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सुनने की हानि को कितना दिव्यांगता माना जाता है बिहार सरकार के पास मापने का मशीन ही नहीं।

 सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार :आठ साल से हीयरिंग जांच ठप कोकलियर इंप्लांट पर असर, पेसेंट की बाहर होती है जांच कालेज अस्पताल के कान-नाक-गला विभाग में विकसित माडलर ओटी में कोकलियर इंप्लांट हो रहा है लेकिन आडियोलाजिस्ट व टेक्नीशियन के अभाव में मरीजों की श्रवण शक्ति जांच लगभग आठ सालों से बंद है. इस जांच के लिए उपलब्ध आडियोमेट्री मशीन जंग खा रही हुई. सबसे अधिक नुकसान ओपीडी में आने वाले मरीजों और अस्पताल में हर दिन जन्म लेने वाले करीब डेढ़ दर्जन बच्चों को रहा है. इनके सुनने की क्षमता जांच कराने के लिए स्वजन को सक्रिय दलालों द्वारा निजी जांच घरों तक पहुंचाया जा रहा है. ओपीडी से निकले कई मरीज के स्वजन ने एक पुर्जा दिखा कर बताया कि कर्मी ने देते हुए कहा कि अस्पताल में जांच नहीं होती है. पुर्जा में निजी जांच केंद्र का नाम, पता, फोन नंबर लिखा है. स्वजन ने बताया कि इन केंद्रों पर अलग-अलग प्रकार की जांच के लिए 13 सौ से लेकर ढाई हजार रुपए तक लिया जाता है.कई संदिग्ध जांच केंद्र एनएमसीएच के आसपास आडियोमेट्री जांच के लिए कई केंद्र खुले हैं. कई जगह आशिक्षित टेक्नीशियन द्वारा मरीजो की श्रवण क्षमता की जांच की जाती है. अक्सर जांच रिपोर्ट पर अस्पताल के चिकित्सक सवाल उठाते रहे है. इनका कहना है कि सिविल सर्जन स्तर से कोई कार्रवाई नहीं होने से फर्जी जब घर चल रहे हैं.आडियोमेट्री मशीन पंद्रह साल पुरानी है.आडियोलाजिस्ट व टेक्नीशियन आठ सालों से नहीं रहने के कारण जांच बंद है. विभाग को कई पत्र लिखा गया. जांच शुरू किया जाना मरीजों के लिए आवश्यक है. डा. सत्येंद्र शर्मा, विभागाध्यक्ष, इएनटी।

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