​”कानून तो बदल गया 2016 में, दिव्यांगों के हालात कब बदलेंगे?”​”एक ‘सर्टिफिकेट’ पूरे देश के लिए मान्य, फिर भी हर दफ्तर में दिव्यांगता का इम्तिहान क्यों?”

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : दिव्यांग अधिकार अधिनियम 2016 के तहत धारा 92 किसी दिव्यांग व्यक्ति के सहायक उपकरण (जैसे उसकी व्हीलचेयर, ट्राईसाइकिल, या सुनने की मशीन) को जानबूझकर तोड़ना या छीन लेना मिलेगा इंसाफ धारा 102 (निरसन और बचत) यह धारा पुराने ‘दिव्यांगजन अधिनियम 1995’ को पूरी तरह समाप्त कर इस नए और मजबूत 2016 के कानून को स्थापित करती है धारा 100 (राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति) हर राज्य सरकार को अपने राज्य की परिस्थितियों के अनुसार इस केंद्रीय कानून के तहत पूरक नियम बनाने का अधिकार है धारा 54 (अन्य राज्यों के प्रमाण पत्र की मान्यता): एक राज्य द्वारा जारी किया गया दिव्यांगता प्रमाण पत्र पूरे देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पूरी तरह मान्य होगा धारा 42 (सूचना और संचार तकनीक) सभी सरकारी वेबसाइटों और पोर्टल्स को स्क्रीन रीडर अनुकूल बनाना ताकि दृष्टिबाधित खुद फॉर्म भर सकें। समाचारों में साइन लैंग्वेज का उपयोग करना। धारा 23 (शिकायत निवारण अधिकारी) हर सरकारी विभाग में एक शिकायत अधिकारी होगा, जो दिव्यांग कर्मचारियों के साथ होने वाले भेदभाव या प्रताड़ना की जांच करेगा।“कागज़ पर ‘अधिकारों का कवच’, ज़मीन पर इंसाफ़ का इंतज़ार!”

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