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दिव्यांगों के लिए प्रतियोगिता परीक्षा में लेखक प्रावधान।

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : भारत सरकार की तरफ से एक ऑफिस मेमोरेंडम यानी कार्यालय ज्ञापन जारी किया गया है 1 अगस्त 2025 को जिसमें उन्होंने जो स्क्राइबर और एक्स्ट्रा टाइम से रिलेटेड नियम थे उसमें काफी सारे परिवर्तन किए हैं। तो जितने दिव्यांग भाई बहन ऐसे हैं जिनको स्क्राइबर की जरूरत होती है या एक्स्ट्रा टाइम की जरूरत होती है उनके लिए यह वीडियो बहुत ज्यादाेंट होने वाला है। इसमें ये 13 पेज का पूरा पीडीएफ है। इसमें क्या-क्या बातें लिखी गई है। दिव्यांग जनों के लिए और स्क्राइबर से रिलेटेड क्या-क्या रूल्स चेंज हुए हैं। एक्स्ट्रा टाइम से रिलेटेड क्या-क्या रूल्स चेंज हुए हैं। यह सारी बातें मैं इसमें बताऊंगा। जहां पर इसमें सरकार ने अच्छा काम किया है दिव्यांग जनों के लिए वहां पर सरकार की तारीफ की जाएगी और जहां पर दिव्यांग जनों के हित में सरकार ने अच्छा काम नहीं किया है इस पीडीएफ में तो वहां पर सरकार से सवाल भी पूछा जाएगा और उसका जवाब भी मांगा जाएगा। इस वीडियो को उन दिव्यांग भाई बहनों को भी जरूर देखना चाहिए जो केवल कमेंट में उल्टी सीधी कमेंट करने आते हैं। तो आप भी इस वीडियो को जरूर देखो। आपको पॉइंट टू पॉइंट हर बातें बताऊंगा क्योंकि आप एक ही पक्ष की बात करते हो। दोनों पक्ष की बातें सुनो और उसके बाद में क्या कंक्लूजन निकलता है उसके बाद में कमेंट करना। शुरू में थंबनेल देखकर ही कमेंट करने से अच्छा है कि आप पहले उसको एनालिसिस करो समझो तब जाके कमेंट करो। दोस्तों इस मेमोरेंडम का पूरा एनालिसिस करूंगा और इसके बारे में जहां पर सवाल पूछने वाला है सवाल भी पूछूंगा। यहां पर तारीफ करने वाली है तारीफ भी करूंगा। इसलिए आप इस वीडियो में जरूर बने रहना। और जितने भाई बहनों ने एसबीआई क्लर्क या आईबीपीएस क्लर्क का फॉर्म फिल किया है वो जरूर यहां पर ध्यान देना क्योंकि जब से ये 1 अगस्त 2025 से यह भारत सरकार का मेमोरेंडम सर्कुलेट हुआ है। तो एसबीआई क्लर्क वगैरह में और आईबीपीएस क्लर्क वगैरह ने भी अपने नियम में बदलाव करना शुरू कर दिया है। बिल्कुल इसी मेमोरेंडम के तहत वो अब उन्होंने अपने नियम भी बना दिए हैं। तो इसलिए आपको देखना जरूरी है। दोस्तों सबसे पहले तो मैं आपको बता दूं जो यह नियम है वो केवल नौकरियों और पेशेवर पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए जो होने वाली प्रतियोगी परीक्षाएं हैं उन पर ही लागू होंगे। इसके अलावा यह जो नियमित स्कूल, बोर्ड, कॉलेज, विश्वविद्यालय की जो शैक्षणिक परीक्षाएं हैं उन पर यह नियम अभी लागू नहीं होंगे। तो ये केवल कंपटीशन की जो परीक्षाएं होती हैं या पेशेवर पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए