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अस्पताल के नाम पर घोटाला का अर्थ क्या है?

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार :राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अन्तर्गत इमरजेंसी कोविड रेस्पांस पैकेज के तहत एक सौ बेड का फील्ड अस्पताल बनाने के लिए नालंदा मेडिकल कालेज अस्पताल को वर्ष 2022 में 7.5 करोड़ रुपए मिले थे. तीन माह में यह अस्पताल तैयार होना था. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा दी औषधि विभाग में मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है. बेड की कमी हो रही है. एक सौ बेड का सुविधायुक्त प्री फेब्रिकेटेड अस्पताल जल्द बनना बेहद आवश्यक है प्रो. डा.अजय कुमार सिन्हा, विभागाध्यक्ष, औषधि विभाग गई इस राशि से अब तक अस्पताल निर्माण में एक ईंट नहीं लग सकी है. सेंटर आफ एक्सीलेंस स्थित सेंट्रल लाउंड्री के प्रथम तल को अस्पताल निर्माण के लिए चिह्नित किया गया है.एक सौ बेड का अस्पताल निर्माण जल्द किए जाने को लेकर बीएमएसआइसीएल के अफसर से बातचीत की जा रही है. अनुमोदन हो गया है निर्माण शीघ्र आरंभ होगा.प्रो. डा. अलका सिंह, अधीक्षक, एनएमसीएच बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना विकास निगम द्वारा डेढ़ साल बाद भी अस्पताल का निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से औषधि विभाग में मरीज भर्ती कर इलाज में समस्या है.प्रक्रिया है जारी अधिकारीविभाग के संबंधित अधिकारी का कहना है कि प्रक्रिया जारी है. वहीं, एनएमसीएच स्थित औषधि विभाग के पुराने भवन के 60 बेड की क्षमता वाले एक हिस्से को पार्किंग निर्माण के लिए तोड़ दिया गया है. दूसरे हिस्से में उपलब्ध 60 बेड पर मरीज भर्ती किया जा रहा है. यहां आठ बेड की आइसीयू नाकाफी है. अस्पताल प्रशासन के अनुसार इमरजेंसी कोविड रेस्पांस पैकेज के तहत पटना एम्स को मिली राशि लेने से इनकार पर उसे एनएमसीएच में इसी फील्ड अस्पताल का निर्माण हुआ था.

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