कैसे आता है सियासी चंदा ?

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार :राजनीतिक दलों ने चंदा लेने के लिए कई रास्ते खोले हुए हैं. यहां तक कि कुछ लोगों ने इसके चोर रास्ते तक निकाल रखे हैं. चुनाव के दौरान पकड़े जाने वाला करोड़ों रुपये का कैश इसी चोर रास्ते से गुजरकर आता है.

जानिए पार्टियां चंदा लेने के लिए किन तरीकों का करती हैं इस्तेमाल

  • चंदे का सबसे पहला सोर्स वॉलेंट्री यानी अपनी इच्छा से दिया जाने वाला फंड है
  • कैश में मिलने वाले चंदे की लिमिट 2000 है, लेकिन पार्टियां कई बार इस अमाउंट को लेकर अपनी झोली भरती हैं
  • लोकल बिजनेसमैन और कॉन्ट्रैक्टर सीधे उम्मीदवार को कैश या फिर बैंक खाते में पैसा ट्रांसफर करते हैं
  • कई बड़ी कंपनियां अपने स्वार्थ को देखते हुए किसी भी राजनीतिक दल को इलेक्टोरल ट्रस्ट या बॉन्ड के जरिए करोड़ों रुपये देती हैं, इसे कॉरपोरेट फंडिग कहा जाता है

चुनावी चंदे से जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल चुनाव के दौरान प्रचार और कई माध्यमों से होने वाली पब्लिसिटी पर होता है. इस पैसे का इस्तेमाल कई पार्टियां वोटर्स को लुभाने के लिए भी करती हैं. करोड़ों रुपये के इसी चंदे से वोट फॉर नोट का खेल चलता है. इससे लोगों को शराब, मोबाइल फोन और कैश दिया जाता है

इलेक्टोरल बॉन्ड से आए अच्छे दिन

चुनावी चंदा तो पिछले कई सालों से राजनीतिक पार्टियों के खजाने भरता आया है, लेकिन बीजेपी सरकार के इलेक्टोरल बॉन्ड वाले दांव के बाद रास्ता काफी साफ हो गया. इलेक्टोरल बॉन्ड इसलिए भी फायदेमंद है क्योंकि इससे किसने किस पार्टी को चंदा दिया इसकी जानकारी आम लोगों तक पहुंचना नामुमकिन है.

इलेक्टोरल बॉन्ड फाइनेंस एक्ट 2017 के तहत लाए गए थे. इलेक्टोरल बॉन्ड में भ्रष्टाचार इसी से नजर आता है कि जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 29 सी में बदलाव करते हुए कहा गया है कि इलेक्टोरल बॉन्ड से आए चंदे को चुनाव आयोग की जांच के दायरे से बाहर रखा जाएगा. हालांकि चुनाव आयोग ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि इससे पारदर्शिता खत्म हो जाएगी

क्या हैं इलेक्टोरल बॉन्ड?

ये एक प्रकार के प्रोमिसरी नोट हैं, यानी ये धारक को उतना पैसा देने का वादा करते हैं. ये बॉन्ड सिर्फ और सिर्फ राजनीतिकपार्टियां ही भुना सकती हैं. ये बॉन्ड आप एक हजार, दस हजार, एक लाख, दस लाख और एक करोड़ की राशि में ही खरीद सकते हैं. ये इलेक्टोरल बॉन्ड आप स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की चुनिंदा शाखाओं से ही ले सकते हैं. ये बॉन्ड आप अकेले, समूह में, कंपनी या फर्म या हिंदू अनडिवाडेड फैमिली के नाम पर खरीद सकते हैं.

ये बॉन्ड आप किसी भी राजनीतिक पार्टी को दे सकते हैं और खरीदने के 15 दिनों के अंदर उस राजनीतिक पार्टी को उस बॉन्ड को भुनाना जरूरी होगा, वरना वो पैसा प्रधानमंत्री राहत कोष में चला जाएगा. चुनाव आयोग द्वारा रजिस्टर्ड पार्टियां जिन्होंने पिछले चुनाव में कम से कम एक फीसदी वोट हासिल किया है, वो ही इन इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए चंदा लेने कीहकदार होंगी. चुनाव आयोग ऐसी पार्टियों को एक वेरिफाइड अकाउंट खुलवाएगी और इसी के जरिए इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे जा सकेंगे.

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