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दिव्यांगों ने अनोखे तरीके से पूछा भारत सरकार से सवाल भारत में 7 लाख करोड़ का नुकसान 1 साल में जंग लगने से होता है तो क्या दिव्यांग जंग से भी खराब चीज है इस समाज के लिए

सर्वप्रथम न्यूज़  : जितने भारत में  जंग लक्कड़ बर्बाद हो जाता है  उतना तो  दिव्यांग का पेंशन भी नहीं  क्यों  भारत सरकार से पूछा  सवाल लिखा पत्र अनोखी तरीके  से भारत मौजूदा वक्त में 2.6 ट्रिलियन डॉलर (173 लाख करोड़ रुपए) वाली अर्थव्यवस्था है, जिसेअगले पांच साल में सरकार की तरफ से 5 ट्रिलियन डॉलर बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। हालांकि यह शायद भारत जैसे देश के लिए काफी हास्यास्पद बात होगी कि भारत की अर्थव्यवस्था को सालाना जंग लगनेसे 7 लाख करोड़ का नुकसान हो जाता है। भारत में जंग से होने वाले नुकसान का आंकड़ा वैश्विक स्तर पर काफी ज्यादा है। कॉरकॉन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉरोजन के मुताबिक वैश्विक स्तर पर जंग लगने से अर्थव्यवस्था को जहां 2.5 ट्रिलियन डॉलर (करीब 150 लाख करोड़ रुपए) का नुकसान होता है, जो कि ग्लोबल अर्थव्यवस्था का 3 से 4 फीसदी है। वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था को जंग से होने वाला नुकसान करीब तोशियास सचिव सौरभ कुमार ने कहा तो भारत मे इंफ्रास्ट्रक्चर में इस्तेमाल होने वाली स्टीलजिंक कोटेड नहीं होती है। मतलबगैल्वेनाइजस्टील का इस्तेमाल न के बराबर में होता है।

गैल्वेनाइजस्टील के इस्तेमाल को लेकर नियम-कानून नहीं

भारत सरकार की तरफ से गैल्वेनाइजस्टील के इस्तेमाल को लेकर नियम-कानून बनाना चाहिए, जिससे लंबे वक्त में अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। मौजूदा वक्त में गैल्वेनाइजस्टील और लोहे के इस्तेमाल को लेकर कोई गाइडलाइन तय नही है। सौरभ कुमार रियल एस्टेट में इस्तेमालगैल्वनाइज सरिया से घर की उम्र दोगुनी हो सकती है। साथ ही निर्माण के दौरान कुछ कोस्टल एरिया में भवन निर्माण के दौरान कंकरीट में भी इस्तेमाल किया जाता है। बता दें कि दिल्ली के लोटस टेंपल में गैल्वेनाइजस्टील से बनाया गया है।

किन जगह जिंक का होता है इस्तेमाल

जिंक का इस्तेमाल रियल एस्टेट सेक्टर, ऑटोमोबाइल सेक्टर, खेती, दवा बनाने में, पावरग्रिड की हाई वोल्टेज लाइन बनाने, रेलवे की इलेक्ट्रिक लाइन और ट्रैक बनाने, ताला बनाने, दरवाजे के लॉक, स्टीयरिंग व्हील, बिजली के यंत्र बनाने में किया जाता है।साथ ही रबर से बने टायर को बनाने में जिंक का इस्तेमाल किया जाता है। बच्चों में डायरिया के इलाज में जिंक से बनी मेडिसिन का इस्तेमाल होता है।

क्या होता है गैल्वेनाइजेशन

दरअसल जब कोई स्टील या लोहे की स्टील बनती है, तो उस पर जिंक की परत चढ़ा देते हैं। जिसे गैल्वेनाइज्ड स्टील या लोहा बोलते है और इस प्रक्रिया को गैल्वेनाइजेशन कहते हैं।गैल्वेनाइज्डस्टील पर जंग नहीं लगता है। गैल्वेनाइज्ड स्टील और लोहा आम लोहे के मुकाबले करीब ज्यादा वक्त तक चलता है।भारत के कोस्टल एरिया (समुद्री इलाके वाले क्षेत्र), बारिश वाले एरिया या फिर नमी वाले जगह पर जल्दी जंग लग जाती है। ऐसे एरिया में गैल्वेनाइज्ड स्टील का इस्तेमाल कारगर साबित हो सकता है।

जंग से लड़ने में पेंट कारगर नहीं

जंग से बचाने के लिए स्टील और लोहे में पेंट का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन यह ज्यादा कारगर साबित नहीं होता है। अगर पहली बार में गैल्वेनाइजस्टील से ही इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएं , तो उसकी लाइफकरीब 50 से 60 बढ़ जाती है, जबकि बिन गैल्वेनाइजस्टील वाला इंफ्रास्ट्रक्चर पेंट के अतिरिक्त खर्च के बावजूदजल्द खराब हो जाता है। इससे बड़े पैमाने पर सरकारी पैसे की बर्बादी होती है।  जंग की वजह से जल्द नहीं गिरेंगे, साथ ही लोगों की सुरक्षा भी रहेगी। वहीं रखरखाव के खर्च की बचत होगी।

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