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भारत के राष्ट्रपति ने दिव्यांगों के लिए कहीं यह बड़ी बात

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : हमारे देश में जनसंख्या का 2.2 प्रतिशत हिस्सा ये आंकड़े इंगित करते हैं कि हमें समाज में इनकी दिव्यांग जनों का है.दिनों राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि यह सुनिश्चित करना हमारा दायित्व है कि | दिव्यांग जनों को अच्छी शिक्षा मिले, वे अपने घरों एवं समाज में सुरक्षित हौं, स्वतंत्रता से अपना करियर चुन सकें तथा उन्हें रोजगार के समान अवसर उपलब्ध हो. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि दुनिया के कई देशों की तरह स्वतंत्रता के 75 वर्ष बाद भी देश में दिव्यांग जनों को समानता का अधिकार व्यवहार में नहीं मिल सका है. विश्व स्वास्थ्य संगठन की नयी रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वास्थ्य संबंधी विषमता के कारण बहुत से दिव्यांग असमय मौत के शिकार हो जाते हैं, समूची दुनिया में 1.3 अरब लोग दिव्यांग है यानी हर छह में एक व्यक्ति किसी तरह की विकलांगता का सामना कर रहा है, हमारे देश में जनसंख्या का 2.2 प्रतिशत हिस्सा दिव्यांग जनों का है. प्रभावी भागीदारी के लिए प्रयत्नशील होना चाहिए तथा नीतियां एवं कार्यक्रम समावेशी हो, जहां तक इन्हें स्वास्थ्य सेवा में बराबरी न मिलने का मसला है, उसके तीन मुख्य कारण हैं- स्वास्थ्यकर्मियों का नकारात्मक रवैया, सूचनाओं के सरल व सहज प्रसार का अभाव तथा समुचित व्यवस्था, यातायात और आर्थिक अभाव के कारण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में समस्या, दुनिया के 80 प्रतिशत दिव्यांग कम एवं मध्य आय वाले देशों में रहते हैं, जहां शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाएं सीमित है. देश में आबादी का बड़ा हिस्सा गरीब और निम्न आय वर्ग से है. स्वास्थ्य संबंधी संसाधनों का घोर अभाव है. यही स्थिति शिक्षा के साथ है. दिव्यांग ‘बच्चों, किशोरों और युवाओं के शिक्षण-प्रशिक्षण के लिए विशेष शिक्षा संस्थानों तथा शिक्षकों की आवश्यकता होती है. ऐसे संस्थान गिने-चुने ही हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक संदेश में कहा है कि सरकार की प्राथमिकता पहुंच सुनिश्चित करने की है तथा इस संबंध में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर ध्यान दिया जा रहा है. उल्लेखनीय है कि 2016 के विकलांग अधिकार कानून में यह प्रावधान है कि पांच साल के भीतर सभी सार्वजनिक भवनों में दिव्यांगों के आसानी से आने- जाने के लिए व्यवस्था की जायेगी. लेकिन अभी तक केंद्र और राज्य सरकारों के केवल 2,839 भवनों में ही ऐसी व्यवस्था हो सकी है. कई जगहों पर लड़की और व्हीलचेयर आदि भी उपलब्ध नहीं होतीं. समावेशी माहौल और समुचित इंफ्रास्ट्रक्चर न होने से दिव्यांग जन परेशान तो होते ही हैं, उनका आत्मविश्वास भी कमजोर होता जाता है. जैसा कि राष्ट्रपति ने रेखांकित किया है, उनमें आत्मविश्वास का संचार करना उनके सशक्तीकरण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. सरकारों के साथ समाज को भी अधिक संवेदनशील होना चाहिए तथा दिव्यांगों की प्रतिभा व सामर्थ्य को विकास यात्रा का सहभागी बनाना चाहिए,

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