सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : रेलवे का ‘काला सच’ उजागर ग्रुप डी भर्ती से कई दिव्यांग श्रेणियां बाहर, आखिर क्यों ? रेलवे भर्ती विश्लेषण पिछले 4 सालों में लगातार घट रही हैं दिव्यांगों की श्रेणियां, कौन उठाएगा आवाज ? भर्ती विश्लेषण पिछले 4 सालों में लगातार घट रही हैं दिव्यांगों की श्रेणियां, कौन उठाएगा आवाज ? हक की लड़ाई रेलवे भर्ती में दिव्यांगों की छंटनी के खिलाफ एकजुट होने का समय आप बहुत अच्छे से जानते हो कि रेलवे ग्रुप डी का फुल नोटिफिकेशन आउट हो चुका है और इसके फॉर्म भी भरे जा रहे हैं। लेकिन यहां पर आपको आज मैं एक बात बताने वाला हूं कि यहां पर दिव्यांग जनों के साथ में रेलवे बहुत अन्याय कर रहा है। रेलवे दिव्यांग जनों को बहुत बड़ा धोखा दे रहा है। रेलवे में इस बार जो नोटिफिकेशन आया है उसमें केवल और केवल कुछ दिव्यांग जन ऐसे हैं जिनको अप्लाई करने का मौका मिल रहा है। बाकी लगभग सारे दिव्यांगों को बाहर कर दिया गया है और दिव्यांग जनों के साथ में रेलवे यही खेल खेल रहा है कि धीरे-धीरे दिव्यांग जनों की कैटेगरी को कम करता जा रहा है। बहुत सारे आप में से दिव्यांग साथी ऐसे हैं जो मुझे मैसेज करते हैं और वह पूछते हैं कि क्या हम अप्लाई कर पाएंगे, क्या नहीं कर पाएंगे। तो मैं आपको बता दूं कि कौन-कौन अप्लाई कर पाएगा और कौन नहीं कर पाएगा। यह आप अभी ध्यान से देख लो। आप लोग बार-बार परेशान होते हो। फिर मैं आपको बताऊंगा रेलवे का काला सच कि रेलवे क्या कर रहा है। दोस्तों इस बार का जो रेलवे ग्रुप डी का नोटिफिकेशन आया है उसके पेज नंबर 57 पर जब आप जाएंगे तो आपको यहां पर पता चलेगा कि सभी पोस्ट के लिए जितनी भी रेलवे ग्रुप डी में आती है अलग-अलग तो उनके लिए अगर हम वीएच वालों की बात करें मतलब विजुअली हैंडीकैप की तो उसमें केवल लो विज़न के लिए इन्होंने बताया है। इस बार जो टोटली ब्लाइंड है मतलब जो पूर्ण रूप से दृष्टिबाधित है उनको भी यहां पर जगह नहीं दी गई है। मतलब उनको भी बाहर कर दिया गया है। अगर किसी प्रकार का करेक्शन होगा तो मैं बता दूंगा। फिलहाल जो टोटली ब्लाइंड है वह भी अप्लाई नहीं कर सकते। से केवल लो विज़न वाले अप्लाई कर सकते हैं। एचआई कैटेगरी में डेफ एचएच वाले अप्लाई कर सकते हैं। लोकोमोटर डिसेबिलिटी में अगर मैं बात करूं तो केवल जिनके एक पैर में दिक्कत है या एलसी डीडब्ल्यू एवी एचडी एसआई वाले हैं वो ही अप्लाई कर सकते हैं। इनके अलावा कौन नहीं अप्लाई कर सकता यह भी देख लो। अगर आपके दोनों पैरों में दिक्कत है तो आप अप्लाई नहीं कर सकते। अगर आपके एक हाथ में दिक्कत है तो आप अप्लाई नहीं कर सकते। अगर आपके एक हाथ और एक पैर में दिक्कत है तो आप अप्लाई नहीं कर सकते। अगर आपके दोनों हाथों में दिक्कत है तो आप भी अप्लाई नहीं कर सकते। इसके अलावा और भी डिसेबिलिटी जितनी ओए में आती है वो कोई भी अप्लाई नहीं कर सकते। इसी तरीके से अगर आप में कोई अदर डिसेबिलिटी है जैसे स्पीच से रिलेटेड है या इंटेलेक्चुअल डिसेबिलिटी है या आईडी है वह भी अप्लाई नहीं कर सकते। मल्टीपल डिसेबल्ड वही अप्लाई कर सकते हैं जो एचआई के साथ में ओएल है या एलसीडी है या लो विज़न के साथ में ओएल या एलसीडी इनमें से अगर कोई है तो वह मल्टीपल में अप्लाई कर सकते हैं वरना कोई भी अप्लाई नहीं कर सकता। अब आप सोचिए कि केवल और केवल लोविज़ डेफ एचएच और ओएल एचसी डीड डब्ल्यू ए एवी इतनी कैटेगरी अप्लाई कर सकते हैं। बाकी अगर आप देखेंगे तो कितनी सारी दिव्यांग कैटेगरी है जो इसमें बाहर कर दी गई है। अब आप देख रहे हो रेलवे की एक चाल है। रेलवे जब भी नोटिफिकेशन निकालता है तो उसमें किसी ना किसी कैटेगरी को वो कम कर देता है। जैसे पिछली बार का जो नोटिफिकेशन आया था उसमें टोटली ब्लाइंड और लोविज़न को लिया गया था। लेकिन इस बार ब्लाइंड को बाहर कर दिया गया है। ठीक है? इसी तरीके से इससे पहले दो चार साल पहले जब रेलवे ग्रुप डी के फॉर्म आते थे तो उसमें बोध ले, वन आर्म और एक बार तो बोध आर्म और इसके अलावा ओए एएल इन सबको भी लिया गया था। लेकिन पिछले तीन-4 सालों से रेलवे ग्रुप डी में लगभग सभी दिव्यांगों को बाहर कर दिया गया है। बस कुछ कैटेगरी है जिनको इसमें लिया जा रहा है। जिन डिसेबल को आवश्यकता है जॉब में उनको वो जॉब नहीं दे रहा है और दिव्यांगों की कैटेगरी को धीरे-धीरे कम करता चला जा रहा है। और दोस्तों आपने एक बात और सोची होगी कि दिव्यांग जनों के हक में कोई भी आवाज उठाने वाला नहीं है। कोई भी हो कोई संस्था हो या कोई ऐसा काम करने वाला हो जो दिव्यांगों की कैटेगरी में काम करते हैं या जितने भी विभाग बने हैं दिव्यांगों से रिलेटेड या जो बड़ी-बड़ी बातें करते हैं दिव्यांगों से रिलेटेड वो कोई भी आवाज यहां पर नहीं उठाता है दिव्यांग जनों के लिए इसलिए दोस्तों आपको खुद ही खड़ा होना पड़ेगा मेरा यह बात बनाने का पर्पस यह है कि ज्यादा से ज्यादा दिव्यांगों के पास में यह वीडियो जाए और ज्यादा से ज्यादा दिव्यांग जागरूक हो और जिस तरीके से आवाज उठा सकते हैं।
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