जो परीक्षाएं होती हैं प्रतियोगी परीक्षाएं उन पर ही अभी लागू होंगे। दोस्तों इन नियम की मुझे सबसे अच्छी बात तो यह लगी जहां पर तारीफ करने वाली चीज है और जो अच्छी बात लगी वो भी देख लो यहां पर अब आपको अगर्राइबर या टाइम की जरूरत है और आपको लिखने में लिमिटेशन है तो आप इसमें ले सकते हो। यहां पर परसेंटेज की कोई जरूरत नहीं है। आपका प्रतिशत कितना भी हो, दिव्यांगता प्रमाण पत्र कितना भी हो, और किसी भी कैटेगरी में हो, मान लीजिए आप दृष्टिबाधित है तो आपको पढ़ने लिखने में दिक्कत हो रही है। आप बौद्धिक दिव्यांगता के कारण आपको समझने या अभिव्यक्त करने में दिक्कत हो रही है या कोई और डिसेबिलिटी है ऐसी जिनको फंक्शनल डिसेबिलिटी है मतलब उनको लिखने की लिमिटेशन है। फंक्शनल लिमिटेशन है उनको वो लिखने में उनको दिक्कत आ रही है तो वो स्क्राइबर ले सकते हैं। यहां पर परसेंटेज के कोई मायने नहीं है। अगर आपको लिखने में दिक्कत हो रही है तो आप स्क्राइबर या एक्स्ट्रा टाइम ले सकते हैं। दूसरी चीज़ यहां पर यह अच्छी है कि जो ऐसे दिव्यांग भाई बहन हैं जो दृष्टिबाधित है या गति विषयक दिव्यांगता यानी दोनों हाथों में उनके दिक्कत है। दोनों हाथ प्रॉब्लम है या सीपी वाले हैं तो उनको यहां पर स्क्राइबर और एक्स्ट्रा टाइम यूडीआईडी के बेस पर ही मिल जाएगा। मतलब आपके डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट के बेस पर ही मिल जाएगा। आपको किसी प्रकार का कोई अपेंडिक्स या परिशिष्ट नहीं बनवाना है। कोई अपेंडिक्स वगैरह आपको नहीं बनवाना पड़ेगा। लेकिन इन तीनों कैटेगरी के अलावा टोटली ब्लाइंड या लोज़न और दृष्टिबाधित कह दीजिए दृष्टिबाधित या बोध आर्म या सीपी के अलावा और जो दिव्यांग है और वह अगर स्क्राइबर या एक्स्ट्रा टाइम चाहते हैं तो उनको यहां पर अपेंडिक्स बनवाना होगा। वो भी चीफ मेडिकल या सुपरिटेंडेंट इस तरीके से आपको बनवाना होगा। वो मैं आगे अभी आपको दिखाऊंगा। सभी ऐसे दिव्यांग भाई बहन जो अपने से स्क्राइबर लेंगे तो उनको अपेंडिक्स टू भरकर अपलोड करना हुआ करेगा। आपसे स्क्राइबर की डिटेल मांगी जाएगी। तो उसके लिए अलग से लिंक आया करेगा। उस लिंक पर आपको अपने स्क्राइबर की डिटेल अपलोड करनी होगी अपेंडिक्स टू में भरकर। वो अपेंडिक्स में मैं अभी आपको दिखाऊंगा। बाकी जहां पर आप अपने से स्क्राइबर नहीं लेंगे बोर्ड की तरफ से स्क्राइबर लेंगे तो वहां पर एग्जाम से 1 घंटा पहले 20 मिनट के लिए आपको आपके स्क्राइबर से मिलाया जाएगा। उससे आप अपना संवाद कर सकते हैं। अब दोस्तों देखो सबसे इंपॉर्टेंट चीज यहां पर आती है कि अगर आप आईटीआई जेईई या नीट कैट सीएलएटी या इसके अलावा यूजीसी नेट गेट या सीयूईटी आदि जैसे स्नातक परा स्नातक यानी ग्रेजुएशन पोस्ट ग्रेजुएशन या केंद्र सरकार द्वारा जितनी भर्ती निकलती है वो या एसएससी वगैरह सिविल सर्विस वगैरह