सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : दिव्यांगों को जानना चाहिए अपने मानहानि का अधिकार मानहानि कितने प्रकार की होती है 1. अपलेखा(Libel):- अपलेख के अंतर्गत कथन का किसी स्थायी एवं दिखाई देने वाले रूप में प्रकाशन किया जाता है जैसे लिखा हुआ, छापा हुआ, चित्र, फोटो, सिनेमा, फिल्म, कार्टून या व्यंग्य चित्र, पुतला या किसी के दरवाजे पर कुछ लिखकर चिपकाना ऐसे ही रूप में होना चाहिए।यह कहा जाता है अपलेख आंखों को सम्बोधित किया जाता है। इस प्रकार बोलने वाली फिल्म में मानहानिकारक विषय आपलेख होता है। 2.अपवचना(slander)-किसी व्यक्ति के प्रति मानहानिकारक वचन के प्रयोग को अपवचन कहते है।सामान्य रूप से अपवचन मौखिक शब्दों, संकेतों अथवा अव्यक्त ध्वनियों द्वारा किया जाता हैं।एवं अपवचन कानों को संबोधित किया जाता हैं।भारतीय दण्ड संहिता में अपनेख एवं अपवचन दोनों प्रकार मानहानि को दंडनीय अपराध माना है। मानहानि का मामला किस धारा के तहत दर्ज होता है भारतीय दण्ड संहिता की धारा 499 के अनुसार जो कोई बोले गए या पढे जाने के लिये आशयित शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा या दृष्यम्पनी द्वारा किसी व्यक्ति के बारे में कोई लाशन इस आशय सो लगता या प्रकाशित करता है कि ऐसी लाशन से ऐसे व्यक्ति की ख्याति की अपहानि की जाये या जानते हुए या विश्वास करने का कारण रखते हुए समता या प्रकाटित करता है कि ऐसी व्यक्ति की ख्याति की अपहानि होगी। वह उस व्यक्ति की मानहानि कर धारा 500 में दंड का प्रावधान दिया गया है। जो कोई किसी अन्य व्यक्ति की मानहानि करेगा वह सादा कारावास जिसकी अवधि दो वर्ष हो या जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जाएगा। मानहानि का अपराध अजेय तथा जमानतीय होता है जिसका विचारण सरन्यायालय द्वारा किया जाएगा। दिव्यांग लोग इस धारा के तहत मानहानि का केस दर्जज करवा सकते हैं
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