Breaking News

46 हजार दिव्यांग बच्चों के भविष्य के साथ क्यों हो रहा है खिलवाड़।

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार :राज्यभर का हर दिव्यांग बच्चा स्कूल जाए, इसके लिए बिहार शिक्षा परियोजना परिषद ने सर्वे करवाया है। सर्वे में राज्यभर से 46 हजार ऐसे दिव्यांग बच्चे चिह्नित किये गये, जो स्कूल से बाहर हैं। ऐसे बच्चों को चिह्नित कर उनका स्कूल में नामांकन करवाया जा रहा है। ज्ञात हो कि यू-डायस के अनुसार राज्य भर में एक लाख 41 हजार दिव्यांग बच्चे नामांकित हैं लेकिन जब सर्वे किया गया तो एक लाख 87 हजार 365 दिव्यांग बच्चों की संख्या हो गई है। सर्वे की मानें तो कुल एक लाख 87 हजार 365 दिव्यांग बच्चों में 50 हजार बच्चे केवल मानसिक और लो विजन (कम दिखाई देना) वाले हैं। राज्य भर में इनकी संख्या सबसे ज्यादा है। बिहार कुल एक लाख 87 हजार 365 दिव्यांग बच्चे सर्वे में मिले 50 हजार बच्चे मानसिक और लो विजन श्रेणी के दिव्यांग एक महीने के लिए और बढ़ा दिया गया काम हर जिले से ऐसे दिव्यांग बच्चे मिल रहे हैं जो स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। ऐसा कोई बच्चा छूट ना जाय, इसके लिए सर्वे का काम एक महीना बढ़ा दिया गया है। पहले | 30 जुलाई तक सर्वे का काम करना निर्धारित था लेकिन अब यह 31 अगस्त तक चलेगा। जिससे हर जिला में दिव्यांगों को चिह्नित कर उन्हें स्कूल पहुंचाया जा सके। शिक्षा परियोजना परिषद सूत्रों की मानें तो मानसिक और लो विजन के अलावा नेत्रहीन, अस्थि और बहरापन वाले दिव्यांग बच्चे भी काफी संख्या में हैं। दिव्यांग बच्चों का यह सर्वे पांच साल बाद करवाया गया है।‌सबसे ज्यादा गोपालगंज में दिव्यांग बच्चे चिह्नितः सर्वे में सबसे ज्यादा गोपालगंज में दिव्यांग बच्चे चिह्नित किये गये हैं। यहां पर 8761 बच्चे स्कूल से बाहर हैं। अररिया में की व्यवस्था है। 7342 और किशनगंज में 6578 दिव्यांग बच्चे हैं जो स्कूल नहीं जाते हैं। पटना की बात करें तो 5437 दिव्यांग बच्चे चिह्नित किये गये, जो स्कूल नहीं जाते। दिव्यांग बच्चों को स्कूल के साथ उनके घरों पर पढ़ाई की सुविधा देने की व्यवस्था है। ऐसे दिव्यांग जो स्कूल तक नहीं जा पाते हैं, ऐसे बच्चों के पास स्पेशल शिक्षक सप्ताह में दो से तीन दिन जाकर पढ़ाने

Check Also

दिव्यांग आरक्षण के नियम क्या हैं ? What are the rules for disability reservation?

🔊 Listen to this सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : दिव्यांगों के लिए बिल्कुल निःशुल्क काम …