की जो भर्तियां होती है एनडीए वगैरह की इन सबके लिए अगर आपको स्क्राइबर चाहिए तो यहां पर अगर आप चाहे तो सेंटर पर अगर आपके लिए फैसिलिटी है वहां पर लैपटॉप डेस्कटॉप ब्रेल या लार्ज प्रिंट रिकॉर्डर डिवाइस वगैरह की अच्छी फैसिलिटी है तो आप स्वयं से भी अपना एग्जाम दे सकते हो। अभी मैं इसके ऊपर बात करूंगा कि कहां पर दिव्यांग जनों को दिक्कत आने वाली है कहां पर नहीं ये चीज समझना। अभी मैं आपको पॉजिटिव चीजें बता रहा हूं और इसमें क्या-क्या दिव्यांग जनों को दिक्कत आने वाली है उसके ऊपर भी मैं बात करूंगा। अब अगर आप स्वयं का स्क्राइबर लेना चाहते, आप नहीं चाहते कि आप लैपटॉप वगैरह से अभी आप इतना एक्सपीरियंस नहीं है, आप दे पाएंगे, तो आप अपना स्क्राइबर ले जाना चाहते हैं। तो अपना स्क्राइबर ले जाने के लिए अगर आपने पोस्ट ग्रेजुएशन लेवल की किसी भर्ती के लिए अप्लाई किया तो वहां पर आप बीए थर्ड सेमेस्टर में पढ़ने वाले बच्चे को ले सकते हैं या सेकंड या फर्स्ट सेमेस्टर में पढ़ने वाले को ले सकते हैं। लेकिन अगर आप कहे कि वहां पर 12th का आप ले सकते हैं तो आपको यह मान्य नहीं किया जाएगा। आप नहीं ले सकते। अब इसी तरीके से अगर आपने किसी ऐसे एग्जाम के लिए अप्लाई किया जिसमें केवल और केवल ग्रेजुएशन मांगा गया है तो आपका स्क्राइबर या तो ग्रेजुएशन के फर्स्ट सेमेस्टर में है तो आप उसको ले सकते हो या वो अगर 12th में है तो आप उसको ले सकते हो 12th से नीचे का नहीं ले सकते हो अगर आपने ग्रेजुएशन लेवल वाली पोस्ट के लिए अप्लाई किया है जैसे एसएससी सीजीएल है तो उसमें ग्रेजुएशन मांगा जाता है तो उसमें आप बीए फर्स्ट ईयर का स्क्राइबर ले सकते हो या फिर 12th का स्क्राइबर ले सकते हो। इसी तरीके से जो 12th लेवल वाली पोस्ट होती है मतलब 12वीं पास के लिए जो पोस्ट होती है तो उसमें अगर आपने अप्लाई किया है तो उसके लिए आपको स्क्राइबर लेना है तो आपका स्क्राइबर या तो 10वीं में हो या नाइंथ में हो तो आप ले सकते हो लेकिन आप नाइंथ से नीचे का इसमें नहीं ले सकते इसी तरीके से अगर आपने कोई 10थ लेवल का डाले हैं तो एट में हो या सेवन में हो इसी तरीके से आप दो वर्ष नीचे का ले सकते हो अधिकतम वर लेकिन 3 वर्ष से नीचे का आप स्क्राइबर नहीं ले सकते हो और जो क्वालिफिकेशन मांगी गई है जिस एग्जाम में या जिस जॉब में तो उससे ऊपर का भी आप नहीं ले सकते हो। और इसके लिए एक नियम और है यहां पर कि आपको अपने स्क्राइबर का डॉक्यूमेंट्स तो दिखाना ही होगा लेकिन वो वर्तमान में जहां पर पढ़ रहा है वहां की आईडी भी वर्तमान की आपको उस स्टूडेंट की मतलब उस्राइबर की आपको दिखानी होगी। अब देखो इन सब चीजों से जितना दिव्यांग जनों के लिए नियम बनाए गए हैं सरकार की तरफ से तो इसमें कोई दिक्कत नहीं है। मेरे हिसाब से कोई भी दिक्कत नहीं है क्योंकि एक जो परीक्षा होती है वो