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दिव्यांगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस धाराओं में मिलेगी सुविधा

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : दिव्यांग संविधान की सर्वोच्चता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाला सुविधा एवं कानून की धाराएं संविधान को भूमि का सर्वोच्च कानून कहा जाता है (स्पष्ट दावों के लिए, अंतर-अलिया देखें, ऑस्ट्रेलिया का संविधान, प्रस्तावना; कनाडा का संविधान अधिनियम, 1982, Art.552; इटली का संविधान, Art.1; संविधान) आयरलैंड, Art.6। जापान का संविधान, कला। 98; और संयुक्त राज्य अमेरिका का संविधान, कला। 6. निहित दावों के लिए, भारत का संविधान, कला। 251 और 254, मूल कानून देखें। जर्मनी के संघीय गणराज्य, कला। 20 (3), 23,28 (1) और (3), 37, 56, 64 (2), 70, 87 ए (2), 98 (2), और 142)। संविधान राष्ट्र के भीतर सभी राजनीतिक शक्ति का स्रोत है। संविधान की श्रेष्ठता का तार्किक परिणाम यह है कि विधायिका के सभी कार्य, संविधान के प्रति दु: खद होंगे। इसलिए, ये अधिनियम या तो अदालतों या नागरिकों को नहीं बांधेंगे। सरकार के हर कानून और हर अधिनियम की संवैधानिकता लोकतंत्रों के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक सिद्धांतों और कानून के मानदंडों के सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत नियम में से एक है। नतीजतन, संविधान के भीतर दिव्यांग व्यक्तियों के नागरिक अधिकारों को शामिल करना सबसे प्रभावी तरीका लगता है जिसमें दिव्यांग लोगों के मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रता की रक्षा करना शामिल है।

 

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