जमुई जिले के सिकंदरा इलाके के एक महादलित टोले का रहने वाला जागेश्वर मांझी के हौसले की सब दाद दे रहे हैं. यह दिव्यांग युवक आज बेरोजगार युवक के लिए मिसाल बन गया है. जागेश्वर 2 साल की उम्र में ही अपने दोनों पैर गंवा चुका था, लेकिन उसने कभी हार नहीं मानी. परिवार चलाने के लिए पहले उसने साइकिल और बाइक के टायर का पंक्चर बनाने का काम किया और अब मूर्तिकार के रूप में अपनी पहचान बना रहा है.
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जागेश्वर मांझी अपने हुनर के साथ मां सरस्वती की प्रतिमा बना रहा है. मांझी का मानना है कि अगर वह प्रतिमा बना लेता है और वह बिक जाती है तो उसे कुछ पैसे मिल जाएंगे, जिससे वह अपनी मानसिक रूप से बीमार पत्नी का इलाज करा पाएगा. साथ ही जिंदगी जीने में भी कुछ सहूलियत हो जाएगी.
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जागेश्वर मांझी ने बताया कि उसने मूर्ति बनाने की 2 महीने की ट्रेनिंग ली हैॅ. इसके बाद से मांझी ने अब तक छह से अधिक मां सरस्वती की प्रतिमा बना चुका है. दोनों पैर से लाचार होने के बाद भी जागेश्वर ने कभी भीख मांगना पसंद नहीं किया. जबकि गरीब परिवार से होने के बाद भी उसे सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल सका है.
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