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दिव्यांगों के लिए आएंगे खास टीवी रिमोट, मोबाइल जीपीएस

सर्वप्रथम न्यूज़ : तोशियास सचिव सौरभ कुमार  के  1 साल  का मेहनत का परिणाम इसके लिए  संबंधित सभी कार्यालय में  आवेदन दिया  अंततोगत्वा उनकी बहुत  जीत हुई  दिव्यांग समाज की बहुत जल्द शारीरिक रूप से कमजोर दिव्यांग लोग भी मोबाइल और टीवी से जुड़ी तमाम तकनीकियों का पूरा इस्तेमाल कर सकेंगे। सामान्य लोगों की तरह वे भी अपने हिसाब से मोबाइल फोन के तमाम ऐप का मजा लेंगे और टीवी पर मनमाफिक कार्यक्रम भी देखेंगे। इसके लिए ट्राई मौजूदा सिस्टम में बड़ा बदलाव करने जा रह है। सूत्रों के अनुसार मोबाइल ऑपरेटर कंपनियां, केबल ऑपरेटर और बैंकों से जुड़ी कंपनियों के साथ विमर्श करने के बाद नए बदलाव लागू कर दिए जाएंगे। ट्राई का दावा है कि नए वित्तीय साल में यह बदलाव लागू हो जाएंगे और भारत भी उन चुने विकसित देशों में शामिल हो जाएगा, जहां तकनीकि का लाभ विकलांगों को मिलेगा। 2011 की जनगणना के अनुसार, देश में 2 करोड़ 68 लाख दिव्यांग हैं और ट्राई का मानना है कि वे तकनीकि के अभाव में डिजिटल इंडिया का सही मायनों में लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। प्रस्ताव के अनुसार तकनीक का लाभ दिव्यांगों को देने के बदले कंपनियां अलग से कोई शुल्क नहीं वसूलेंगी और इसमें आने वाला अतिरिक्त खर्च वे सीएसआर फंड और सरकार के सहयोग से वहन करेंगी। ट्राई के अनुसार अभी एक दर्जन से अधिक विकसित देश विकलांगों को तकनीक का अधिक से अधिक लाभ पहुंचा रहे हैं। वक्त की जरूरत है कि इस देश में भी इसका पूरा लाभ मिले। ट्राई ने इसके लिए संबंधित पक्षों से 31 जनवरी तक अपने विचार देने को कहा है।

कम सुनने वालों के लिए स्पेशल मशीन

दिव्यांग बेहतर तरीके से टीवी देखें, इसके लिए खास तरीके का रिमोट बनेगा, जिसमें उनके हिसाब से कंट्रोल का बटन होगा। ट्राई के अनुसार अभी कुछ टीवी रिमोट में इसकी सुविधा है लेकिन इसे सुव्यवस्थित तरीके से लागू करने की अनुशंसा की गई है। नहीं देख पाने वाले लोगों के लिए टीवी पर कार्यक्रम का स्पेशल ऑडियो इफेक्ट वर्जन भी बनाना होगा। टीवी कंपनियां कम सुनने वालों के लिए स्पेशल मशीन बनाएंगी। इसे टीवी के साथ खरीदने का विकल्प ऑफर किया जाएगा। मोबाइल में दिव्यांगों के लिए बैंकिंग और दूसरे वित्तीय लेन-देन से जुड़े अलग से फीचर होंगे। मोबाइल में ऐसे लोगों के लिए स्पेशल तकनीक से युक्त जीपीएस होगा, जो इन्हें बेहतर और सुरक्षित तरीके से दिशा ज्ञान देगा। यह जीपीएस खासतौर पर विकलांगों के लिए बनाया जाएगा।

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