बहुत अच्छे ढंग से होनी चाहिए फेयरनेस तरीके से होनी चाहिए क्योंकि आजकल ये सुना जाता है कि बहुत सारे फर्जी सबस्क सब्सक्राइबर हैं जो पैसा लेने के बाद में पेपर सॉल्व करते हैं तो कहीं ना कहीं इस समस्या का समाधान मिलेगा लेकिन अगर हम दूसरे एंगल से देखें तो इसमें एक बहुत बड़ी समस्या है। देखो सरकार चाहती है कि बच्चा जो परीक्षा देने जाता है वो कोई भी डिसेबल्ड हो वो अपने आप से दे। मान लीजिए अगर कोई दिव्यांग दृष्टिबाधित है या कोई और डिसेबल है जिनको स्क्राइबर की जरूरत है तो उनके लिए सेंटर पर ऐसी फैसिलिटी हो जैसे लैपटॉप हो डेस्कटॉप हो और ब्रेल बड़े प्रिंट हो या जो दिव्यांग भाई बहन ऐसे हैं जो देख नहीं पाते हैं तो उनके सुनने के लिए वहां पर जोस हो लैपटॉप में या डेस्कटॉप में जोस वगैरह हो एनबीडीए वगैरह हो इस तरीके का सरकार ने बताया है। सरकार चाहती है कि कोई भी स्टूडेंट हो दिव्यांग हो या कोई हो वो अपना पेपर स्वयं से दे। इस बात पर सरकार जोर दे रही है। तो यह सरकार की बहुत अच्छी बात है। इससे कहीं ना कहीं बच्चों को बहुत अच्छी फैसिलिटी मिलेगी और बच्चे अपने से एग्जाम दे पाएंगे। तो वो किसी पर निर्भर नहीं रहेंगे। उनको किसी की कोशिश नहीं करनी पड़ेगी क्योंकि एक स्क्राइबर लेने के लिए भी मैंने देखा है कि बहुत सारे डिसेबल दृष्टिबाधित भाई बहनों को बड़ी परेशानी होती है। वो इधर-उधर ढूंढते हैं। कई सारे लोगों का तो पेपर भी छूट जाता है। उनको स्क्राइबर नहीं मिलता इस वजह से। और कुछ इंक्राइबर ऐसे होते हैं जिनसे इस पेपर देने के लिए अगर कहा जाए तो वह पैसे की नीड करने लगते हैं। फ्री ऑफ़ कॉस्ट में नहीं करना चाहते हैं। तो किसी के पास में अगर पैसा नहीं है तो उसको दिक्कत होती है। ये सारी प्रॉब्लम है। तो इन सब चीजों से बच्चों को छुटकारा मिल जाएगा। लेकिन यहीं पर एक दूसरी प्रॉब्लम यह है कि जब सरकार के पास में इतनी अच्छी सुविधाएं ही नहीं है। सरकार ने कह तो दिया है कि 2 साल में जितने भी ये एग्जाम कंडक्ट कराने वाली कंपनियां हैं इनको सबको 2 साल के अंदर-अंदर इस तरीके के सॉफ्टवेयर को डेवलप करना चाहिए या इस तरीके के सॉफ्टवेयर अपडेट करने चाहिए और बच्चों से स्वयं ही एग्जाम दिलाने पर जोर देना चाहिए। तो ये इस तरीके से 2 साल के अंदर-अंदर क्या आपको लगता है कर पाएंगे? मुझे नहीं लगता क्योंकि ये इतनी जल्दी काम करेंगे ही नहीं। बस हां ये जरूर कर देंगे कि आपको स्क्राइबर ये लेना है और वो लेना है। ये नियम लागू कर देंगे। लेकिन एक्चुअली में क्या फैसिलिटी देनी है बच्चों को वो ये नहीं करेंगे। तो इसमें जेन्युइन दिव्यांग भाई बहन जो है जो एक अच्छे से तैयारी करके अपने से पेपर करना चाहता है या करवाना चाहता है उसको यहां पर बहुत बड़ी प्रॉब्लम होने वाली है। जब सिस्टम सही नहीं होगा उसमें आवाज सही नहीं आएगी या उसमें जोश सही से नहीं बोलेगा या उसमें क्वेश्चन अच्छे से नहीं पढ़ेगा तो इसमें एक डिसेबल्ड भाई बहन को बहुत बड़ी दिक्कत आएगी। वो कान खोल के यहां पर सुन ले जो उल्टे सीधे कमेंट करते हैं। आएगी कि नहीं आएगी? आप बताओ कि इसमें बहुत सारी दिक्कतें आने वाली है। मैंने कहा यह काम बहुत अच्छा है। अगर ऐसा हो जाए तो बहुत अच्छी चीज है। लेकिन यहां पर कम से कम अच्छे तरीके से लागू हो तभी यह चीज अच्छी है। दूसरी बात सरकार का यह कहना है कि अगर कोई बच्चा टेक्नोलॉजी के हिसाब से नहीं करना चाहता। मतलब उसको डेस्कटॉप वगैरह नहीं चलाना आता तो सरकार यह चाहती है कि उनको सेंटर से स्क्राइबर मिले। अच्छी बात है। फिर भी बच्चों को ढूंढना नहीं पड़ेगा। एग्जाम सेंटर पे जाएंगे और उनको स्क्राइबर मिल जाएगा। लेकिन क्या 2 साल के अंदर-अंदर यह पेपर कंडक्ट कराने वाली कंपनियां इतने इंक्राइबर तैयार कर देगी जो बहुत अच्छे हो। बहुत अच्छे का मेरा मतलब यह है कि एक इंक्राइबर ऐसा होना चाहिए जो उसके सामने क्वेश्चन आए वो क्वेश्चन को सही से पढ़ दे और जो कैंडिडेट हो उसको सही से समझ में आ जाए। ये नहीं कि वो क्वेश्चन को सॉल्व कर दे। सॉल्व करने की बात नहीं कर रहा हूं। वो कम से कम उस क्वेश्चन को इतने अच्छे से पढ़े। वो जिस भी लैंग्वेज में हो इंग्लिश हो, हिंदी हो या कोई लोकल लैंग्वेज हो तो उसमें बहुत अच्छे से पढ़े ताकि एटलीस्ट जो बंदा पेपर देने गया है जो कैंडिडेट स्वयं से पेपर कराने गया है उसको क्वेश्चन तो समझ आए। अगर बच्चे को क्वेश्चन ही नहीं समझ में आएगा तो वो एग्जाम करवाएगा किस तरीके से? तो ये बहुत जरूरी है कि जो सरकार ने ऑर्डर दिया है कि आप पैनल बनाओ और इस तरीके से स्क्राइबर को तैयार करो। तो मेरी राय में स्क्राइबर अगर करने हैं तैयार तो इस तरीके के स्क्राइबर होने चाहिए कि जो क्वेश्चन बहुत अच्छे से पढ़े। बच्चे के साथ में उनका व्यवहार बहुत अच्छा हो और एक दूसरे के बीच में स्क्राइबर के और बच्चे के बीच में तालमेल अच्छा रहे। मतलब उसका व्यवहार अच्छा हो और अच्छे से पढ़े तो कोई भी डिसेबल्ड ये नहीं चाहेगा कि हमको सेंटर से फैसिलिटी मिल रही है तो हम उसको ना लें। लेकिन वह फैसिलिटी मिले तभी तो और अगर मान लीजिए किसी ऐसे स्क्राइबर को बिठा दिया जाता है जो मुंह में तंबाकू लिए हैं और बॉल सही से पा नहीं रहा है। क्वेश्चन सही से पढ़ नहीं पा रहा है तो एक जो जेन्युइन दिव्यांग है उसको यहां पर बहुत बड़ी प्रॉब्लम होने वाली है। और एक चीज और है यहां पर जो 2 साल का तीन साल का यहां पर क्राइटेरिया रखा गया है तो जैसे अगर किसी ने हाई स्कूल के बेस पर अगर फॉर्म फिल किया है तो उसको अगर सेवन का बच्चा ले जाना है तो क्या इतनी टेक्नोलॉजी हो गई है या इतने बच्चे एक्सपर्ट हो गए हैं कि वो स्क्रीन पर ऑनलाइन जाकर एकदम से सही से क्वेश्चन पढ़ देगा। बिल्कुल नहीं। तो यहां पर भी बहुत सारे डिसेबल्ड भाई बहन हैं जिनको बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। अब कहने वाले तो कुछ भी कहते रहो कि तुम स्क्राइबर के पक्ष में हो, स्क्राइबर के यह हो और फर्जी स्क्राइबर का वो करवाते हो, यह करते हो, दुनिया भर की बातें जो कहता है उनको कहने दो। लेकिन यहां पर बहुत सारी दिव्यांग भाई बहनों को दिक्कत होने वाली है। मुझे इस बात से कोई ऐतराज नहीं कि दिव्यांग जन पेपर अपने आप से दें। मुझे इस बात से भी कोई ऐतराज नहीं कि दिव्यांग जनों को जो स्क्राइबर है वह सेंटर से मिले। कोई दिक्कत नहीं। बिल्कुल मिलना चाहिए। लेकिन हां परफेक्ट उस तरीके का मिलना चाहिए जो सही से क्वेश्चन पढ़े। कई बार कई सारे डिसेबल भाई बहनों के साथ में ऐसा होता है उनको इस तरीके का स्क्राइबर सेंटर पर दे दिया जाता है। जो सही से क्वेश्चन भी नहीं पढ़ पाता है। इस वजह से बहुत सारे बच्चों का एग्जाम गड़बड़ हो जाता है। फर्जी स्क्राइबर है उनको रोकना चाहिए। बिल्कुल लेकिन कम से कम स्क्राइबर बहुत अच्छे देने चाहिए जो क्वेश्चन अच्छे से पढ़ पाए। तभी दिव्यांग भाई बहन अपना पेपर अच्छे से करा पाएंगे। कुल मिलाकर सरकार का यहां पर पूरा फोकस इसी चीज पे है कि बच्चे पेपर अपने से स्वयं से करें या सेंटर का उनको स्क्राइबर मिले। बच्चे जितने भी है वो स्वयं का स्क्राइबर ना ले जा पाए। तो कोई दिक्कत नहीं है। बट उनके लिए अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए। स्क्राइबर अच्छे होने चाहिए। अगर बच्चा स्वयं से कर रहा है तो वहां पर जोस वगैरह एनबीडीए वगैरह अच्छे से काम कर रहा हो। डेस्कटॉप वगैरह अच्छे से काम कर रहा हो तभी ये नियम सही से फॉलो होगा और तभी सही से दिव्यांग जनों की समस्याएं दूर होगी। वरना तो दिव्यांग जनों के सामने बहुत बड़ी दिक्कत यहां पर आ जाएगी और इसमें एनेक्सर भी आप देख लो जो अपेंडिक्स दिए हैं यह अपेंडिक्स जो है आपको इसको भरना है जो ऐसे दिव्यांग है जो दृष्टिबाधित या बोध आर्म या सीपी की कैटेगरी में नहीं आते उनके अलावा अगर उनको एक्स्ट्रा टाइम या स्क्राइबर की जरूरत है तो वह यह वाला फॉर्म भरेंगे और इसके अलावा जिनको अपना स्क्राइबर लेना है तो वह यह वाला फॉर्म भर के सबमिट करेंगे जो भी एग्जाम आपका हुआ करेगा जहां भी आप फॉर्म फिल किया करेंगे 15 दिन के बाद आपको लिंक मिला करेगा। उस पे यह अपलोड करना होगा। तो सरकार से मेरी रिक्वेस्ट है कि अगर आपने यह कानून नियम बनाए हैं तो प्लीज इनको अच्छे से फॉलो करवाना। फॉलो इस तरीके से कि डिसेबल को परेशानी ना हो। बिल्कुल आप टेक्नोलॉजी में ले जाओ। बिल्कुल आप सेंटर का स्क्राइबर दिलवाओ लेकिन परेशानी नहीं होनी चाहिए। किसी भी डिसेबल्ड को वो अपना पेपर अच्छे से करवाए। इस तरीके का स्क्राइबर उनको मिलना चाहिए।

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