भारत में दिव्यांग अधिनियम 2016 लागू लेकिन आज भी सभी प्रतियोगिता परीक्षा में अधिनियम 1995 का ही उल्लेख किया जा रहा है और दिव्यांग शब्द के जगह पर विकलांग शब्द का ही प्रयोग किया जा रहा है इसलिए शिक्षित दिव्यांग समूह यह चाहता है किस में सुधार किया जाए ताकि हमें उचित सम्मान और अधिकार मिल सके

 

सर्वप्रथम न्यूज़ पटना: बिहार बीपीएससी असिस्टेंट इंजीनियर विज्ञापन संख्या-01-02/2019 परीक्षा में दिव्यांगों की उपेक्षा हुई है और संवैधानिक मर्यादा और दिव्यांग का अधिनियम 2016 का उल्लंघन हुआ है बिहार में जो वैकेंसी आ रही है अगर उसे देखेंगे तो  उसमें दिव्यांग श्रेणी का आरक्षण सीट का जहां भी उल्लेख होता है चाहे वह कोई भी परीक्षा हो बिहार में उसमें दिव्यांग अधिनियम 2019 का ही चर्चा मिलता है जबकि यह अधिनियम पूरे भारत में 2 साल पहले बदल दिया गया है और उसकी जगह पर अधिनियम 2016 का उल्लेख करने के लिए कहा गया था सभी विभाग को लेकिन आज भी 2016 अधिनियम का उल्लेख नहीं मिलकर 1995 अधिनियम का उल्लेख उसमें मिलता है वही उस आरक्षण में दिव्यांग शब्द के जगह पर विकलांग शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है इससे यह स्पष्ट हो गया कि भारत सरकार और बिहार सरकार दोनों के आदेश का पालन नहीं हो पाया है और नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है प्रतियोगिता परीक्षा में जो  आरक्षण की जानकारी दिव्यांगों को दी जाती है उसमें और इतनी बड़ी चूक पर भी विभाग खामोश बैठा है इसलिए बिहार के दिव्यांग समाज का य निवेदन है कि इस गलती को सुधारा जाए जिससे कि दिव्यांग अभ्यर्थियों को अपना मौलिक अधिकार और उचित सम्मान मिल पाए यह एक प्रतियोगिता परीक्षा की बात नहीं बल्कि बिहार में जितने भी प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित किए जा रहे हैं सभी में यह त्रुटि पाई जा रही है इसे जल्द से जल्द सुधारा जाऐ एक बहुत ही जानकारी पूर्ण बात मैं आपको बताने जा रहा हूं जब भी कोई वैकेंसी निकलती है तो आरक्षण के लिए रोस्टर नियम का पालन होता है अधिनियम को देखा जाता है और तब उसके अनुसार सीटों का निर्धारण होता है तो यह बात स्पष्ट हो गया है की बिहार के किसी भी प्रतियोगिता परीक्षा में इस नियम का पालन नहीं किया जा रहा और संवैधानिक मर्यादा का उल्लंघन किया जा रहा है जिसे सबसे अधिक आरक्षण की आवश्यकता है उसे ही आरक्षण से वंचित रखा जा रहा है बिहार के दिव्यांग समाज यह जानना चाहते हैं  क्यों

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