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भारत के दिव्यांगों को मिले निर्वाचन कानून का लाभ क्या कहता है कानून

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार :  दिव्यांगों को संविधान में और निर्वाचन कानून के सर्कुलर में समान भागीदारी के लिए सर्कुलर बना हुआ है जिसके तहत दिव्यांग उम्मीदवार भी अपना नामांकन कर सकते इस पंचायत चुनाव में बिहार में प्रत्येक दिव्यांग व्यक्ति को 4% आरक्षण प्रदान किया जाना चाहिए यह नहीं मैं नहीं निर्वाचन कानून कहता है निर्वाचन कानून की पूरी जानकारी इस प्रकार है दिव्यांग लोगों के लिए समान भागीदारी संविधान ने एक स्वतंत्र भारत निर्वाचन आयोग का गठन किया है। आयोग में भारत के  राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति तथा संसद और राज्य विधानपालिकाओं के चुनाव के लिए मतदाता सूचियों की तैयारी तथा चुनाव की देखरेख, निर्देशन तथा नियंत्रण की शक्ति निहित है(अनुच्छेद-324)।

निर्वाचक कानून

  • राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति तथा संसद और राज्य विधानपालिकाओं के चुनावों के लिए कानून बनाने का अधिकार संसद द्वारा दिया गया है (अनुच्छेद-71 तथा 327)।
  • इसी प्रकार नगरपालिकाओं, पंचायतों तथा अन्य स्थानीय निकायों के चुनाव कराने के लिए स्वतंत्र संवैधानिक प्राधिकार का गठन किया गया है।  इनके चुनाव कराने संबंधी कानून राज्य विधानपालिकाएं बनाती हैं (अनुच्छेद 243K तथा 243ZA)।
  • राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति पद के चुनावों से संबंधित सभी संदेहों, विवादों का निपटारा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किया जाता है (अनुच्छेद-71)।
  • संसद तथा राज्य विधानपालिकाओं के चुनाव से संबंधित सभी संदेहों तथा विवादों को निपटाने का अधिकार संबद्ध राज्य के उच्च न्यायालय को है। इनमें सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार भी है (अनुच्छेद-329)।
  • नगरपालिकाओं आदि के चुनावों से संबंधित विवाद के मामलों का निर्धारण राज्य सरकारों द्वारा बनाए गए कानूनों के अनुसार निचली अदालतें करती हैं।
  • राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव से संबधित कानून संसद द्वारा राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति निर्वाचन अधिनियम, 1952 बनाए गए हैं। इस अधिनियम की प्रतिपूर्ति राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति निर्वाचन नियम, 1974 द्वारा की गई है और इसके आगे सभी पक्षों पर निर्देश निर्वाचन आयोग द्वारा दिए जाते हैं।
  • संसद तथा राज्य विधानपालिकाओं के चुनाव करने संबंधी प्रावधान जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 तथा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में निहित हैं। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 मुख्यतः निर्वाचन सूचियों की तैयारी तथा पुनरीक्षण से संबंधित है, जबकि चुनाव के वास्तविक संचालन से संबंधित सभी विषय जनप्रतिनिधित्व
  • अधिनियम, 1951 के प्रावधानों से शासित होते हैं।

जब भारतीय संविधान में यह सभी बातें स्पष्ट रुप से लिखा हुआ है तो भारत के निर्वाचन कानून के तहत सभी राज्यों में दिव्यांगों को चुनाव में आरक्षण प्रदान किया जाना चाहिए यह मैं नहीं निर्वाचन कानून कहता है ताकि भारत का दिव्यांग समाज भी अपने संविधानिक अधिकार को पा सके

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