दत्तक-ग्रहण मार्गदर्शक सिद्धांत,2015: एक परिचय..!

सर्वप्रथम न्यूज़ आदित्य राज पटना:-

दत्तक-ग्रहण मार्गदर्शक सिद्धांत : परिचय

(क)  किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2000 और उसके अधीन विरचित नियम;दत्तक ग्रहण

(ख)  स्टीफेनी जॉन बेकर बनाम राज्य और अन्य (वर्ष 2013 की सिविल अपील संख्या 1053) के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय का तारीख 08.02.2013 का निर्णय;

(ग)    वर्ष 1982 की रिट याचिका (दांडित) संख्या 1171 में एल. के पांडे बनाम भारत सरकार के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय का निर्णय;

(घ)   बालक के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय, 1989;

(ङ)    बालक संरक्षण और अंतर-देशीय दत्तक-ग्रहण की बाबत सहयोग पर हेग अभिसमय, 1993 ।

(2) ये मार्गदर्शक सिद्धांत अधिसूचना की तारीख से देश में अनाथ, परित्यक्त या अभ्यर्पित बालकों के दत्तक-ग्रहण की प्रक्रिया को शासित करेंगे और बालकों के दत्तक – ग्रहण को शासित करने वाले मार्गदर्शक सिद्धांत, 2011 को प्रतिस्थापित करेंगे ।

बालकों के दत्तक-ग्रहण को शासित करने वाले मार्गदर्शक सिद्धांत, 2015

 

आरंभिक

 

संक्षिप्त नाम और प्रारंभ

(1)   इन मार्गदर्शक सिद्धांतों को ‘बालकों के दत्तक-ग्रहण को शासित करने वाले मार्गदर्शक सिद्धांत, 2015’ कहा जाएगा ।

(2)   ये 01 अगस्त, 2015 को प्रवृत्त होंगे ।

परिभाषाएं

 

 

(1) “अधिनियम” से किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2000 अभिप्रेत है;

(2) “परित्यक्त” से ऐसा संगहीन या अभित्यक्त बालक अभिप्रेत हिया जिसे बाल कल्याण समिति द्वारा सम्यक जाँच के पश्चात परित्यक्त घोषित किया गया है;

(3) “दत्तक – ग्रहण” से ऐसी प्रक्रिया अभिप्रेत है जिसके माध्यम से दत्तक बालक ऐसे सभी अधिकारों, विशेषाधिकारों और उत्तरदायित्वों के साथ अपने दत्तक माता या पिता का विधिपूर्ण पुत्र बन जाता है, जो जैव बालक से जुड़ें होते हैं;

(4) “प्राधिकृत विदेशी दत्तक-ग्रहण अभिकरण” से ऐसा कोई विदेशी सामाजिक या बाल कल्याण अभिकरण अभिप्रेत है जो उस देश के किसी नागरिक द्वारा किसी भारतीय बालक के दत्तक-ग्रहण संबंधी सभी मामलों में समन्वयन करने के लिए उस देश के संबंधित केंन्द्रीय प्राधिकरण या सरकारी विभाग की सिफारिश पर केंन्द्रीय दत्तक-ग्रहण संसाधन प्राधिकरण द्वारा प्राधिकृत है;

(5) “बालक का सर्वोत्तम हित” से बालक के संबंध में, उसके आधारिक अधिकारों और आवश्यकताओं, पहचान, सामाजिक कल्याण और शारीरिक, भावात्मक और बौद्धिक विकास के पूरा किए जाने को सुनिश्चित करने के लिए किए गए किसी विनिश्चय का आधार अभिप्रेत है;

(6) “बालक का दत्तक-ग्रहण संसाधन सूचना और मार्गदर्शक पद्धति” से दत्तक – ग्रहण कार्यक्रम को सुकर बनाने और उसकी मानीटरी करने के ली ई-गवर्नेस पद्धति अभिप्रेत है;

(7) “बाल देखरेख कॉरपस” से विशिष्ट दत्तक – ग्रहण अभिकरण द्वारा रखी जा रही कॉरपस निधि अभिप्रेत है जिसमें बाल देखरेख और दत्तक – ग्रहण संबंधी व्ययों के लिए दत्तक माता या पिता द्वारा अंशदान दिया जाता है;

(8) “केंन्द्रीय प्राधिकरण” से बाल संरक्षण और अंतर-देशीय दत्तक – ग्रहण की बाबत सहयोग पर हेग अभिसमय, 1993 के अधीन उस रूप में मान्यताप्राप्त सरकारी विभाग अभिप्रेत है;

(9) “न्यायालय” से ऐसा कोई सिविल न्यायालय अभिप्रेत है जिसे दत्तक – ग्रहण से मामलों में अधिकारिता प्राप्त है और जिसके अंतर्गत जिला न्यायालय, कुटुंब न्यायालय और नगर सिविल न्यायालय भी है;

(10) “बालक का दत्तक – ग्रहण के लिए वैध रूप से स्वतंत्र होना” से बाल कल्याण समिति द्वारा दत्तक-ग्रहण के लिए स्वतंत्र घोषित किया गया अनाथ, परित्यक्त या अभ्यर्पित बालक अभिप्रेत है;

(11) “बालक अध्ययन रिपोर्ट” से ऐसी रिपोर्ट अभिप्रेत है जिसमें अनुसूची -2 में उपबंधित फार्मेट के अनुसार बालक के जन्म की तारीख और सामाजिक पृष्ठभूमि सहित उसका ब्यौरा अंतर्विष्ट होता है;

(12) “बाल कल्याण समिति” से अधिनियम की धारा 29 के अधीन गठित समिति अभिप्रेत है;

(13) “जिला बालक संरक्षण एकक” से अधिनियम की धारा 62क के अधीन राज्य सरकार द्वारा जिला स्तर पर स्थापित एकक अभिप्रेत है;

(14) “हेग दत्तक-ग्रहण अभिसमय” से बालक संरक्षण और अंतर-देशीय दत्तक-ग्रहण की बाबत सहयोग पर हेग अभिसमय, 1993 अभिप्रेत है;

(15) “गृह अध्ययन रिपोर्ट” से दत्तक माता या पिता के ब्यौरे से युक्त ऐसी रिपोर्ट अभिप्रेत है, जिसमें उनकी सामाजिक और आर्थिक हैसियत; पारिवारिक पृष्ठभूमि; घर का विवरण; जीवन स्तर; पति या पत्नी और अन्य पारिवारिक सदस्यों के बीच ससंगतता; स्वास्थ्य की स्थिति शामिल होती है;

(16) “एकीकृत बालक संरक्षण स्कीम” से केंन्द्रीय सरकार की बालकों के संरक्षण पर राज्य सरकारों और गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से क्रियान्वित की जा रही स्कीम अभिप्रेत है;

(17) “देश के भीतर दत्तक-ग्रहण” से भारत के नागरिक द्वारा बालक का दत्तक-ग्रहण अभिप्रेत है;

(18) “अंतर-देशीय दत्तकग्रहण” से किसी विदेशी भारतीय नागरिक द्वारा या किसी विदेशी राष्ट्रिक द्वारा बालक का दत्तक – ग्रहण अभिप्रेत है;

(19) “स्वास्थ्य परीक्षा रिपोर्ट” से सम्यक रूप से अनुज्ञप्त चिकित्सक द्वारा अनुसूची – 3 में उपबंधित फार्मेट में बालक की बाबत दी गई रिपोर्ट अभिप्रेत है;

(20) “निराक्षेप प्रमाणपत्र” से केंन्द्रीय दत्तक-ग्रहण संसाधन प्राधिकरण द्वारा जारी प्रमाणपत्र अभिप्रेत हिया जिसमें बालक को विदेशी या विदेशी भारतीय नागरिक या अनिवासी भारतीय भावी दत्तक माता या पिता को दत्तक – ग्रहण में देने की अनुमति दी गई है;

(21) “अनिवासी भारतीय” से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसके पास भारतीय पासपोर्ट है और वर्तमान में एक से अधिक वर्ष से विदेश में रह रहा है;

(22) “विदेशी भारतीय नागरिक” से नागरिकता अधिनियम, 1955 (1955 का 57) की धारा 7 (क) के अधीन उस रूप में रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति अभिप्रेत है; (टिप्पण: भारतीय मूल के ऐसे सभी विद्यमान कार्डधारक व्यक्ति जो भारत सरकार के गृह मंत्रालय की अधिसूचना संख्या 26011/4/98-एफ.I, तारीख 19 अगस्त, 2002 के अधीन उस रूप में रजिस्ट्रीकृत हैं, गृह मंत्रालय की अधिसूचना संख्या 26011/01/2014-आई.सी. I, तारीख 09 जनवरी, 2015 के अनुसार कार्डधारक विदेशी भारतीय नागरिक माने जाएँगे । )

(23) “अनाथ” से ऐसा बालक अभिप्रेत है –

(i)  जिसके माता या पिता अथवा विधिक संरक्षक नहीं है; या

(ii) जिसके माता या पिता अथवा विधिक संरक्षक बालक की देखरेख करने का इच्छुक नहीं है या देखरेख करने में समर्थ नहीं है।

(24) “भावी दत्तक माता या पिता” से अधिनियम और इन मार्गदर्शक सिद्धांतों के उपबंधों के अधीन बालक के दत्तक-ग्रहण के लिए पात्र व्यक्ति या व्यक्तियां अभिप्रेत है;

(25) “लंबित दत्तक-ग्रहण” से दत्तक-ग्रहण मामले अभिप्रेत हैं, जो भावी दत्तक माता या पिता दत्तक-ग्रहण के लिए पहले से ही रजिस्ट्रीकृत हैं या जिन्होंने विशिष्ट दत्तक-ग्रहण अभिकरण की मान्यता के अवसान, निलंबन अथवा प्रत्याहरण से पहले विशिष्ट दत्तक-ग्रहण अभिकरण से बालक के रेफरल को स्वीकार कर लिया हो;

(26) “दत्तकग्रहण – पूर्व पोषण देखरेख” से ऐसा प्रक्रम अभिप्रेत है जिसमें न्यायालय से दत्तक-ग्रहण आदेश लंबित होने पर, किसी बालक की अभिरक्षा भावी दत्तक माता या पिता को दे दी जाती है;

(27) “निवासी भारतीय” से भारत में रह रहा भारतीय नागरिक अभिप्रेत है;

(28) “नियम” से अधिनियम की धारा 68 के अधीन अधिसूचित नियम अभिप्रेत है;

(29) “अनुसूची” से इन मार्गदर्शक सिद्धांतों से उपाबद्ध अनुसूची अभिप्रेत है;

(30) संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में “राज्य सरकार” से संविधान से अनुच्छेद 239 से अधीन राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त उस संघ राज्यक्षेत्र का प्रशासक अभिप्रेत है;

(31) “विशिष्ट दत्तक-ग्रहण अभिकरण” से बालकों के दत्तक-ग्रहण में रखने के प्रयोजन के लिए राज्य सरकार द्वारा अधिनियम की धारा 41 की उप-धारा 4 के अधीन मान्यताप्राप्त अभिकरण अभिप्रेत है;

(32) “राज्य दत्तक-ग्रहण संसाधन अभिकरण” से एकीकृत बालक संरक्षण स्कीम के अधीन राज्य सरकार द्वारा स्थापित अभिकरण अभिप्रेत है;

(33) “अभ्यर्पित बालक” से ऐसा बालक अभिप्रेत है, जिसका बाल कल्याण समिति की राय से माता या पिता अथवा विधिक संरक्षक द्वारा, ऐसे शारीरिक, भावात्मक और सामाजिक कारकों के कारण, जो उनके नियंत्रण से परे है, त्याग कर दिया गया है;

(34) “सामाजिक कार्यकर्ता” से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिनके पास समाज कार्य, सामाजिक विज्ञान, मनोविज्ञान, बाल विकास अथवा गृह विज्ञान में स्नातकोत्तर डिग्री है, जिसे गृह अध्ययन रिपोर्ट, बालक अध्ययन रिपोर्ट तैयार करने, दत्तक-ग्रहण के पश्चात सेवाएँ प्रदान करने, और ऐसे व्यक्ति को समुनदेशित किसी अन्य कार्य को करने के लिए विशिष्ट दत्तक-ग्रहण अभिकरण द्वारा लगाया गया हो या जिला बाल संरक्षण एकक या राज्य दत्तक-ग्रहण संसाधन अभिकरण अथवा केन्द्रीय दत्तक-ग्रहण संसाधन प्राधिकरण द्वारा प्राधिकृत किया गया हो;

(35) उन सभी शब्दों और पदों के, जो इन मार्गदर्शक सिद्धांतों में प्रयुक्त हैं, परन्तु परिभाषित नहीं हैं, इही अर्थ होंगे, जो अधिनियम और इसके अधीन बनाए गए नियमों में उन्हें नियत किए गए है;

दत्तक-ग्रहण को शासित करने वाले मूलभूत सिद्धांत

भारत से बालकों के दत्तक-ग्रहण को शासित करने के निम्नलिखित मूलभूत सिद्धांत होंगे, अर्थात:-

(क)  कोई भी दत्तक-ग्रहण की प्रक्रिया करते समय, बालक के सर्वोत्तम हितों का सर्वोपरि ध्यान रखा जाएगा;

(ख)  यथासंभव, बालक के अपने समाज-सांस्कृतिक पर्यावरण में स्थापन के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए, बालक को भारतीय नागरिकों के साथ दत्तक-ग्रहण करने को वरीयता दी जाएगी ।

दत्तक-ग्रहण के लिए पात्र बालक

कोई भी अनाथ या परित्यक्त या अभ्यर्पित बालक, जिसे बाल कल्याण समिति द्वारा दत्तक-ग्रहण के लिए विधिक रूप से स्वतंत्र घोषित किया गया है, दत्तक-ग्रहण के लिए पत्र होगा ।

भावी दत्तक माता या पिता हेतु पात्रता मानदंड

(क) भावी दत्तक माता या पिता को शारीरिक, मानसिक और भावात्मक रूप से दृढ़; वित्तीय रूप से सक्षम; बालक का दत्तक-ग्रहण करने के लिए प्रेरित होना चाहिए; और उनकी जीवन को जोखिम में डालने वाली चिकित्सा स्थिति नहीं होनी चाहिए;

(ख)  कोई भी भावी दत्तक माता या पिता, उसकी वैवाहिक स्थिति पर ध्यान दिए बिना और भले ही उसका अपना जैव पुत्र या पुत्री हो अथवा नहीं हो, बालक का दत्तक-ग्रहण कर सकता है;

(ग)  एकल महिला किसी भी लिंग के बालक के दत्तक-ग्रहण ले लिए पात्र है;

(घ)  कोई एकल पुरुष अभिभावक किसी बालिका के दत्तक-ग्रहण के लिए पात्र नही है;

(ङ)   दंपत्ति की दशा में, पति-पत्नी दोनों की सहमति आवश्यक हो;

(च)  किसी भी बालक को एक दंपत्ति को तब तक दत्तक-ग्रहण में नहीं दिया जाएगा जब तक कि उन्होंने स्थायी वैवाहिक संबंधो के कम से कम दो वर्ष पूरे न कर लिए हों;

(छ)  पात्रता विनिश्चित आयु वर्ग के बालकों के लिए भावी दत्तक माता या पिता की पात्रता निम्नानुसार होगी:-

बालक की आयु

भावी दत्तक माता या पिता की अधिकतम संयुक्त आयु

एकल भावी दत्तक माता या पिता की अधिकतम आयु

4 वर्ष तक

90 वर्ष

45 वर्ष

4 वर्ष से 8 वर्ष तक

100 वर्ष

50 वर्ष

8 वर्ष से 18 वर्ष तक

110 वर्ष

55 वर्ष

(ज)  बालक और भावी दत्तक या पिता में से प्रत्येक की आयु में न्यूनतम अंतर 25 वर्ष से कम नहीं होना चाहिए;

(झ)  पात्रता के लिए आयु भावी दत्तक माता या पिता के रजिस्ट्रीकरण की तारीख को मानी जाएगी;

(ञ)  चार से अधिक बालकों वाले दंपतियों पर दत्तक-ग्रहण के लिए विचार नहीं किया जाएगा।

स्त्रोत: महिला और बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार

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