बिहार राज्य कृषि योजनाएँ : 2016-17

सर्वप्रथम न्यूज़ आदित्य राज पटना:-

भूमिका

बिहार कृषि निदेशालय, कृषि विभाग बिहार सरकार के द्वारा वित्तीय वर्ष 2016-17 में राज्य व केन्द्रीय स्तरीय संचालित योजनाएँ इस प्रकार हैं

राज्य प्रायोजित योजना

अनुदानित दर पर बीज वितरण

इस योजनान्तर्गत भारत सरकार के नये दिशा-निर्देश के आलोक में नवीनतम प्रभेद के बीज की पहुंच ग्रामीण क्षेत्रों में करने हेतु धान एवं गेहूँ के 10 वर्षो से कम अवधि के प्रभेद के बीज पर अनुदान अनुमान्य किया गया है, जबकि दलहन एव तेलहन फसलों हेतु 15 वर्षो से कम अवधि के प्रभेद के बीज पर अनुदान अनुमान्य किया गया है।

राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्रों में बीज उत्पादन

राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्र पर खरीफ में धान, बाजरा, मड़ुआ, अरहर, जूट, मूँग, लोबिया, मूँगफली तथा सोयाबीन, रबी में गेहूँ, जई, चना, मसूर, मटर, राई/सरसों और तीसी एवं गरमा मौसम में मूँग, उरद और तिल के बीज उत्पादन हेतु राशि कर्णांकित की गई है। प्रक्षेत्रों के स्थानीय उपयुक्तता एवं परिस्थिति के अनुसार फसलवार आच्छादन लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री तीव्र बीज विस्तार कार्यक्रम

योजना का उद्देष्य राज्य के सभी राजस्व गाँवो में एक साथ उन्नत प्रभेदों के बीज उपलब्ध कराकर बीज उत्पादन हेतु किसानों को प्रोत्साहित करना है। आधार बीज का वितरण सभी जिला एवं प्रखंड मुख्यालयों में शिविर आयोजित कर किया जाता है। बीज वितरण के समय ही सभी चयनित किसानों को प्रखंड स्तर पर बोजोत्पादन का प्रशिक्षण दिया जाता है।

बीज ग्राम योजना

इस योजना का कार्यान्वयन वर्ष 2007-08 से किया जा रहा है। योजनान्तर्गत किसानों को धान एवं गेहूँ फसल हेतु 50 प्रतिशत अनुदान पर आधार/प्रमाणित बीज तथा दलहन एवं तेलहन फसल हेतु 60 प्रतिशत अनुदान पर आधार/प्रमाणित बीज उपलब्ध कराया जाता है। किसानों को बीज उत्पादन हेतु तीन स्तरों पर (बोआई से पूर्व, फसल के मध्य अवस्था में एवं कटाई से पूर्व) प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रत्येक बीज ग्राम हेतु अधिकतम 100 किसानों का चयन किया जाता है। चयनित किसानों को एक एकड़ क्षेत्र के लिए चिन्हित फसलों के बीज उपलब्ध कराया जाता है।

एकीकृत बीज ग्राम योजना

एकीकृत बीज ग्राम की स्थापना हेतु गया, नालन्दा, बक्सर, रोहतास, कैमूर, भोजपुर, औरंगाबाद, कटिहार एवं पूर्णिया जिले के चिन्हित गाँव में किया जाना है, जिसमें किसानों को 60 प्रतिशत अनुदान पर दलहन एवं तेलहन फसलों के आधार/प्रमाणित बीज तथा अन्य फसलों के बीज 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराया जाता है। स्थापित एकीकृत बीज ग्राम को पांच वर्षो तक सहायता प्रदान की जाती है।

धान की मिनीकीट योजना

केन्द्र प्रायोजित योजनान्तर्गत मिनीकीट बीज चयनित कृषकों के बीच 80 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराया जाता है। इसके अन्तर्गत 5 से 10 वर्षों के विकसित प्रभेदों को राज्य के चयनित क्षेत्रों में वितरित कर उसके फलाफल को देखा जाता है कि यह प्रभेद किस क्षेत्र के लिए उपयुक्त है। इसमें आधे एकड़ के लिए बाढ़ एवं सुखाड़ रोधी धान के प्रभेद क्रमशः स्वर्णा सब-1 तथा सहभागी/सम्पदा प्रभेद के 6 किलो प्रमाणित बीज पैकेट कृषकों को उपलब्ध कराया जाता है।

बिहार राज्य बीज निगम का सुदृढ़ीकरण

राज्य के विभिन्न स्थानों में भंडारण क्षमता बढ़ाने हेतु बिहार राज्य बीज निगम अंतर्गत बीज गोदाम के निर्माण तथा कुदरा एवं शेरघाटी में अतिरिक्त प्रसंस्करण की स्थापना के लिए भवन निर्माण राज्य योजना से किया जा रहा है।

बिहार राज्य बीज प्रमाणन एजेंसी को सहायक अनुदान

बिहार राज्य बीज प्रमाणन एजेंसी को सहायक अनुदान मद में वर्ष 2016-17 में बीज प्रमाणीकरण कार्य हेतु 448.81 लाख रुपये उपलब्ध कराया गया है। इस राषि को एजेंसी मे कार्यरत मानव बल, बीज जॉच प्रयोगशाला, डी.एन.ए. फिंगरप्रिंटग लैब, ग्रोआउट टेंस्ट फार्म, क्षेत्रीय कार्यालयों का सुदृढ़ीकरण के साथ प्रशिक्षण एवं सॉफ्टवेयर का विकास मदों में व्यय किया जाना है। सारे प्रयास राज्य में बीज की आवश्‍यकता के अनुरूप बीज प्रमाणन की क्षमता बढ़ाए जाने की दिशा में अग्रसर है। इस राशि का उपयोग कर राज्य में 35,000 (पैतिस हजार) हे0 में बीज उत्पादन का निबंधन एवं 5,15,000 (पॉच लाख पंद्रह हजार) क्विंटल प्रमाणित बीज का उत्पादन किया जाना है।

मिट्टी बीज एवं उर्वरक प्रयोगशाला के उन्नयन कार्यक्रम

सभी प्रयोगशालाओं स्थायी/चलन्त प्रयोगशाला के संचालन एवं क्रियाशीलन हेतु आवश्यक वस्तुओं एवं सामग्रियों के क्रय एवं नव चलन्त मिट्टी प्रयोगशाला के वाहन चालक के मानदेय एवं दैनिक मजदूरी के लिए व्यय तथा पटना एवं सहरसा में चलन्त मिट्टी जाँच प्रयोगशाला के निबन्धन एवं बीमा मद हेतु राशि कर्णांकित की गई है।

बीज प्रशिक्षण प्रयोगशालाओं के सफल संचालन के लिए राज्य स्तर पर बीज परीक्षण कर्मियों को उन्मुखीकरण हेतु प्रशिक्षण दिया जाना है।

गुण नियंत्रण प्रयोगशाला में सृजित पदों पर पदस्थापित कर्मियों के वेतन के साथ-साथ राज्य स्तर पर उर्वरक विश्लेषकों एवं कीट विश्लेषकों का उन्मुखीकरण हेतु प्रशिक्षण दिया जाना है।

कृषि यांत्रिकरण

44 विभिन्न प्रकार के कृषि यंत्रों पर अनुदान की व्यवस्था है, इन यंत्रों में से पावर टिलर, रोटावेटर, जिरो टिल/सीड ड्रील, कम्बाईंड हार्वेस्टर, सेल्फ प्रोपेल्डरीपर/बाईंडर, पावर थ्रेसर/मेज सेलर, स्‍ट्रॉ रीपर यंत्रों को माँग आधारित किया गया है।

कृषि यांत्रिकरण योजना में आवेदन प्राप्ति से लेकर यंत्र वितरण तक की ऑन-लाइन व्यवस्था हेतु मैकेनाइजेशन साफ्टवेयर का उपयोग किया जा रहा है। अनुसूचित जाति/जनजाति के किसानों के लिए सभी प्रकार के कृषि यंत्रों के अनुदान दर में वृद्धि की गयी है। अनुसूचित जाति/जनजाति के किसानों के हित में ट्रैक्टर के लिए न्यूनतम भू-धारिता 1 एकड़ एवं पावर टीलर के लिए 0.5 एकड़ की गई है।

किसान मेला के अतिरिक्त मेला के बाहर क्रय किये गये कृषि यंत्रों पर भी अनुदान देने का प्रावधान है।

ई-किसान भवन का निर्माण

कृषि के समग्र विकास एवं कृषकों के हित में कृषि विभाग द्वारा राज्य के सभी 534 प्रखंडों में ई-किसान भवन का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य प्रखंड स्तर पर कृषि सम्बंधी उपादानों तथा अन्य सभी तकनीकी सेवाओं को एकल खिड़की से प्रदान करना है। कुल 534 प्रखंडों में से 294 प्रखंडों में ई-किसान भवन का कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष 240 प्रखंडों में निर्माण का कार्य प्रगति में है।

टाल विकास योजना

टाल क्षेत्रों में कीट-व्याधियों के समेकित प्रबंधन एवं पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखते हुए फसल का उत्पादन बढ़ाने एवं फसल समस्या समाधान में कृषकों को आत्मनिर्भर बनाने हेतु कृषक प्रक्षेत्र पाठशाला संचालित किये जा रहे हैं।

दियारा विकास योजना

दियारा क्षेत्रों के विकास हेतु राज्य के बक्सर, भोजपुर, पटना, वैशाली, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चम्पारण, पश्चिमी चम्पारण, खगड़िया, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णियाँ, कटिहार, भागलपुर, मुंगेर, लखीसराय, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, बेगूसराय, सारण, सिवान, गोपालगंज, शिवहर एवं सीतामढ़ी कुल- 25 जिलों में दियारा विकास योजना कार्यान्वित की जाती है। इस योजना अंतर्गत गोर्डस यथा (कद्दु, नेनुआ, करेला), मेलन तथा भिंडी के हाईब्रिड बीज का वितरण 50 प्रतिशत अधिकतम 8000 (आठ हजार) रू० प्रति हे०, मटर उन्नत/हाईब्रिड बीज वितरण 50 प्रतिशत अधिकतम (तीन हजार) रू० प्रति हे० तथा किसानों को पी०भी०सी० पाईप बोरिंग हेतु लागत मूल्य का 50 प्रतिशत (100 फीट तक, 4 इंच व्यास की पाईप हेतु) अधिकतम मो॰-7,500 (सात हजार पाँच सौ) रूपये अनुदान अनुमान्य है।

किसान सलाहकार योजना

प्रत्येक पंचायत में पदस्थापित किसान सलाहकारों के मानदेय राज्य योजना से कर्णांकित की गई है।

धान की कम्यूनिटी नर्सरी विकास

राज्य योजना अंतर्गत धान के सामुदायिक नर्सरी एवं बिचड़ा विकास हेतु किसानों के लिए अनुदान की व्यवस्था की गई है। एक एकड़ में नर्सरी उगाने वाले किसानों को 6,500 रू॰ की सहायता प्रदान की जाती है तथा बिचड़ा वितरण मद में किसानों द्वारा बिचड़ा क्रय करने के विरूद्ध एक एकड़ रोपनी हेतु एक हजार रू॰ अनुदान अनुमान्य है।

धातु कोठिला का अनुदानित दर वितरण कार्यक्रम

राज्य योजना अंतर्गत अन्न भंडारण के लिए किसानों को अनुदानित दर पर धातु कोठिला वितरित किया जाता है।

जैविक खेती प्रोत्साहन योजना

वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन में वृद्धि के लिए किसानों को 75 घन फीट क्षमता के स्थायी/अर्द्धस्थायी उत्पादन इकाई पर मूल्य का 50 प्रतिशत अधिकतम 3000 रू0 प्रति इकाई की दर से अनुदान देने का प्रावधान है। एक किसान अधिक से अधिक 05 इकाई के लिए अनुदान का लाभ ले सकते हैं। इसके अतिरिक्त व्यावसायिक स्तर पर वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उद्यमी/सरकारी प्रतिष्ठानों को सहायता का प्रावधान है। वर्मी कम्पोस्ट वितरण में मूल्य का 50 प्रतिशत अधिकतम 300 रू0/क्विं0 की दर से अधिकतम 02 हेक्टेयर के लिए अनुदान का प्रावधान किया गया है। व्यवसायिक स्तर पर वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन इकाई की स्थापना हेतु निजी उद्यमी को प्रतिवर्ष 1000, 2000 एवं 3000 मे0 टन प्रतिवर्ष उत्पादन क्षमता के लिए लागत मूल्य का 40 प्रतिशत अधिकतम 6.40, 12.80 एवं 20.00 लाख रूपये क्रमशः अनुदान देने का प्रावधान किया गया है, जो पॉच किस्तों में प्रतिवर्ष उत्पादन क्षमता का कम-से-कम 50 प्रतिशत उत्पादन करने के उपरांत देय होगा अर्थात् कुल अनुदान राशि का प्रथम वर्ष में 30 प्रतिशत, द्वितीय वर्ष में 20 प्रतिशत, तृतीय वर्ष में 20 प्रतिशत, चतुर्थ वर्ष में 15 प्रतिशत एवं पंचम वर्ष में 15 प्रतिशत अनुदान राशि देने का प्रावधान किया गया है। सरकारी प्रतिष्ठानों को प्रतिवर्ष 1000, 2000 एवं 3000 मे0 टन प्रतिवर्ष उत्पादन क्षमता के लिए लागत मूल्य का शत्-प्रतिशत अधिकतम 16.00 32.00 एवं 50.00 लाख रूपये क्रमशः अनुदान देने का प्रावधान है।

जैव उर्वरक पोषक तत्वों को जमीन में स्थिर करने तथा इसे पौधों को उपलब्ध कराने में उपयोगी है। इस कार्यक्रम अन्तर्गत

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