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अब दिव्यांग बनेंगे वैज्ञानिक को भी बिल्कुल निशुल्क सौरभ सर के सानिध्य में

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : प्रोग्रामिंग सौरभ सुमन ने बनाया वाटर लेवल जानने वाला प्रोग्रामिंग किट ऑफिस से भी देख सकेंगे टंकी में पानी है या नहीं मैं विशेष दुनिया के किसी भी कोने से कर सकेंगे मॉनिटरिंग तोशियास संस्था के आईटी सेक्टर के गुरु है यह कई दिव्यांगों को भी दिया है प्रशिक्षण अब दिव्यांग बनेंगे वैज्ञानिक अब आप ऑफिस से बैठे-बैठे ही अपने घर में लगे टंकी का वाटर लेवल एक क्लिक पर देख सकेंगे. यह संभव हुआ है पटना के सौरभ सुमन द्वारा तैयार प्रोग्रामिंग किट से, उन्होंने आईडी एप, बोर्ड, ब्लूटूथ और रिले का यूज करते हुए प्रोग्रामिंग किट तैयार किया है, इसके माध्यम से टंकी में कहीं भी इसे सेट कर दीजिए और ऑफिस या दूसरे जिले या दुनिया के किसी भी कोने से मोबाइल के माध्यम से टंकी में पानी कितना है खाली है, या भरा है यह जानकारी ले सकते हैं. इतना ही नहीं, एप के माध्यम से वाटर कंट्रोल भी कर सकते हैं. यह सिस्टम, टंकी में किट से जान सकेंगे वाटर लेवल आसानी से कर सकेंगे मॉनिटरिंग ऐसी तकनीक खोज की जिसके माध्यम से दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर आप पानी टंकी की मॉनिटरिंग कर सकते है. सौरभ सुमन बताते है कि अक्सर टंकी में पानी कम हो जाता है और अचानक खत्म हो जाता है. समस्या तब और बढ़ जाती है जब पानी खत्म हो और टंकी भरने की सूचना देने वाले यंत्र तो है लेकिन पानी भरने या कम होने या खत्म होने की सूचना नहीं मिल पाती है. लेकिन टंकी में किट लगाने से आसानी से जान पाएंगे कि टंकी में पानी का लेवल क्या है. तरह काम करेगा सिस्टम सौरव सुमन ने बताया कि टंकी में वाटर लेवल मापने के लिए मोबाइल के प्ले स्टोर से ब्लिनिक एप डाउनलोड कर प्रोग्रामिंग कर लिक करना पड़ता है. लिंक करने के बाद टंकी में सेंसर और किट लगाया जाता है जिसके बाद यह ऑटोमेटिक काम करने लगता है..पंद्रह सौ रुपए आएगी लागत सौरभ सुमन ने बताया कि टंकी में वाटर लेवल कंट्रोल करने के लिए प्रोग्रामिंग और किट, सेंसर लगवाने में करीब 15 सौ रुपए खर्च है. इस सिस्टम से लैस होने के बाद बिजली की बचत भी होगी क्योंकि कई बार ऐसा होता है कि लोग मोटर चला कर पानी भरने के लिए छोड़ देते हैं और भूल जाते है इस दौरान अगर कही निकल गए तो पानी गिरता रहता है. लेकिन अब एप के माध्यम से न सिर्फ लेवल जान पाएंगे बल्कि उसे ऑन-ऑफ भी कर सकते हैं तोशियास संस्था के दिव्यांग सदस्य निरंतर अपने गुरु के साथ मिलकर यह कार्य कर रहे हैं और अपने अंदर छिपी हुई प्रतिभा को दुनिया को अवगत करा रहे हैं और इस स्लोगन को सत्यापित कर रहे हैं की प्रतिभा किसी परिचय का मोहताज नहीं होता है।

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