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दिव्यांग महिलाओं बुजुर्गों के लिए बिहार सरकार समाज कल्याण विभाग का नया निर्देश

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : बिहार सरकार समाज कल्याण विभागविभाग अन्तर्गत चलाये जा रहे विभिन्न योजनाओं के सकारात्मक प्रभाव (NHFS-5 के Indicator) समाज कल्याण विभाग बच्चों, किशोरियों, भिक्षुकों, दिव्यांगजनों, ट्रान्सजेन्डरों, वृद्धजनों तथा महिलाओं तथा अन्य अभिवंचित वर्गों के हितों तथा अधिकारों के संरक्षण, संवर्दधन एवं प्रोत्साहन तथा इन समूहों की समेकित उन्नति एवं विकास के लिए कार्यरत है। बच्चों, किशोरियों एवं महिलाओं के लिए चलाये जा रहे कई कल्याणकारी योजनाओं का इन लक्षित समूहों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है जो स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निर्गत National Family Health Survey – (NHFS-5) में परिलक्षित होता है। संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करने के लिए विभाग की ओर से मुख्यमंत्री कन्या सुरक्षा योजना
संचालित है। पूर्व के सर्वे के अपेक्षा संस्थागत प्रसव में 63.8 से बढकर 76.2 (19.5 प्रतिशत बढोतरी) हो गया
गया है तथा सरकारी सुविधा में संस्थागत प्रसव 47.6 से बढकर 56.9 (19.5 प्रतिशत बढोतरी) है। इसी प्रकार
ऑगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से 6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती एवं धातृ महिलाओं को पूरक पोषाहार के माध्यम
से कुपोषणता को कम करने का प्रयास किया गया। इसके अन्तर्गत सभी ऑगनबाड़ी केन्द्रों पर दुग्ध, अण्डा तथा फोर्टिफाइड फूड दिया जा रहा है। पूर्व के सर्वे के अपेक्षा 5 वर्ष से कम आयु के कम वजन वाले बच्चों का
प्रतिशत 43.9 से घटकर 41.0 हो गया है।
ऑगनबाड़ी केन्द्री के माध्यम से 0-6 वर्ष के बच्चों, गर्भवती एवं धातृ महिलाओं को 6 प्रकार की सेवाएँ
देने के अतिरिक्त सेविका/सहायिका के द्वारा अपने पोषक क्षेत्र के अन्तर्गत सभी घरों में जाकर स्तनपान को
बढावा देने, पोषक आहार, बीमारियों से बचाव एवं जन-जागरुकता को बढावा देने का कार्य किया जाता रहा है।
इस वर्ष विश्वयापी महामारी कोरोना के दौरान प्रतिदिन सेविका/सहायिका एवं अन्य पदाधिकारी/कर्मी के द्वारा
डोर-टू-डोर visit किया गया है। इस क्षेत्र में कई सकारात्मक बदलाव भी आये है जो NFHS- 5 के सर्वे में
परिलक्षित होता है। 6 माह तक के बच्चों का स्तनपान कराने का प्रतिशत 53.4 से बढकर 58.9 हो गया है।
इसी तरह 6-8 माह के बच्चे जो कि स्तनपान के साथ-साथ उपरी आहार (solid or semi-solid food) लेने वाले बच्चों का प्रतिशत भी 30.8 से बढ़कर 39.0 हो गया है। साथ ही 6-23 माह तक के बच्चे जो कि पर्याप्त
आहार प्राप्त कर रहे है उनका भी प्रतिशत बढकर 7.5 से 10.9 हो गया है।किशोरियों एवं महिलाओं के जीवन में गुणात्मक सुधार, सर्वागीण विकास एवं सशक्तिकरण हेतु महिला विकास निगम कार्यरत है। मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना के अन्तर्गत महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक सशक्तिकरण हेतु कई कार्य किये जा रहे है। इसके परिणामस्वरुप महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति पूर्व से अधिक जागरुक एवं सशक्त हुई है जो NFHS -5 के प्रतिवेदन में स्पष्ट प्रतिबिम्बित है। वर्तमान में
शादी-शुदा महिलाओं के द्वारा घर में लिये जा रहे निर्णयों में बढावा देखने को मिलता है जो कि पूर्व के सर्वे
75.2 से बढ़कर 86.5 हो गया है। साथ ही वैसी महिलाओं जिनका अपने स्वयं का बचत बैंक खाता है उनका
भी प्रतिशत 26.4 से बढ़कर 76.7 हो गया है। इसी तरह 15-24 वर्ष की महिलाओं की स्वच्छता का प्रतिशत
31.0 से बढ़कर 58.8 हो गया है। राज्य सरकार द्वारा बाल विवाह एवं दहेज प्रथा उन्मूलन के पक्ष में चलाये जा रहे राज्यव्यापीअभियान का कई सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहे है। NHFS -5 के प्रतिवेदन में 18-49 वर्ष की शादी-शुदा महिलाओं के बीच दाम्पत्य हिंसा की घटनाओं में गिरावट (43 प्रतिशत से घटकर 40 प्रतिशत) तथा इस आयु वर्ग के महिलाओं के गर्भावस्था के दौरान भी हिंसा की घटनाओं में गिरावट (4.8 से घटकर 2.8 प्रतिशत) देखने को मिलता है। इसी प्रकार 18-29 वर्ष की वैसी महिलाएँ जो कि 18 वर्ष की आयु तक यौनिक हिंसा के शिकार हुए है, उनका भी प्रतिशत घटकर 14.2 से 8.3 हो गया है।

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