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दिव्यांगता कभी भी बाधा नहीं बना उनकी एक इशारे पर नाचता था मायानगरी

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : रितु को डांस का शौक़ था. वो लगातार टीवी पर ऐक्टर्स और कोरियोग्राफर्स को डांस करते देखती थीं और वही से डांस को सीखा इसके लिए कभी कोई डांस क्लास नहीं गई. शुरु में उनके दोस्त जब किसी परफॉर्मेंस के लिए डांस की प्रैक्टिस करते, तो वो उन्हें स्टेप्स सुझातीं, जो लोगों को बहुत पसंद आते. धीरे-धीरे उनका विश्वास बढ़ता गया और 1996 में उन्होंने अपने डांस ग्रुप की नींव रखी. यह डांस ग्रुप देश-विदेश में हजारों परफॉर्मेंस दे चुका है.रितु कहती हैं की पहले लोग कहते थे ‘लड़की है, सुंदर भी बहुत है, लेकिन बेचारी चल नहीं सकती तो यह डांस कैसे करेगी? वही लोग मेरे माता पिता से मेरी तारीफ़ करते हैं.रितु का कहना है कि उनके माता पिता ने उन्हें ये एहसास कभी नहीं होने दिया की वो विकलांग है. रितु कहती हैं, “जो काम मैं दो पैरो से नहीं कर पाई आज वो ही काम मैं हज़ारो पैरों से कर अपने सपने को साकार कर रही हूँ.”दिल्ली की रितु रावल पेशे से कोरियोग्राफ़र हैं. उनका अपना एक डांस ग्रुप है थंडरबॉल, और वो कई नामी गिरामी हस्तियों को नचा चुकी हैं.उनके ग्रुप के या उनसे सीखे हुए सेलिब्रिटीज़ के डांस को देख कर कोई यह नहीं सोच सकता कि रितु तीन साल की उम्र से व्हीलचेयर पर हैं.चाहे सोनू निगम हों या जसपिंदर नरूला या दलेर मेहंदी… दिल्ली में स्टेज शो होने पर ये सिंगर रितु के स्टेप पर ही नाचते हैं.रितु सबको खुद ट्रेन करती हैं.रितु ने बीबीसी को बताया, “मैं तीन साल की थीं, जब ब्रेन फ़ीवर की वजह से मेरे पैर और शरीर का निचला हिस्सा बेकार हो गया. ये मेरे पैरंट्स के लिए बहुत बड़ा सदमा था. मैंने अपनी पूरी पढ़ाई व्हीलचेयर पर बैठकर की. मेरा सपना था कि मैं एक पुलिस अधिकारी बनूं लेकिन शारीरिक कमजोरी के चलते ऐसा नहीं कर सकीं. इसके बाद मेरी इच्छा थी कि मैं क्रिमिनल लॉयर बनूं , लेकिन वहां भी मेरी विकलांगता आड़े आ गई.”रितु आगे कहती हैं, “बस, यहीं से मैंने ठान लिया कुछ ऐसा करने की, जिसके लिए पैर बहुत जरूरी हो . पैरों की जरूरत को ग़लत साबित करना चाहती थी इस लिए मैंने अपने डांस को अपना करियर बनाया.”

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