सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार :विश्व दिव्यांग दिवस 2020 हर साल 3 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिव्यांग व्यक्तियों का अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाने की शुरुआत हुई थी और 1992 से संयुक्त राष्ट्र के द्वारा इसे अंतरराष्ट्रीय रीति-रिवीज़ के रुप में प्रचारित किया जा रहा है। दिव्यागों के प्रति सामाजिक कलंक को मिटाने और उनके जीवन के तौर-तरीकों को और बेहतर बनाने के लिये उनके वास्तविक जीवन में बहुत सारी सहायता को लागू करने के द्वारा तथा उनको बढ़ावा देने के लिये साथ ही दिव्यांग लोगों के बारे में जागरुकता को बढ़ावा देने के लिये इसे सालाना मनाने के लिये इस दिन को खास महत्व दिया जाता है। 1992 से, इसे पूरी दुनिया में ढ़ेर सारी सफलता के साथ इस वर्ष तक हर साल से लगातार मनाया जा रहा है।
समाज में उनके आत्मसम्मान, सेहत और अधिकारों को सुधारने के लिये और उनकी सहायता के लिये एक साथ होने के साथ ही लोगों की दिव्यांगता के मुद्दे की ओर पूरे विश्वभर की समझ को सुधारने के लिये इस दिन के उत्सव का उद्देश्य बहुत बड़ा है। जीवन के हरेक पहलू में समाज में सभी दिव्यांग लोगों को शामिल करने के लिये भी इसे देखा जाता है जैसे राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक। इसी वजह से इसे “विश्व दिव्यांग दिवस” के शीर्षक के द्वारा मनाया जाता है। विश्व दिव्यांग दिवस का उत्सव हर साल पूरे विश्वभर में दिव्यांग लोगों के अलग-अलग मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित करता है।
विश्व दिव्यांग दिवस के थीम
दिव्यांग व्यक्तियों के लिये समाज में नियम और नियामकों को ठीक ढंग से लागू करने के लिये दिव्यांग व्यक्तियों के अंतरराष्ट्रीय दिवस के उत्सव को एक असरदार थीम की ज़रुरत है। नीचे दिव्यांग व्यक्तियों के अंतरराष्ट्रीय दिवस के उत्सव के लिये वार्षिक आधार पर निम्न थीम दिये गये हैं:
वर्ष 1998 का थीम था “कला, संस्कृति और स्वतंत्र रहन-सहन”।
वर्ष 1999 का थीम था “नयी शताब्दी के लिये सभी की पहुंच”।
वर्ष 2000 का थीम था “सभी के लिये सूचना क्रांति कार्य निर्माण”।
वर्ष 2001 का थीम था “पूर्ण सहभागिता और समानता: प्रगति आँकना और प्रतिफल निकालने के लिये नये पहुंच मार्ग के लिये आह्वान”।
वर्ष 2002 का थीम था “स्वतंत्र रहन-सहन और दीर्घकालिक आजीविका”।
वर्ष 2003 का थीम था “हमारी खुद की एक आवाज”।
वर्ष 2004 का थीम था “हमारे बारे में कुछ नहीं, बिना हमारे”।
वर्ष 2005 का थीम था “दिव्यांगजनों का अधिकार: विकास में क्रिया”।
वर्ष 2006 का थीम था “ई- एक्सेसिबिलीटी”।
वर्ष 2007 का थीम था “दिव्यांगजनों के लिये सम्माननीय कार्य”।
वर्ष 2008 का थीम था “दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों पर सम्मेलन: हम सभी के लिये गरिमा और न्याय”।
वर्ष 2009 का थीम था “एमडीजी का संयुक्त निर्माण: पूरी दुनिया में दिव्यांग व्यक्तियों और उनके समुदायों का सशक्तिकरण”।
वर्ष 2010 का थीम था “वादे को बनाये रखना: 2015 और उसके बाद की ओर शताब्दी विकास लक्ष्य में मुख्यधारा दिव्यांगता”।
वर्ष 2011 का थीम था “सभी के लिये एक बेहतर विश्व के लिये एक साथ: विकास में दिव्यांग व्यक्तियों को शामिल करते हुए”।
वर्ष 2012 का थीम था “सभी के लिये एक समावेशी और सुगम्य समाज उत्पन्न करने के लिये बाधाओं को हटाना”।
वर्ष 2013 का थीम था “बाधाओं को तोड़ें, दरवाज़ों को खोलें: सभी के लिये एक समावेशी समाज और विकास”।
वर्ष 2014 का थीम था “सतत् विकास: तकनीक का वायदा”।
वर्ष 2015 का थीम था “समावेश मायने रखता है: सभी क्षमता के लोगों के लिये पहुंच और सशक्तिकरण”।
वर्ष 2016 में विश्व दिव्यांग दिवस के लिए थीम “भविष्य के लिए 17 लक्ष्य हासिल करना” था।
वर्ष 2017 में विश्व दिव्यांग दिवस के लिए थीम “सभी के लिए टिकाऊ और लचीला समाज की ओर परिवर्तन” था।
वर्ष 2018 का थीम “दिव्यांग व्यक्तियों को सशक्त बनाओ तथा उनके समावेश और समानता को सुनिश्चित करो (इम्पावरिंग पर्सन विथ डिसएबिलिटीज एंड इनश्योरिंग इनक्लूजीवनेस एंड इक्वालिटी)” है।
वर्ष 2019 का थीम ”दिव्यांग व्यक्तियों के नेतृत्व और उनकी भागीदारी को बढ़ावा देना” है।
वर्ष 2020 का थीम “पूर्ण सहभागिता और समानता” है
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