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दिव्यांग देख पाते हैं मन की आंखों से पढ़ पाते|

रत्नेश कुमार की कलम से:-  कहते हैं तुम दिव्यांगों से कुछ ना होगा मैं कहता हूं मुझसे जो होगा वह तुमसे ना होगा| अर्थात दिल में जब जज्बा हो कुछ करने का लाख तूफान आ जाएं फिर भी वह जज्बा पूरा करके तकदीर बदलने का हौसला  हम दिव्यांगों की सबसे बड़ी ताकत है| 21वीं सदी का नारा है नॉलेज इज द पावर इसे साबित किया है महान  अष्टावक्र अरस्तु प्लूटो इन सब ने भी दिव्यांगों के जीवन पर शोध किया|| लुई ब्रेल जिन्होंने ब्रेल लिपि का आविष्कार  दुनिया को एक नया आप आविष्कार दिया जिसकी बदौलत आज दृष्टिबाधित दिव्यांग देख पाते हैं मन की आंखों से पढ़ पाते|

लेखकों ने अपने अपने लेखों में इसका जिक्र भी किया है साथ ही साथ वर्ष बीते चले गए अंधकार से उजाले की तरफ हमने जीवन को जीना सीखा| कभी हार ना मानना संघर्ष में भी संघर्ष पताका लहराना कभी दूसरों के दिल को ना दुखाना कर्म पथ पर हमेशा आगे बढ़ते रहना|

हम सब ने देखा सन 2020 जिसे  कोरोना काल के रूप में जानते हैं हम सब में से अनेक दिव्यांगों ने हर प्रकार से कोरोना वॉरियर बनकर देश में कार्य कर रहे डॉक्टर स्वास्थ्य कर्मी सफाई कर्मी शिक्षक कर्मी वह अनन्य रूपों में देश की सेवा की है कहीं पर शिक्षक बनकर ऑनलाइन क्लास तो कहीं पर होर्डिंग पोस्टर  के माध्यम से जानकारी तो कहीं पर ड्राई राशन बांटकर जनसेवा अनेकानेक कार्य भी किए|
           हम दिव्यांग हैं हम कुछ भी कर सकते हैं वर्ष 2020  भी हम साथ थे नव वर्ष 2021 में 2021 की ताकत से देश सेवा जन सेवा करेंगे अपना और अपने समाज का नाम रोशन करेंगे| हम सभी दिव्यांग जनों के ओर से देशवासियों को नववर्ष की हार्दिक हार्दिक शुभकामनाएं||

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