बस का पास कितने का बनता है दिव्यांगों के लिए निशुल्क तो व्हीलचेयर के लिए क्यों देना पड़ता है शुल्क बड़ा सवाल।

सर्वप्रथम न्यूज़ :सरकारी बसों में दिव्यांग जनों से सहायक उपकरण व्हीलचेयर का पैसा लेना संवैधानिक नियमों के विरुद्ध है यहां पर खुलेआम संवैधानिक नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है बस कंडक्टरों के द्वारा पिछले 4 साल के प्रयास के बाद तोशियास सचिव सौरभ कुमार ने भारत के सभी राज्यों में इस नियम को लागू करवाया है उस मेहनत का भारत का प्रत्येक दिव्यांग व्यक्ति कद्र और पालन कीजिए निवेदन है एवं बस कंडक्टरों को व्हीलचेयर का अतिरिक्त पैसा नहीं दे क्योंकि सहायक यंत्र दिव्यांगों का शरीर का एक अंग होता है यह मैं नहीं कहता दिव्यांग अधिकार अधिनियम 2016 में लिखित है और वर्णित है बहुत से लोग जो व्हीलचेयर पर निर्भर हैं वे आने-जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन पर भी निर्भर रहते हैं। अमेरिकी दिव्यांग अधिनियम (एडीए) का अनुपालन करने के लिए, सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों को विकलांग लोगों और उनके सहायक उपकरणों, जैसे मोटर चालित व्हीलचेयर के लिए उचित आवास प्रदान करने की आवश्यकता है। सार्वजनिक परिवहन में समस्याओं से बचने के लिए कुछ दिशानिर्देश हैं जिनके बारे में मोटर चालित व्हीलचेयर का उपयोग करने वालों को अवगत होना चाहिए। बस में ले जाते समय यात्री की गतिशीलता में सहायता के लिए व्हीलचेयर का उपयोग किया जाना चाहिए। इसमें तीन या अधिक पहिये होने चाहिए और व्हीलचेयर या तो बैटरी से संचालित हो सकती है या मैन्युअल रूप से संचालित हो सकती है। पावर व्हीलचेयर का आयाम 48 इंच ऊंचा और 30 इंच चौड़ा से अधिक नहीं हो सकता। आकार की सीमा तय करने का कारण यह है कि पावर व्हीलचेयर बसों के गलियारे को अवरुद्ध नहीं करती है और अन्य यात्रियों की सुरक्षा में हस्तक्षेप नहीं करती है। व्हीलचेयर का कुल वजन 600 पाउंड से अधिक नहीं होना चाहिए, लेकिन आम तौर पर परिवहन ऑपरेटर को यात्री को समायोजित करने की आवश्यकता होगी यदि बस में लिफ्ट उन्हें समायोजित कर सकती है। चूँकि कुछ व्हीलचेयर का वजन 600 पाउंड से अधिक होता है, इसलिए बस के संचालक को उपकरण और यात्री को ले जाने की आवश्यकता नहीं होती है। उदाहरण के लिए, यदि लिफ्ट अधिकतम भार 800 पाउंड संभाल सकती है, तो भले ही व्हीलचेयर इससे अधिक हो, परिवहन ऑपरेटर को तब तक यात्री को परिवहन करना होगा जब तक कि वे और व्हीलचेयर 800 पाउंड से अधिक न हो जाएं। लिफ्टों में आउटबोर्ड और इनबोर्ड फेसिंग इलेक्ट्रिक व्हीलचेयर दोनों को समायोजित किया जाना चाहिए। एक लिफ्ट जो निर्दिष्ट करती है कि उपयोगकर्ता को एक निश्चित दिशा का सामना करना होगा, एडीए नियमों के अनुरूप नहीं है। भारत में दिव्यांग अधिकार अधिनियम 2016 में भी इन सभी बातों का उल्लेख प्राप्त होता है क्योंकि दिव्यांग अधिकार अधिनियम 2016 एक अंतरराष्ट्रीय कानून है जिसे सिर्फ भारत ने अपने देश में लागू किया है साथ ही साथ भारत में इस बात पर जोड़ दिया की दिव्यांग लोगों की वैयक्तिक गतिशीलता पर कानून की क्या राय है धारा 41 (2) में वर्णित है कि संबंधित सरकार दिव्यांग लोगों की व्यक्तिगत गतिशीलता को वहनीय लागत पर प्रोत्साहन तथा छूट प्रदान करते हुए, वाहनों का पुनः संयोजन करते हुए तथा व्याक्तिगत गतिशीलता सहायता का प्रावधान करते हुए योजनाएं एवं कार्यक्रम बनायेगी भारत के सभी दिव्यांगों से यह निवेदन है कि किसी भी योजना को धरातल पर उतरने में बहुत ही परिश्रम लगता है और लगातार हम इस प्रयास में लगे हुए हैं आपसे सहयोग की कामना करते हैं इसलिए आपसे आग्रह है कि आप किसी भी बस में जाए तो व्हीलचेयर का अतिरिक्त पैसे कॉन्टैक्टर को नहीं दीजिए आपकी एक गलती के कारण पूरे समाज को संवैधानिक अधिकार से वंचित होना पड़ता है इसलिए इस तरह का सोच बनाएं हम स्वयं से प्रत्येक दिव्यांग किसी भी नियम को नहीं तोड़ेंगे और संवैधानिक अधिकार के तहत अपने सभी अधिकार लेंगे और इस स्लोगन को सत्यार्थ करें हम सुधरेंगे जग सुधरेगा जग का कल्याण कैसे होगा व्यक्ति के कल्याण से मां का मस्तक ऊंचा होगा प्यार और बलिदान से।

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