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मां अखंड वासनी मंदिर पटना साक्षात ममताव्य और वात्सल्य प्रतीक कोरोना काल में

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : मां अखंड वासनी मंदिर पटना साक्षात ममताव्य और वात्सल्य प्रतीक इसको देना कोरोना काल में लगातार 41 दिनों से पटनाा में इस विश्व की सबसे बड़ी समस्या जो पेट की भूख की उससे निरंतर मिटाने का कार्य कर रही है साथ ही साथ वैसेेे आभााव ग्रसित लोगों को प्रतिदिन सुबह में सुखा राशन मंदिर मंदिर कर्ता-धर्ता और मां केे सेवक मां की प्रेरणा से-श्री विशाल तिवारी जी के द्वारा 200 लोगों को प्रतिदिन सुुखा राशन प्रदान करवाया जाता है

संध्या काल में मंदिर के द्वारा पका हुआ भोजन प्रदान करवाया जाता है इन सभी सेवा कार्यों मैं किसी भी व्यक्ति से सहयोग नहीं लिया जाता है बल्कि मां पर जो चढ़ावा सेवकों केे द्वारा कोरोना काल से पहले मां को भेंट के रूप  लोगोंं के द्वारा दिया जाता था उसे मां ने अपनेे बच्चों को देनेे का निर्णय किया और भूख मिटाने का निर्णय किया क्योंकि मांं का जो प्यार होता है वह निस्वार्थ होता है और इस मंदिर का सेवा भाव को देखकर ऐसा लगता है

स्वयं मां ने विशाल तिवारी जी को यह दायित्व दिया है कि मेरी सेवा मैं विलंब भी हो जाए लेकिन लोगोंं की निरंतर चलती रहे और उनको ऐसा आशीर्वाद मां के द्वारा प्रदान कियााा गया है भारत में मां का जो स्थान है वह किसी से छिपा नहीं है वैसेे मैं इस महामारी के काल में मां अखंड वासनी मंदिर कि जो सेवाा है मानो ऐसा लगता है की मां साक्षात आकर लोगों की भूख मिटा रही हो और

इस महामारी से अपनेे भक्तों बचा रही हो और मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि ऐसा अद्भुत दृश्य और ऐसा अद्भुत काम सनातन धर्म  मैं ही संभव है निश्चित रूप से भारत में यह कहा जा सकता है की महामारी हारेगा और माता रानी जीतेगी हर सुख दुख में भारत के लोगोंं के धर्म सहायता प्रदान किया है अधर्म की हार हुुई है जब पटना में मां स्वयं आकर लोगों की सेवा कर रही है ऐसा अद्भुत अद्वितीय दृश्यय देखने  को मिल रहा है जो विश्व मैं और कहीं नहीं  देखने को मिल रहा है जिन लोगों को भी इस महामारी काल में खाने को लेकर राशन को लेकर तो वह मां अन्नपूर्णा मां खंडवा सनी मंदिर मैं अपनी अर्जी लगा सकता है मां उसके कष्टों का निर्वहन करेगी भरेगी माता कहती है दुख में सुमिरन सब कड़े सुख में करे न कोई जो सुख में सुमिरन करें तो दुख काहेे की होए। इस सेवा भाव को देखते हुए देश में जिस प्रकार की दलगत राजनीति चल रही है उसका भी खंडन होता है और यह अश्लोक सत्यापित होता है जाति न पूछो साधु की पूछ लीजिए ज्ञान मोल करो तलवार की परन रहने दो म्यान प्रेम से बोलिए जय माता दी।

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