अब दिव्यांग भी बन सकते हैं करोड़पति इनसाइडर ट्रेडिंग के मुखबिर को एक करोड़ रुपये का इनाम देगी

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : इस काम को कर के भी दिव्यांग बन सकते हैं करोड़पति इनसाइडर ट्रेडिंग यानी भेदिया कारोबार की पुख्ता सूचना देने वाले मुखबिरों को पूंजी बाजार नियामक सेबी ने एक करोड़ रुपये तक इनाम देने की घोषणा की है। इसका मकसद इनसाइडर ट्रेडिंग मामलों को बाहर लाना और सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव की संभावना को एक हद तक खत्म करना है। सेबी ने कहा है कि वह ऐसे मुखबिरों की गोपनीयता बनाए रखेगा और पूरी जानकारी साझा करने के लिए उन्हें हॉटलाइन सुविधा भी मुहैया कराएगा। इसके साथ ही अन्य कई बदलाव वाले प्रोहिबिशन ऑफ इनसाइडर ट्रेडिंग (पीआइटी) रेगुलेशंस को सेबी के निदेशक बोर्ड ने बुधवार को मंजूरी दे दी।

प्रावधानों में बदलाव के तहत जांच में सहयोग के बदले छोटी गड़बड़ियों के लिए माफी या उसके निपटान का भी प्रावधान किया गया है। हालांकि सेबी ने यह भी स्पष्ट किया है कि मुखबिरों में व्यक्तियों और कॉरपोरेट कंपनियों को ही यह इनाम दिया जाएगा और ऑडिटर जैसे पेशेवरों को इससे अलग रखा जाएगा। इसकी वजह यह है कि ऑडिटर जैसे पेशेवर अपनी ग्राहक कंपनियों में किसी गड़बड़झाले की जानकारी देने के लिए पहले से ही नियम के तहत बाध्य हैं। अधिकारियों ने कहा कि सेबी के लिये यह जरूरी है कि भेदिया कारोबार का पता लगाने के लिए सभी कानूनी उपायों का उपयोग करे और निवेशकों के बीच भरोसा तथा बाजार की विश्वसनीयता बनाए रखने को लेकर यथाशीघ्र कार्रवाई करे।

बाजार नियामक को भेदिया कारोबार मामलों की जांच करने के दौरान तारों को जोड़ने और साक्ष्य जुटाने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसके कारण ऐसे मामलों की जांच में लंबा समय लगता है। सेबी के पीआइटी रेगुलेशंस में प्रस्तावित संशोधन के तहत सूचना देने वालों को स्वैच्छिक सूचना घोषणा फॉर्म (वीआइडीएफ) देने की जरूरत होगी। इसमें भेदिया कारोबार मामले से जुड़ी विश्वसनीय, पूरी और मूल सूचना देनी होगी। इसमें अप्रकाशित संवेदनशील जानकारी का आदान—प्रदान या नियमों का उल्लंघन कर कारोबार करना आदि शामिल हैं। इसमें सूचना के स्रोत के बारे में जानकारी देना अनिवार्य होगा।

क्या है इनसाइडर ट्रेडिंग

इनसाइडर ट्रेडिंग वैसे मामले को कहा जाता हैं जहां कीमत से जुड़ी परोक्ष संवेदनशील जानकारी अपने पास रखते हुए शेयरों की खरीद-फरोख्त की जाती है। कंपनी के बोर्ड में हुए फैसलों के सार्वजनिक होने से पहले उसके आधार पर अपने फायदे के लिए शेयरों की खरीद-फरोख्त करना या किसी और को वह सूचना मुहैया कराना इनसाइडर ट्रेडिंग के दायरे में आता है।

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