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बिहार में लगभग 2% दिव्यांग को ही अन्नपूर्णा योजना का लाभ मिल पाड़ा 98% आज भी इस योजना से वंचित है

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार पटना: अभी बिहार में होली का समय और यह बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है इसमें प्रमुख प्रधानता आपसी भाईचारा एवं खाने को दिया जाता है लेकिन वही बात करेंगे आप बिहार में दिव्यांग समाज की तो आप पाएंगे कि इनके लिए एक योजना अन्नपूर्णा योजना चलाई जाती है जिसके तहत दिव्यांगों को निर्धारित अनाज दिए जाते हैं लेकिन यह सिर्फ 2% दिव्यांगों को ही मिल पा रहा है 98% दिव्यांग इससे वंचित है इसलिए  बिहार का दिव्यांग समाज बिहार सरकार से निवेदन करता है कि इस योजना को सही तरीके से धरातल पर लाया जाए जिससे कि दिव्यांग जनों को उनका अधिकार मिल पाए इसलिए आपको आपके योजना से जोड़ने के लिए हम इस योजना की पूरी जानकारी दे रहा है ताकि सभी दिव्यांगों को बिहार में इस योजना का लाभ मिल पाए

अन्नपूर्णा योजना

अन्नपूर्णा योजना को उन वरिष्ठ नागरिकों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने के लिए आरंभ किया गया था जो राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना  के दायरे से बाहर रह गए हैं। अन्नपूर्णा एक केंद्रीय रूप से प्रायोजित योजना है जिसका निष्पादन बिहार सरकार का खाद्य आपूर्ति और वाणिज्य विभाग करता है। ज़िला मजिस्टे्रट को ज़िला स्तर पर कार्य-निष्पादन हेतु नोडल अधिकारी नामांकित किया गया है और ग्राम पंचायत को इस योजना के अनुश्रवण और पर्यवेक्षण के लिए उत्तारदायी बनाया गया है।

खाद्य और उपभोक्ता विभाग, बिहार सरकार के अनुसार बिहार में निराश्रित वृद्ध जनों को इस योजना के अंतर्गत लाभ प्रदान किया जा रहा है।

लाभ और पात्रता

इस योजना के अंतर्गत निराश्रित वृध्द जनों को प्रतिमाह 10 किलोग्राम खाद्यान्न (छह किलोग्राम गेहूं और चार किलोग्राम चावल) मुफ्त उपलब्ध कराया जाता है। अपने-अपने क्षेत्रों में नगरपालिकाएं इस योजना के संचालन के लिए उत्तारदायी हैं।

योग्यता

आवेदन (महिला या पुरुष) की आयु 65 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए।

आवेदक निराश्रित होना चाहिए जिसके पास खुद अपनी आय से या परिवार के सदस्यों या अन्य स्रोतों से प्राप्त होने वाले जीवन निर्वाह के साधन न के बराबर या फिर बिल्कुल न हों। निराश्रयता की परिभाषा के लिए राज्य में इस समय अपनाये जाने वाले मानदंडों (अगर हैं तो) का पालन किया जा सकता है।

आवेदक को राष्ट्रीय वृध्दावस्था पेंशन योजना, राज्य पेंशन योजना के अंतर्गत पेंशन प्राप्त नहीं होनी चाहिए।

कैसे प्राप्त करें

ग्रामीण क्षेत्रों में लाभार्थियों की पहचान और चयन ग्राम सभाओं और ग्राम पंचायतों द्वारा किया जाता है। ग्राम सभाओं द्वारा चयनित लाभार्थियों की सूची ग्राम पंचायतों के सूचना-पट्ट पर प्रदर्शित की जाती है। ग्राम पंचायतें ग्राम सभा की बैठकों के दौरान लाभार्थियों को हकदारी कार्ड वितरित करती हैं।

यह बहुत बड़ी बात है की योजना रहते हुए भी दिव्यांगों को योजना का लाभ बिहार में क्यों नहीं मिल पा रहा है

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