सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : जब दिल्ली पुलिस और बिहार पुलिस में दिव्यांगों की नियुक्ति हो सकती है तो वन विभाग के फॉरेस्ट गार्ड में दिव्यांगों की बहाली क्यों रोक दी गई और इसके लिए क्या इसकी जानकारी भारत सरकार के सामाजिक कल्याण न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को दी गई है और कोई भी विभाग दिव्यांग अधिनियम के साथ खिलवाड़ कैसे कर सकता है जबकि दिव्यांग अधिनियम में इस बात का उल्लेख प्राप्त होता है कि कोई भी परिवर्तन होता है उसके लिए मसौदा तय होता है और समाज कल्याण विभाग इस पर पहल करता है तब जाकर उसे मंजूरी प्राप्त होता है और तब जाकर वह मसौदा मान्य होता है तो बिहार वन विभाग ने दिव्यांगों का आरक्षण को इस वैकेंसी में कैसे समाप्त कर दिया वन विभाग किसी भी वैकेंसी में 4% आरक्षण को पूर्ण रूप से पालन नहीं करता तो क्या इसकी गारंटी है की वह 4% आरक्षण अगले क्लर्क की की वैकेंसी में और ऐड करके अतिरिक्त सीट बिहार के दिव्यांगों को प्रदान करेगा आइए देखते हैं दिव्यांगों के आरक्षण को समाप्त करने के लिए जो विज्ञापन संख्या 3/2020 मैं जो वन विभाग ने विज्ञापन पत्र में जो विज्ञापन दिया है उसमें स्पष्ट रूप से क्या लिखा है-दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अन्तर्गत सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार,पटना के संकल्प संख्या-13062 दिनांक-12.10.2017 की कंडिका-2(ii) के प्रावधानों के.आलोक वनरक्षी के पद पर सीधी नियुक्ति में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए अनुमान्य 4 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण के अधीन 20 पदों के बदले पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के क्षेत्रीय स्थापना में निम्नवर्गीय लिपिक संवर्ग के रिक्त 20 पद पर्यावरण, वन एवं जलवायु.परिवर्तन विभाग के आदेश ज्ञापांक-2/वन अरा0स्था0-04/2020-1756, दिनांक 14.05.2020 द्वारा उपलब्ध कराये जाने की स्वीकृति प्रदान की गयी है । इस पर भारत सरकार को विशेष पहल करने आवश्यकता है ताकि निर्दोष दिव्यांग को दिव्यांग अधिनियम 2016 के तहत सभी अधिकार प्राप्त हो सके जो उन दिव्यांगों का संविधानिक अधिकार है निवेदन है कि इस वीडियो को जरूर से देख-
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