दिव्यांग व्यक्तियों पर दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला क्या है?

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : दिल्ली HC का आदेश बच्चा गोद लेना मौलिक अधिकार नहीं जिनके पहले से बच्चे हों वे कानून दिव्यांग को गोद ले सकते हैं, सामान्य बच्चा नहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने बच्चों को गोद लेने के अधिकार को मौलिक अधिकार नहीं माना है। कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि जिनके पहले से ही दो बच्चे हों, वो सामान्य बच्चा गोद नहीं ले सकते हैं। “गोद लेने के अधिकार को अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार की स्थिति तक नहीं बढ़ाया जा सकता है और न ही इसे उस स्तर तक बढ़ाया जा सकता है जिससे पीएपी को अपनी पसंद की मांग करने का अधिकार मिल सके कि किसे गोद लेना है। गोद लेने की प्रक्रिया पूरी तरह से कल्याण के आधार पर संचालित होती है बच्चों की संख्या और इसलिए गोद लेने के ढांचे के भीतर आने वाले अधिकार पीएपी के अधिकारों को सबसे आगे नहीं रखते हैं,” अदालत ने एक हालिया आदेश आदेश में कहा।

Check Also

​”दिव्यांगों का ’30 साल का वनवास’ कब होगा खत्म? बुनियादी केंद्रों पर सरकारी उदासीनता की मार।”

🔊 Listen to this सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : एक तरफ जहां सरकार ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम …