किस प्रकार से दुरुपयोग किया जाता है आप जब यहां फोन करेंगे तो आपसे पूछा जाएगा कि आप कहां से बोल रहे हैं आपका वास्तविक पता क्या है जवाब सभी समस्या और अपना वास्तविक पता देंगे तो आपको निजी क्लीनिक पर अस्पताल में आने के लिए कहा जाएगा जब आप वहां जाएंगे तो जैसे आम जन को पैसा चुका कर अपना इलाज करवाना पड़ता इस प्रकार से आपको भी अपना इलाज करवाना पड़ेगा जबकि करोड़ों रुपए में इस योजना का शुरूआत किया गया था तो इस योजना का कितना लाभ मानसिक दिव्यांगों को इस आर्थिक युग में मिल पाया यह सोचने की बात है क्या इसी प्रकार से सरकारी योजनाओं का सूची दिखाकर दिव्यांगों को देश में लूटने का काम चलता रहेगा अगर आपके पॉकेट में पैसा नहीं है तो यह मान लीजिए की यह योजना आपके लिए नहीं है आपका इलाज यहां नहीं होगा इसे ही कहते हैं चिराग तले अंधेरा आंखों तले खुलेआम भ्रष्टाचार दूसरी महत्वपूर्ण बात मानसिक दिव्यांगों के लिए यह है की उनकी पहचान 0 से 8 वर्ष में हो जाती है लेकिन किसी भी योजना का लाभ लेने के लिए उन्हें 18 वर्ष की आयु का इंतजार करना पड़ता है यह कहां तक उचित है यह बता दीजिए मैं इस योजना की बात नहीं कर रहा आमतौर पर मानसिक दिव्यांगों को जो कठिनाइयों का असुविधा का सामना करना पड़ता है उसकी बात कर रहा हूं उस बातों पर लगातार तोशियास अपना कार्य कर रहा है ताकि दिव्यांगों को उनके संवैधानिक एवं मौलिक अधिकार जो भारतीय दंड संहिता धारा 21 के तहत आता है उनका लाभ इन दिव्यांगों को मिल पाए मानसिक दिव्यांगों की यह स्थिति है तो आप आम व्यक्ति की क्या स्थिति होगी इस समाज में क्या झूठ बायोडाटा पर ही हमारा भारतीय समाज जीने को बेबस है यह तो वही बात हुई हाथी के दांत दिखाने के कुछ और और खाने को कुछ और भारत के प्रत्येक व्यक्ति अपने ज्ञान से अपने जिम्मेदारी से अपनी जागरूकता से इसे समाप्त करना होगा यह प्रत्येक भारतवासी कि जिम्मेवारी है दिव्यांग अधिकार अधिनियम 2016 की सबसे बड़ी विशेषता है किसी भी दिव्यांग को मानसिक रूप से पड़तालित नहीं किया जाएगा जबकि उनकी योजना से जब वह बुरी तरह से प्रताड़ित हो रहा है ठगे जा रहे हैं तो इसका शिकायत वह कहां करें।
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