दिव्यांगों को इंदिरा आवास योजना का सुविधा देने में सरकार जमीन की अनिवार्यता पर क्यों बांध रही है

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार  दिव्यांगों को इंदिरा आवास योजना में जमीन की अनिवार्यता को सरकार को समाप्त करना चाहिए दिव्यांगों को महज पेंशन के रूप में ₹400 प्राप्त होते हैं 1 महीने के उसमें दिव्यांगजन जमीन कहां से खरीद पाएंगे और सबसे बड़ी बात इंदिरा आवास योजना वैसे दिव्यांगों को दिया जाता है जिसका आय का कोई साधन नहीं है वैसे में जो सरकार के द्वारा यह पॉलिसी बनाई गई है की यह उन्हीं दिव्यांगों को प्राप्त होगा जिसके पास अपने द्वारा खरीदा गया जमीन हो तो मै सरकार स्पष्ट रूप से यह पूछना चाहता हूं की जिसके पास अपना जमीन होगा क्या वह गरीब होगा और यह अनिवार्यता जो प्रमुख रूप से कर दिया गया है इसमें किसी गरीब को इस योजना का लाभ मिल पाएगा दूसरी बात यह है कि जो सर्वे करने के लिए ब्लॉक से पदाधिकारी आते हैं वह दिव्यांगों का सर्वे तो कर लेते हैं लेकिन वह दिव्यांगों को पूरी तरह से बेवकूफ बना कर निकल जाते हैं गौर करने की बात है किसके सर्कुलर में स्पष्ट रूप से लिखा हुआ है किया उसी को मिलेगा जिसके पास अपना जमीन होगा और वह ब्लॉक से आए पदाधिकारी अपने सर्वे रिपोर्ट में यह लिख देते हैं की इस दिव्यांग को मैंने सत्यापित किया और यह सही पाया गया लेकिन इनके पास जमीन नहीं है इसलिए इसे जमीन और मकान दोनों उपलब्ध कराई जाए दिव्यांग खुश हो जाते हैं कि चलो मेरा वेरिफिकेशन हो गया अब मुझे इस आवास योजना का लाभ मिल पाएगा और पदाधिकारी बड़ी चालाकी से दिव्यांगों को मूर्ख बना कर वहां से निकल जाते हैं यह कब तक चलता रहेगा दिव्यांग समाज में जैसे ही वह लिखते हैं कि इस दिव्यांग को जमीन और मकान दोनों उपलब्ध कराया जाए वैसे ही उनका आवेदन अयोग्य घोषित हो जाता है नियंता दिव्यांग आशान्वित हो जाते हैं और बेवकूफ बनाकर और पदाधिकारी वहां से निकल जाते हैं और साथ ही साथ वह सरकार को यह भी बता देते हैं कि हमने अपना सर्वे किया अपने जवाबदेही का निर्वहन किया लेकिन वह उसके लिए अयोग्य था क्योंकि उसके पास जमीन नहीं था वही उनकी रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो जाता है कि इस दिव्यांग को नहीं देना है वही हमारा दिव्यांग समाज मूर्खों की तरह उसके लिए आशान्वित रहता है लेकिन एक बहुत बड़ा सवाल पूरे समाज के सामने उत्पन्न होता है कि जिसके पास 3200000 रुपए समान तोड़ से उपलब्ध होंगे वही तो जमीन खरीद सकता है शहरों में और क्या 32 लाख का जमीन खरीदने वाला व्यक्ति गरीब हो सकता है तो यह आवास योजना जो गरीबों को आशियाना देने वाला है वह कितने गरीबों को आशियाना दे पाएगा एक बड़ा सवाल उत्पन्न होता है इसलिए पूरे दिव्यांग समाज को 21वीं सदी का जो नारा है नॉलेज इज द पावर उसे आत्मसात करने की आवश्यकता है ताकि कोई भी बिचौलिए आपकी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाए और दूसरी बात यह है की आप अपने अधिकार के प्रति आज सभी दिव्यांगों को जागरूक होने की आवश्यकता है और सरकार को अविलंब इस पॉलिसी को परिवर्तित करने की आवश्यकता है ताकी सही मायने में दिव्यांगों का कल्याण हो सके मान लीजिए की किसी समय किसी दिव्यांग का या पास भी हो जाता है तो चार अलॉटमेंट पर यह पैसे उन्हें मिल पाते हैं एक बार में जो ब्लॉक के पदाधिकारी उन्हें यह पैसे प्रदान करते हैं कुल पैसे में से ₹5000 अपने कमीशन के रूप में रख लेते हैं यह कहां तक जायज है इसीलिए आज पूरे समाज को अन्याय के प्रति आवाज उठाने की आवश्यकता है और सरकार को भी इस विशेष बल देने की आवश्यकता है ताकि समाज में इस प्रकार का जो अत्याचार खुलेआम पदाधिकारियों के द्वारा चलाए जा रहा है वह बंद किया जाए।

 

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