सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार पटना:दिव्यांगों के लिए केंद्र सरकार के अधिकारी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के दिशा-निर्देश पर विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के रिक्त पड़े पदों और उन्हें भरने के लिए उठाए गए कदमों का डाटा इकट्ठा करने के काम में लगे हुए हैं। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब विपक्ष ने केंद्र और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नौकरियां पैदा करने और मौजूदा रिक्तियों को न भर पाने में असफल बताया है।
इन दिशा-निर्देशों के परिणामस्वरूप मंत्रालयों और विभागों ने आंतरिक सर्कुलर जारी किया है, जिसमें खाली पदों की संख्या, स्वीकृत पद और रिक्तियों के प्रतिशत की सूचना मांगी गई है। इसको लेकर तीन मई को रक्षा मंत्रालय के अवर सचिव फणी तुलसी ने एक सर्कुलर जारी किया है, जिसको अनुसार वित्त मंत्रालय को सूचित किया गया है कि जल्द ही इस संबंध में पीएमओ द्वारा एक बैठक की जाएगी, जिसमें विभिन्न विभागों में खाली पदों पर चर्चा होगी। 30 अप्रैल 2019 तक खाली विभिन्न पदों के बारे में जानकारी मांगी गई है।
इसी बीच सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा, जिन्होंने एनएसएसओ जॉब डाटा को लेकर सरकार का बचाव किया था। उन्होंने गुरुवार को कहा, “प्रधानमंत्री चुनाव में वयस्त हैं। मुझे नहीं लगता कि ऐसी कोई कोशिश हो रही है। मेरे मंत्रालय में करीब 6 हजार कर्मचारी हैं। मैंने ऐसा कोई सर्कुलर नहीं देखा है।
केंद्र सरकार कर्मचारी संघ केकेएन कुट्टी ने कहा, “पिछले पांच सालों के दौरान इस सरकार ने हमसे कोई संचार नहीं किया है। इस सरकार के अंतर्गत पहली राष्ट्रीय परिषद की बैठक 13 अप्रैल को तब हुई, जब चुनावों की घोषणा हो गई। वह उस एजेंडा पर बातचीत करना चाहते हैं, जो हमने उनके सत्ता में आने के समय पर भेजा था।“
रिक्तियों के संबंध में उन्होंने कहा कि दो परेशानियां हैं। पहला कर्मचारी चयन आयोग को रिक्तियों की संख्या के बारे में विवरण नहीं देने के लिए ठोस प्रयास हो रहे हैं। दूसरा एसएससी इस स्थिति में नहीं है कि वह आवश्यक संख्या में लोगों की भर्तियां कर सके। कुट्टी ने कहा, “औसतन ज्यादातर विभागों में 40 से 45 फीसदी तक रिक्तियां हैं। आईटी में 50स कैग में 45 प्रतिशत पद खाली हैं। प्रायोजित पद तो हैं लेकिन कोई भर्ती नहीं हो रही है। इस तरह की रिपोर्ट्स का कोई मतलब नहीं है।“
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