सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : वल्लत्तोल नारायण मेनन (1878-1957) आधुनिक मलयालम कविता के पथ-प्रदशंकों में से थे परंपरागत ढंग से शिक्षित एवं संस्कृति में निपुण उन्होंने वाल्मीकि रामायण और ऋग्वेद का मलयालम में अनुवाद किया यद्यपि बधिरता उनके लिए एक बाधा थी, फिर भी उन्होंने अपना सारा जीवन साहित्य और कथकली की सेवा में बिताया ‘कलामण्डलम्’ के स्थापक-तरक्षक के रूप में वे अपनी मण्डली को शांतिनिकेतन, सोवियत रूस, चीन और फ्रांस ले गए उन्होने गाधीजी को अपना ‘गुरु’माना और ब्रिटिश सरकार के पुरस्कार को अस्वीकार कर दिया उनका विभिन्न विषयो का ज्ञान एवं क्षेत्र व्यापक तथा विस्मयावह था कलाकार के रूप में वल्लत्तोल की सर्वोच्च सिद्धि यही थी कि उन्होने दिखाया कि मलयालम साहित्य क्या कर सकता है वे एक साथ ‘क्लासिसिस्ट’ और रोमांटिक थे वे साहित्य अकादेमी के सदस्य रहे 1955 में उन्हें ‘पद्मभूषण’ से सम्मानित किया गया।प्रो० बी० हृदयकुमारी मलयालम की विद्रूषी हैं । वह अंग्रेज़ी का अध्यापन करती हैं अनेक समालोचनात्मक ग्रथों की लेखिका हैं। साहित्य अकादेमी भारतीय-साहित्य के विकास के लिए कार्य करने वाली राष्ट्रीय महत्व की स्वायत्त सस्था है, जिसकी स्थापना भारत सरकार ने 1954 में की थी । इसकी नीतियाँ एक 82-सदस्यीय परिषद् द्वारा निर्धारित की जाती हैं जिसमें विभिन्न भारतीय भाषाओं, राज्यों और विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि होते हैं। साहित्य अकादेमी का प्रमुख उद्देश्य है—ऊँचे साहित्यिक प्रतिमान कायम करना, विभिन्न भारतीय भाषाओं में होने वाले साहित्यिक कार्यों को अग्रसर करना और उनका समन्वय करना, तथा उनके माध्यम से देश की सांस्कृतिक एकता का उन्नयन करना।यद्यपि भारतीय साहित्य एक है, तथापि एक भाषा के लेखक और पाठक अपने ही देश की अन्य पडोसी भाषाओ की गतिविधियों से प्राय अनभिज्ञ ही जान पड़ते हैं भारतीय पाठक भाषा और लिपि की दीवारों को लाँघकर एक-दूसरे से अधिकाधिक परिचित होकर देश की साहित्यिक विरासत की अपार विविधता और अनेकरूपता का और अधिक रसास्वादन कर सकें इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए साहित्य अकादेमी ने एक विस्तृत अनुवाद-प्रकाशन योजना हाथ में ली है इस योजना के अंतर्गत अब तक जो ग्रंथ प्रकाशित हो चुके हैं, उनकी वृहद सूची साहित्य अकादेमी के विक्रय विभाग से नि:शुल्क प्राप्त की जा सकती है ।
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