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“दिव्यांग अधिकार अधिनियम 2016 पर बड़ा फैसला आज की खबर पक्का अपडेट नई योजना, नया नियम, बड़ी अपडेट – ग्राउंड रिपोर्ट के साथ सीधा लाइव”

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : दिव्यांगों के लिए बिल्कुल निःशुल्क काम करने वाले तोशियास सचिव ने बताया कि दिव्यांग अधिकार अधिनियम 2016 की वास्तविक सच्चाई यही दिव्यांग के विकास में सबसे बड़ा बाधा है अध्यादेश को कानून क्यों नहीं माना जा सकता ? अब अध्यादेश को जब define करना हो तो करेंगे कि यह एक ऐसा आधिकारिक आदेश है जो अपनी प्रकृति और प्रभाव में कानून के समान होता है। तो है वो आदेश आधिकारिक आदेश है लेकिन उसका प्रभाव कानून की भांति है। लेकिन वह कानून संसदीय कानून नहीं है। इसलिए संविधान में जहाँ-जहाँ यह प्रेस लिखा हुआ है विधि का प्राधिकार, वहां अध्यादेश लागू नहीं होता अध्यादेश कैसे और क्यों लाया जाता है ? अध्यादेश क्या है? अध्यादेश एक अधीनस्थ विधान है। अधीनस्थ विधान क्या हुआ? प्रत्यायोजित विधान समझते हैं delegation। जब विधायिका अपनी विधि बनाने की शक्ति कार्यपालिका को सौंप दे, उसको प्रत्यायोजन कहते हैं delegation। हमें कोर्ट यह कह रहा है कि भारत में जो संसद है वह अपनी विधि बनाने की शक्ति का प्रत्यायोजन नहीं कर सकती क्योंकि वह खुद ही एक प्रत्यायोजित सदन है जो जनता की शक्तियों का प्रयोग करती है। लेकिन चूंकि प्रत्यायोजन की जरूरत है इसलिए संविधान ने प्रत्यायोजन कर रखा है। इसलिए जो भी कार्यपालिका, नियम, आदेश, कानून जो बनाएगी वह संसद की शक्तियों के अधीन होगा। उस कानून को, उस नियम को संसद जब चाहे तब निरस्त कर दे सकती है। कैसे CAG भारत में भ्रष्टाचार को रोकता है ?आप लोगों ने संसद में पढ़ा PAC Public Account Committee. Public Account Committee का काम accounting करना है और CAG का काम auditing करना है। तो दोनों में अंतर कैसे है? Accounting का मतलब होता है केवल बही खाता। यानी कि इतना पैसा आया और इतना पैसा खर्च हुआ। अगर उसका हिसाब आपने दे दिया तो accounting आपकी सही है। जैसे आप, घरवालों ने आपको पैसा दिया, बाजार से यह सामान लेकर आना है। तो ₹5,000 दिया। आप सामान लेने गए, एक bill बनवाए और bill में सबके सामने ये, ये, ये, ये price लिखा हुआ है और total आया ₹5,000। आपने घरवालों को दिखाया कि ये bill है। उन्होंने देखा हाँ ठीक है। तो ये accounting. लेकिन auditing में ये देखा जाएगा कि जो bill बनवाया है, कहीं ऐसा नहीं फर्जी bill बनवा दिया वहां पर। ₹50 का सामान ₹100 का दिखा दिया। कि वहां पर बोल दिया दुकानदार से कि भैया हम आपके यहां से सामान लेंगे। लेकिन यहां ₹50 वाला थोड़ा ₹100 कर दो, ₹100 वाला ₹500 कर दो। तो auditing का मतलब यह होता है जो खर्चा है उसकी वैधता, genuinity क्या है? केवल हम accounting नहीं देखने जा रहे, उसकी genuinity देखने जा रहे कि वहां खर्च हुआ भी या नहीं हुआ है। तो इसलिए CAG की भूमिका बहुत ज्यादा हो जाती है।

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