मल्टीपल डिसेबिलिटी मैं हो रही है भारी अनियमितता

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 में उल्लेखित दिव्यांग जनों का अधिकार के बारे में बताया गया है उनमें से मल्टीपल डिसेबिलिटी के अंतर्गत अंतर्गत जो आते हैं उनमें से पहला है मानसिक मंदता दूसरा सरेबल पॉलिसी तीसरा मानसिक रोगी चौथा चलन निशिता पांचवा मुख नी सकता छावा श्रवण निशक्त आ सातवा ऑटिज्म आठवां दृष्टिबाधित नवा कुष्ठ रोग इसमें से रेलवे ने जो फॉर्मेट बनाया है इन सभी चीजों को लागू नहीं किया है इनमें से कुछ लागू है कुछ अभी भी बाकी है जैसे कि सरेबल पॉलिसी ऑटिज्म और कुष्ठ रोग जो अभी भी लागू नहीं है और रेलवे का जो फॉर्मेट है उसमें भी य कहीं नहीं दिखाया गया है फिर इसे किस फॉर्मेट में बनाया जाए रेलवे इसे कैसे मानेगा जब एमडी की ऑप्शन 2016 अधिनियम के तहत लागू की गई तो रेलवे अभी तक इन सभी चीजों को लागू क्यों नहीं किया अभी तक एसएससी विभाग चाहे वह सीजीएल हो चाहे एमटीएस या सीएचसीएल इन सभी विभागों में जो पीडब्ल्यूडी कैंडिडेट की जो वैकेंसी हर कैटेगरी की एक एक परसेंट दी गई थी उनमें जो मल्टीपल डिसेबिलिटी की वैकेंसी थी उनमें अभी तक जो 2016 अधिनियम के तहत जो एक पारित हुआ था वह अभी तक लागू नहीं किया गया है जो नए फॉर्म आए हैं उनमें यह ऑप्शन नहीं दिया गया है कि बच्चे मल्टीपल डिसेबिलिटी का फॉर्म फिल अप कर सकें जैसे कि रिवर फ्लो सी एच आई बीएच ऑटिज्म कुष्ठ रोग लोकोमोटर डिसेबिलिटी इन सब से जो दो या दो से अधिक हो उनका निदान हो सके लेकिन सिर्फ इसमें ब्लाइंड का दिखाया गया है आखिर ऐसा क्यों जब संविधान लागू हो चुका है फिर इस पर एसएससी अपना काम क्यों नहीं कर रहे सर आप से रिक्वेस्ट है कि आपने जितने भी फोन दिए हैं 2016 अधिनियम के लागू होने के बाद फिर से उनको सुधारने का मौका दें और यह सभी चीजों को लागू करें तोशियास इसके संबंध में उच्च पदाधिकारी को पत्र लिखा अनियमितता को दूर करने के बाद की ताकि दिव्यांगों मौलिक अधिकार पढ़ा तोो हो सके

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