सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार :दिव्यांगों के लिए बिल्कुल निःशुल्क काम करने वाले तोशियास सचिव ने बताया कि आज बहुत जरूरी है कि हर एक कोर्ट में लॉ मिनिस्टर का एक ऑब्जर्वर रहे। लोअर कोर्ट कितने बजे बैठ रही है? कोई कोई ऐसी कोर्ट हैं जो एक बजे बैठ रही, दो बजे बैठ रही हैं, बैठ ही नहीं रही हैं तो कोई रिपोर्ट तो जानी चाहिए। आज हमारे यहां कोलिजियम सिस्टम है तो मतलब जज ही जज को न्यूड करेंगे। पर आज आप मुझे बताइए सुप्रीम कोर्ट के ऑनरेबल जजेस जो हैं, वह साढ़े दस बजे से लेकर चार बजे तक तो कोर्ट में अपनी हियरिंग करते हैं। उसके बाद जो जजमेंट उन्हें लिखना है, वो लिखवाते हैं। जो नेक्स्ट डे केस लगे उसकी फाइल पढ़ते हैं। आज हाई कोर्ट में किस जज ने क्या गलत किया, उसको देखने का समय क्या है और उसका मैकेनिज्म क्या है? कौन बताएगा आपको आगे? क्या मैं जाकर बता सकता हूं कि साहब मेरे साथ हाई कोर्ट या लोअर कोर्ट में बदतमीजी हो गई। एडमिनिस्ट्रेटिव साइड पर कैसे समय मिलेगा मुझे? कौन बताएगा? कोई मैकेनिज्म ही नहीं है और यह इसीलिए काम एग्जीक्यूटिव का था कि वो देखें इसको। वो देखें लोअर कोर्ट में क्या हो रहा है। सबसे इंपॉर्टेंट हमारा पहलू है लोअर कोर्ट। कितने सिविल केस डिसाइड हुए, कितने क्रिमिनल केस डिसाइड हुए। हाई कोर्ट में अगर आज कॉज लिस्ट में दो सौ केस लगे थे, उसमें से कितनों पर निर्णय हुआ, कितने केस टेकअप हुए? आज ऐसी हालत है, मैं नाम नहीं लेना चाहता हूं जहां पर फ्रेश केस ही नहीं खत्म हो पा रहे हैं। अगर फ्रेश मुकदमे लगे हैं बीस तो वो बीस मुकदमे ही नहीं खत्म हो पा रहे हैं। उसमें भी बैकलॉग फ्रेश है, फ्रेश का भी बैकलॉग है तो आप लिस्ट तक तो पहुंचेंगे ही नहीं। सप्लीमेंट्री और बाकी बातें तो भूल जाइए। तो यह एक बहुत बड़ी विडंबना है और इसके लिए मतलब बैठ के एक इंपॉर्टेंट सोल्यूशन निकालना पड़ेगा धारा 12 (न्याय तक पहुंच) यह धारा सरकार को”अदालती कार्यवाही के दौरान सहायता और समर्थन” प्रदान करने के लिए बाध्य करती है। ‘प्रेक्षक’ इस सहायता का सबसे उच्चतम स्वरूप होगा धारा 13 (कानूनी क्षमता) यह धारा कहती है कि सरकार दिव्यांगों को उनके अधिकारों का उपयोग करने के लिए “सपोर्ट” प्रदान करेगी। यहाँ ‘प्रेक्षक’ उस सपोर्ट सिस्टम का वॉचडॉग होगा जो यह देखेगा कि क्या अदालत में दिव्यांग व्यक्ति की बात को सही तरीके से सुना और समझा जा रहा है धारा 14 धारा 6 धारा 15 धारा 21 चूँकि वर्तमान में “प्रेक्षक”नामक पद का सीधा उल्लेख किसी धारा में नहीं है, इसलिए इसकी नियुक्ति इन दो तरीकों से हो सकती है 1. कार्यकारी आदेश (Executive Order) विधि मंत्रालय, अनुच्छेद 77 (भारत सरकार के कार्य का संचालन) के तहत एक कार्यालय ज्ञापन (OfficeMemorandum) जारी कर सकता है।2. नियम बनाना (Rule Making) RPWD अधिनियमकी धारा 101 के तहत केंद्र सरकार को नियम बनाने की शक्ति है। मंत्रालय इन नियमों में संशोधन करके “न्यायालय प्रेक्षक” के पद को परिभाषित कर सकता है।यदि विधि मंत्रालय का प्रेक्षक एक ‘वॉचडॉग’ की तरह कार्य करता है, तो यह “न्याय का लोकतंत्रीकरण” होगा। इससे दिव्यांग व्यक्ति केवल एक ‘याचिकाकर्ता’ नहीं, बल्कि एक ‘सशक्त नागरिक’ के रूप में अदालत में खड़ा हो सकेगा।
Sarvpratham News Latest Online Breaking News
