बैंक का इतिहास क्या है ? What is the history of the bank?

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : दिव्यांगों के लिए बिल्कुल निःशुल्क काम करने वाले तोशियास सचिव ने बताया कि हम गोरे अंग्रेजों की देन है तुम लोगों का bank system. 1770 में कोलकाता में हमने पहला bank, Bank of Hindustan खोला। सुनो, इसमें हमारी क्या चाल थी। व्यापार फैलाने के लिए हमें बड़े बड़े लेनदेन, bill of exchange और कर्ज का पक्का system चाहिए था। Bank हमारे लिए कमाई की machine थे। हमने Presidency bank जैसे Bank of Calcutta, Bank of Bombay और Bank of Madras शुरू किए ताकि सारा पैसा हमारे control में ही रहे। company के अफसरों, सैनिकों और व्यापारियों को पैसा भेजना, लाना और संभालना आसान करना था इसलिए हमने पूरा banking system खड़ा किया। Tax का पैसा इकट्ठा करने और England तक सुरक्षित भेजने में bank हमारे लिए सबसे आसान और तेज रास्ता बन गए। हम दोगले अंग्रेजों की चाल तो देखो। इन बैंकों से हमने रेल, नील, कपास और अफीम जैसे बड़े कारोबारों को fund किया। मुनाफा हमारा, मेहनत भारत की ही रही। चूस डाला हमने तुम्हें। एक बात तो साफ है, इसको हमने अपने लूट को सुरक्षित रखने के लिए open किया था। हमें जनता की भलाई से ज्यादा अपने पैसों की फिक्र थी। हम अंग्रेजों को भारत में लोगों के नाम से बैंक खाता खुलवाने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या यह लोगों का पैसा सुरक्षित रखने के लिए था? नहीं, यह पैसे को पकड़ने के लिए था। मैं एक ब्रिटिश अधिकारी हूं। भारत में व्यापार बहुत था, लेकिन पैसा कागज में नहीं था। सौदा नकद, मजदूरी नकद, लगान नकद और नकद का कोई रिकॉर्ड नहीं। किसने कितना कमाया, किसने कितना दिया, किसके पास कितना बचा, हमें पता ही नहीं चलता था। इसलिए हमने सरकारी बैंक और खाता system बढ़ाया। कंपनियों का पैसा खाते में, जमींदार का पैसा खाते में, सरकारी भुगतान खाते में, रजिस्टर में आने लगा। लेनदेन लिखा जाने लगा, कर्ज लिखा जाने लगा, ब्याज लिखा जाने लगा। पहली बार पैसा सिर्फ दौलत नहीं रहा। सूचना बन गया। अब हमें मालूम था किसके पास ताकत है और किससे वसूली करनी है। हमने तिजोरी नहीं बनाई, हमने हिसाब बनाया। सबूत क्या माना जाता है? कागज नहीं, bank entry। पहले जेब देखकर अमीरी पता चलती थी, अब statement देखकर इंसान पहचाना जाता है।

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