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डिजिटाइज्ड करने में हुई भूल का सुधार करना टेढ़ी खीर है।

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार :जमाबंदी पंजी को डिजिटाइज्ड करने में हुई भूल का सुधार करना टेढ़ी खीर है। कर्मियों की कमी इसमें बड़ी बाधा है। फिर भी स्थिति में काफी सुधार हुआ है। राज्यभर में 85.3 प्रतिशत आवेदनों को निपटारा हो गया। एक दर्जन से अधिक जिलों ने 90 प्रतिशत से अधिक आवेदनों का निपटारा कर लिया है। पांच महीना पहले ऐसे जिलों की संख्या मात्र पांच थी, लेकिन पटना सहित चार जिले आज भी विभाग की रिपोर्ट में लाल रंग से रंगे गये हैं। इन जिलों में काम की गति तेज नहीं हो रही है।राज्य में परिमार्जन के आवेदनों का निबटारा नहीं होने से किसान तो परेशान होते ही हैं सरकार को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है। जो जमीन मालिक गांव से बाहर रहते हैं वह रिकॉर्ड गलत होने के कारण लगान जमा नहीं कर पा रहे हैं। उधर ऑफलाइन लगान रसीद के अभाव के कारण कई जिलों में जमा नहीं हो रहा है।जमीन के दस्तावेज में हुए भूल सुधार के लिए परिमार्जन पोर्टल पर अब तक 15.58 लाख आवेदन मिले हैं। इनमें 2.46 हजार आवेदन रिजेक्ट कर दिये गये। इनको मिलाकर कुल 13.30 लाख आवेदन को निपटारा हुआ। इनमें लगभग 38 हजार ऐसे आवेदन थे जिनमें सुधार के लिए कुछ दस्तावेज मांगे गये थे, लेकिन मात्र 244 आवेदकों ने ही दस्तावेज उपलब्ध कराया।रिकार्ड में सुधार के लिए दिये गये आवेदनों का निपटरा करने में सबसे आगे बांका जिला है। इस जिले में काम पेंडिंग नहीं है। 99.73 प्रतिशत आवेदनों का निबटारा हो चुका है। इसके अलावा अररिया, भागलपुर, पूर्वी चम्पारण, जहानाबाद, कटिहार, किशनगंज, मुजफ्फरपुर, नवादा, पूर्णिया, सारण, शेखपुरा और औरंगाबाद में भी काम की गति तेज है। इन जिलों में भी 95 प्रतिशत आवेदनों का निबटारा हुआ है। लेकिन पटना, रोहतास, जुमई और खगड़िया जिले में काम की गति मंद है।जमाबंदी पंजी का डिजिटाइजेशन हुआ तो शायद ही ऐसी कोई जमाबंदी है जिसका रिकॉर्ड ऑनलाइन सही दिख रहा हो। कहीं किसान का रकबा ही शून्य लिखा हुआ है तो कई जगह किसान का नाम ही गलत है। खाता और खेसरा संख्या में भी गलती हुई है। इस भूल का मूल कारण काम का दवाब भी है। लगभग साढ़े तीन करोड़ होल्डिंग की जिम्मेवारी चंद कंप्यूटर ऑपरेटरों के भरोसे है। राजस्व विभाग ने हाल में बेलट्रॉन से लेकर कुछ ऑपरेटरों को जिलों में भेजा है। बावजूद हर अंचल में एक या दो कर्मी ही इस काम को संभाले हैं। विभाग का दूसरा काम भी ऑनलाइन हो गया है। लिहाजा इन कर्मियों के पास वह काम भी रहता है।

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